बुधवार, 28 मार्च 2012

बढ़ चलो ए जिंदगी


बढ़ चलो ए जिंदगी
                            
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हर अँधेरे को मिटाकर बढ़ चलो ए जिंदगी
आगे बढ़कर ही तुम्हारा पूर्ण स्वप्न हो पायेगा.




गर उलझकर ही रहोगी उलझनों में इस कदर,
डूब जाओगी भंवर में कुछ न फिर हो पायेगा.




आगे बढ़ने से तुम्हारे चल पड़ेंगे काफिले,
कोई अवरोध तुमको रोक नहीं पायेगा.


तुमसे मिलकर बढ़ चलेंगे संग सबके होसले,
जीना तुमको इस तरह से सहज कुछ हो पायेगा.


संग लेकर जब चलोगी सबको अपने साथ तुम,
चाह कर भी कोई तुमसे दूर ना हो पायेगा.


जुड़ सकेंगे पंख उसमे आशा और विश्वास के ,
''शालिनी'' का नाम भी पहचान नयी पायेगा.


      भारतीय हॉकी टीम के हौसले बुलंद करने में लगी शिखा कौशिक जी की एक शानदार प्रस्तुति को यहाँ आप सभी के सहयोग हेतु प्रस्तुत कर रही हूँ आशा है आप सभी का इस पुनीत कार्य में शिखा जी को अभूतपूर्व सहयोग अवश्य प्राप्त होगा.उनकी प्रस्तुति के लिए इस लिंक पर जाएँ-


हॉकी  हमारा राष्ट्रीय खेल 
        
            शालिनी कौशिक 




  

गुरुवार, 22 मार्च 2012

हे!माँ मेरे जिले के नेता को सी .एम् .बना दो.

हे!माँ  मेरे जिले के नेता  को  सी .एम् .बना  दो.

 

          आज के समाचार पत्रों में जब हमने बिजली के बारे में मुख्यमंत्री जी के निर्देश पढ़े तो यही विचार मन में तेजी से उभरे.निर्देश थे-
१-बोर्ड परीक्षार्थियों के लिए शाम को ६ बजे से रात के १०  बजे तक बिना रूकावट बिजली की उपलब्धता.
२-इटावा, कन्नौज और रामपुर को २४ घंटे बिजली.
      पहला निर्देश तो परीक्षार्थियों की सुविधा की दृष्टि से निष्पक्ष निर्देश के रूप में चिन्हित किया जा सकता है किन्तु कमी  ये है की ये समय तो उनकी पढाई की आवश्यकता को देखते हुए बहुत कम है.रात्रि में जब पढाई का सबसे महत्वपूर्ण समय है तब उनकी पढाई के लिए २४ घंटे बिजली का वादा करने वाले सपा सरकार  क्या इंतजाम  कर  रही है और ये निर्देश केवल २० अप्रैल तक हैं और वे भी बोर्ड परीक्षा को दृष्टिगत  रखते  हुए 29 मार्च  से जो विश्व विद्यालय  परीक्षा आरम्भ  हो रही है उसके लिए मुख्यमंत्री क्या अलग  से कुछ  बिजली की व्यवस्था करने की सोच  रहे हैं?
             पर जो निर्देश मुख्यमंत्री की कार्यप्रणाली  को पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के समकक्ष खड़े कर रहे हैं वह है उनके गृहजिले इटावा आदि को २४ घंटे बिजली के निर्देश.ये निर्देश देखते हुए तो मन यही कह रहा है-
हे!मैय्या मेरे जिले के नेता को मुख्यमंत्री बना दो या मुझे  ही  पद पर विराजमान करा दो कम से कम बिजली के दर्शन तो होंगे.


     शालिनी कौशिक [कौशल]



रविवार, 18 मार्च 2012

क्या यही लोकतंत्र है?

क्या यही लोकतंत्र है?
NULL Indians walk on a railway track in Mumbai, India, Thursday , March 15, 2012. Indian Railways Minister Dinesh Trivedi announced the first railway fare hike in eight years Wednesday, only to be shot down moments later by Congress party leader Mamata...

अमेरिका के  राष्ट्रपति अब्राहम  लिंकन की सर्वप्रसिद्ध परिभाषा  इस प्रकार है-
"प्रजातंत्र जनता का,जनता द्वारा तथा जनता के लिए शासन है."
                 
            और आज भारत में यही जनता शासन कर रही है .आज से नहीं बल्कि २६ जनवरी १९५० से जिस दिन हमारा गणतंत्र लागू हुआ था किन्तु क्या हम वास्तव  में इस शासन को अपने यहाँ महसूस  कर सकते हैं?शायद नहीं कारण साफ है जिन दलों के आधार पर हम अपने प्रतिनिधि  चुन  कर सरकार  बनाते  हैं जब उन दलों में ही लोकतंत्र नहीं है तो हम कैसे सच्चा लोकतंत्र अपने देश में कह सकते हैं?
              माननीय रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी जी ने इसबार  पूरे आत्मविश्वास से रेल बजट प्रस्तुत किया किन्तु उन्हें बदले में उन्ही के दल तृणमूल की प्रमुख ममता बैनर्जी  ने रेल किराया बढ़ाने को लेकर पद से इस्तीफा देने का फरमान जारी कर दिया .
           मैं पूछती  हूँ ममता जी से क्या उन्हें ऐसा करने का हक़ था ?जब दिनेश त्रिवेदी जी रेल मंत्री हैं और अपना बजट सदन में प्रस्तुत कर चुके हैं तो क्या सदन जिका कार्य उस पर विचार करना है क्या इस सम्बन्ध में निर्णय लेने  में अक्षम था?
       अब वे मुकुल राय जी का नाम इस पद हेतु प्रस्तावित कर रही हैं क्या उनके किसी कार्य को अपने सिद्धांतों के खिलाफ होने  पर क्या उनसे इस्तीफ़ा नहीं मांगेगी?क्या इस तरह वे स्वयं को भारतीय लोकतंत्र से ऊपर नहीं मानकर चल रही हैं?इस समय  दिनेश त्रिवेदी जी उनके अधीनस्थ पार्टी कार्यकर्ता नहीं हैं बल्कि भारतीय संविधान के महत्व पूर्ण केन्द्रीय मंत्री का पद भार संभाले हुए हैं और ऐसे में रेल बजट में क्या कमी है क्या जनता के साथ गलत हो रहा है ये देखना सदन की जिम्मेदारी है और ममता जी को ये कार्य उन्ही पर छोड़ देना चाहिए .अन्यथा हमें यही कहना होगा कि -
''लोकतंत्र मूर्खों का,मूर्खों  द्वारा और मूर्खों के लिए शासन है.''


शालिनी  कौशिक 
{कौशल}
 

शुक्रवार, 16 मार्च 2012

यह चिंगारी मज़हब की."

यह चिंगारी मज़हब की."


 

  "स्वयं सवारों को खाती है,
         गलत सवारी मज़हब की.
 ऐसा  न हो देश जला दे,
     यह चिंगारी मज़हब की."
          आज राजनीति में सबसे ज्यादा प्रमुखता पा रहा है "धर्म-जाति का मुद्दा".आज वोट पाने के  लिए राजनेता जिस मुद्दे को सर्वाधिक भुना रहे हैं वह यही है और इसी मुद्दे को सिरमौर बना आज सपा उत्तर प्रदेश में सत्ता पाने में सफल रही है और ये उसकी बड़ी बात है कि वह सत्ता पाने के बाद भी अपने वादे को भूली नहीं है और इसी अहसानमंदगी का सबूत है सपा के सत्तासीन होते ही  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद पर आसीन होने  वाले 33 वें  मुख्यमंत्री माननीय अखिलेश यादव जी द्वारा मुस्लिम बालिकाओं को कक्षा १० पास  करने पर तीस हज़ार के अनुदान की घोषणा .घोषणा प्रशंसनीय है क्योंकि हम सभी देखते हैं कि मुस्लिम बालिकाएं शिक्षा के क्षेत्र में उतनी  आगे नहीं जा पा रही हैं जितनी आगे अन्य धर्मों की बालिकाएं पहुँच रही हैं किन्तु यदि यह घोषणा सभी धर्मों की बालिकाओं के लिए की जाती तो इसकी महत्ता चार गुनी  हो जाती क्योंकि हमारे क्षेत्र में भी बहुत सी अन्य धर्मों की बालिकाएं ऐसी हैं जो आर्थिक कमी के कारण योग्य होते हुए भी बी.एड.करने से वंचित  हो रही हैं .आज उत्तर प्रदेश को विकास के रास्ते पर आगे बढ़ाने के लिए सत्ता को धर्म जाति के फेर से बाहर निकलना होगा क्योंकि ये मुद्दे विकास को बाधित कर देते हैं .आज जो सहायता मुख्यमंत्री केवल मुस्लिम बालिकाओं को दे रहे हैं उसकी हकदार सभी धर्मों जातियों की  योग्य बालिकाएं हैं भले ही उनके क्षेत्र से या घर से मुख्यमंत्री के दल को वोट न मिली हों क्योंकि अब वे  सरकार हैं और अब उन्हें इन  छोटी बातों को दरकिनार कर सभी को साथ लेकर आगे बढ़ना चाहिए.क्योंकि वैसे  भी एक  शायर कह ही गए हैं-
"दबी आवाज़ को गर ढंग से उभरा न गया,
    सूने आँगन को गर ढंग से बुहारा  न गया,
ऐ!सियासत के सरपरस्तों ज़रा गौर  से सुन लो ,
  जलजला आने को है गर उनको पुकारा न गया."
          
 

             शालिनी  कौशिक [कौशल ]
         

रविवार, 11 मार्च 2012

ये वंशवाद नहीं है क्या?

ये वंशवाद नहीं है क्या?
           
   उत्तर  प्रदेश में नयी सरकार  का गठन जोरों पर है .सपा ने बहुमत हासिल किया और सबकी जुबान पर एक ही नाम चढ़ गया माननीय मुख्यमंत्री पद के लिए और वह नाम है ''अखिलेश यादव''.जबकि चुनाव के दौरान अखिलेश स्वयं लगातार माननीय नेताजी शब्द का उच्चारण इस पद के लिए करते रहे  जिसमे साफ साफ यही दिखाई दे रहा था कि उनका इशारा कभी अपने पिताजी तो कभी अपनी ओर है  क्योंकि माननीय नेताजी तो कोई भी हो सकते हैं पिता हो या पुत्र और फिर यहाँ तो कहीं भी वंशवाद की छायामात्र   भी नहीं है दोनों ही राजनीतिज्ञ हैं और दोनों ही इस पद के योग्य भी .वे इस बारे में भले  ही कोई बात कहें  कहने के अधिकारी भी हैं और फिर उन्हें भारतीय माता की संतान होने  के कारण भारतीय मीडिया ने बोलने  का हक़ भी दिया है किन्तु कहाँ  है वह मीडिया जो नेहरु-गाँधी परिवार  के बच्चों  के राजनीति में आने पर जोर जोर से ''वंशवाद ''के खिलाफ बोलने लगता है क्या यहाँ उन्हें वंशवाद की झलक नहीं दिखती.  अखिलेश को चुनाव से पूर्व मुख्यमंत्री के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया और चुनावों के बाद पिता के दम पर हासिल जीत को पुत्र को समर्पित कर राजनीति में ''अपनी ढपली अपना राग''शुरू कर दिया गया.पर यहाँ कोई नहीं कहेगा  कि यहाँ कुछ भी ऐसा हुआ है जिसकी आलोचना स्वयं वे ही करते रहे हैं जो आज यही कर रहे हैं.सबको उनमे युवा वर्ग का भविष्य दिख रहा है सही है चढ़ते सूरज को सलाम करने से कोई भी क्यों चूकना चाहेगा.
                  शालिनी कौशिक 

शुक्रवार, 9 मार्च 2012

भारतीय हॉकी पुरुष टीम को लन्दन ओलंपिक के लिए हार्दिक शुभकामनायें !






आज  भारतीय  हॉकी  टीम सभी  के लिए चर्चा का  विषय  बनी है वजह केवल एक है और  वह है लन्दन ओलम्पिक  गोल्ड सभी  की इच्छा है की इस बार ये गोल्ड हमारे देश की झोली में आ जाये. 
                              

कर दे गोल ..........कर दे गोल !




ना छक्का ना चौका ;

दो हॉकी को मौका ;

सजा लो लबों पर बोल 

कर दे गोल ..........कर दे गोल !

शिखा कौशिक जी के द्वारा  रचित ये पंक्तियाँ स्वयं स्वरबद्ध की गयी हैं और  उनकी ये प्रस्तुति भारतीय टीम में जोश व् उत्साह का संचार करने में मेरे विचार में सक्षम है.शिखा  जी की भारतीय टीम के लिए यह सदभावना  काबिले तारीफ है.


 
[सभी  फोटो  गूगलसे साभार] 



प्रस्तुति-शालिनी  कौशिक 

सोमवार, 5 मार्च 2012

आओ खेलें ज्ञान की होली,


 Holi WallpaperHoli Wallpaper
[google se sabhar]


 आज मुझे ब्लॉग परिवार में बहुत सी होली की शुभकामनायें मिली किन्तु दुःख यह रहा कि  इंटरनेट के सही रूप से काम  न कर पाने के कारण  मैं अभी तक किसी को भी होली की शुभकामनायें प्रेषित नहीं कर पाई हूँ फिर मैंने सोचा की क्यों न मैं एक पोस्ट के माध्यम से ये पुनीत कार्य कर ही डालूँ.
  •     आज जब मैं बाज़ार से घर लौट रही थी तो देखा कि स्कूलों से बच्चे रंगे हुए लौट रहे हैं और वे खुश भी थे जबकि मैं उनकी यूनीफ़ॉर्म के रंग जाने के कारण ये सोच रही थी कि जब ये घर पहुंचेंगे तो इनकी मम्मी ज़रूर इन पर गुस्सा होंगी .बड़े होने पर हमारे मन में ऐसे ही भाव आ जाते हैं जबकि किसी भी त्यौहार का पूरा आनंद   बच्चे ही लेते हैं क्योंकि वे बिलकुल निश्छल भाव से भरे होते हैं और हमारे मन चिंताओं से ग्रसित हो जाते हैं किन्तु ये बड़ों का ही काम है कि वे बच्चों में ऐसी भावनाएं भरें जिससे बच्चे अच्छे ढंग से होली मनाएं.हमें चाहिए कि हम उनसे कहें कि होली आत्मीयता का त्यौहार है इसमें हम सभी को मिलजुल कर आपस में ही त्यौहार मानना चाहिए और कोशिश करनी चाहिए की हमारे काम से किसी के दिल को चोट न पहुंचे.ये कह कर कि "बुरा न मानो  होली है "कहने से गलत काम को सही नहीं किया जा सकता इसलिए कोशिश करो कि हम सबको ख़ुशी पहुंचाएं .किसी उदास चेहरे पर मुस्कुराहट  लाना हमारा त्यौहार मनाने का प्रमुख लक्ष्य होना चाहिए.फिर इस त्यौहार पर हम आज कुछ गलत वस्तुओं का प्रयोग कर दूसरों को परेशान करने की कोशिश करते हैं यह  भी एक गलत बात है त्यौहार पर हमें केवल प्राकृतिक रंगों से खेलना चाहिए.हम निम्न प्रकार रंग तैयार भी कर सकते हैं-
  • पिसे हुए लाल चन्दन के पाउडर को लाल रंग के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं.
  • हल्दी को पीले रंग के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं.
  • मेहँदी पाउडर को हरे रंग के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं.
  • गुडहल के फूलों को धूप में सुखाकर लाल रंग तैयार कर सकते हैं.
साथ ही रंग छुड़ाने के लिए भी आप इन तरकीबों का इस्तेमाल कर सकते हैं-
  • जहाँ रंग लगा हो उस स्थान पर खीरे की फांक रगड़ कर रंग छुड़ा सकते हैं.
  • नीम्बूँ के रस में चीनी मिलकर व् कच्चे पपीते के गूदे को रगड़ कर भी रंग छुड़ाया जा सकता है.
इस पर्व से जुडी सबसे प्रमुख कथा भक्त प्रह्लाद की है जिसमे उन्हें मारना  के लिए होलिका उन्हें लेकर अग्नि में बैठी  और भगवन भोलेनाथ द्वारा दिया गया दुशाला ओढ़ लिया किन्तु भक्त प्रह्लाद इश्वर  के सच्चे भक्त थे दुशाला उन पर आ गया और होलिका जल कर भस्म हो गयी इसी याद में हर वर्ष होलिका दहन किया जाता है और दुश्प्रवर्तियों   के शमन की कामना की जाती है.
आज आवश्यकता इसी बात की है की हम इस त्यौहार के मानाने  के कारण  पर ध्यान दें न की इसके ढंग पर .और आपस में भाईचारे को बढ़ाने  का काम करें न की नई दुश्मनिया बढ़ने का.जो ढंग इस वक़्त इस त्यौहार को मनाने का चल रहा है वह सही नहीं है.हम देखते हैं की रंग लगने के बाद सभी एक जैसे हो जाते हैं कोई बड़ा छोटा नहीं रह जाता .कोई अमीर  गरीब नहीं रह जाता तो हमारी भी कोशिश सभ्यता के दायरे में रहते हुए आपसी  प्रेम को बढाने की होनी चाहिए.मैं सोचती हूँ की मेरा यह लेख इस दिशा में आपको ज़रूर प्रेरित करेगा.मैं आपको अंत में साधक गुरुशरण के शब्दों में होली मनाने के उत्तम ढंग बताते हुए होली की शुभकामनायें प्रेषित करती हूँ.
"आओ खेलें ज्ञान की होली,
राग द्वेष भुलाएँ,
समता स्नेह  बढ़ा के दिल में
प्रेम का रंग लगायें."
     
            शालिनी कौशिक

रविवार, 4 मार्च 2012

ये है मिशन लन्दन ओलंपिक !

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         आज  भारत  में  चारों ओर हॉकी  टीम ने  अपने प्रदर्शन से धूम मचा रखी है .८ वर्ष बाद ओलम्पिक में भाग लेने का ये जो सुनहरा अवसर भारतीय हॉकी   टीम ने हासिल किया है उसे लेकर  सारे भारत को उनसे बहुत आशाएं हैं और आज सारा भारत उनके लिए यही दुआ मांग रहा है कि २०१२ का हॉकी गोल्ड भारत को ही प्राप्त हो.

barbican weekender

                               हॉकी में भारत का विश्व में अपना एक महत्वपूर्ण स्थान रहा है.मेजर  ध्यानचंद  हॉकी के जादूगर  की  उपाधि से नवाजे गए हैं .


Colors of IndiaColors of IndiaColors of India

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                 हॉकी भारतवर्ष के राष्ट्रीय खेल  का स्थान रखता है और पिछले कुछ समय के प्रदर्शन के कारण इस खेल पर जो  उँगलियाँ उठने लगी थी अब उन्हें झुकाने का समय भारतीय टीम ने हासिल किया है.और हमें पूरी आशा है कि भारतीय टीम ये स्वर्णिम अवसर कभी नहीं गवायेंगी.



Hockey team

                       भारतीय टीम को जोश से भरने हेतु ''शिखा कौशिक'' जी द्वारा स्वरबद्ध,स्वरचित ये गाना भी मैं यहाँ प्रस्तुत कर रही हूँ जिससे  मेरी  इस पोस्ट  की गुणवत्ता  में  अभिवृद्धि  होगी  और मैं ये मानती  हूँ  कि ये गाना भारतीय टीम में जोश भरने में और उन्हें सफलता  के  शीर्ष  पर पहुँचने  में भी अवश्य  मदद   करेगा .
                           ये  है मिशन  लन्दन ओलंपिक 

YE HAI MISSION LONDON OLYMPIC ! 
                                                     अंत में मैं अपनी भारतीय हॉकी टीम को यही कहना चाहूंगी -


 "कमाले  बुजदिली है पस्त होना अपनी आँखों में,
     अगर थोड़ी सी हिम्मत हो तो फिर क्या हो नहीं सकता.''
                                                                       चकबस्त.


                  ''ALL  THE  BEST  INDAIN  TEEM ''
                                शालिनी कौशिक 

... पता ही नहीं चला.

बारिश की बूंदे  गिरती लगातार  रोक देती हैं  गति जिंदगी की  और बहा ले जाती हैं  अपने साथ  कभी दर्द  तो  कभी खुशी भी  ...