शुक्रवार, 31 जनवरी 2014

मोदी अमेरिका वाले

मोदी अमेरिका वाले

अमेरिका विश्व का सबसे शक्तिशाली राष्ट्र है और इसका राष्ट्रपति विश्व का प्रथम व्यक्ति और इसलिए यह विश्व में जहाँ चलता है अपनी शर्तों पर चलता है .जब अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और वर्त्तमान राष्ट्रपति बराक ओबामा भारत आये तब यह वास्तविकता हमारे सामने आयी कि जब ये किसी देश में जाते हैं तब अपनी ही सुरक्षा में जाते हैं ये अपनी सुरक्षा स्वयं लेकर चलते हैं अन्य देश जिसका आतिथ्य ये स्वीकार करते हैं उसपर यकीन न करते हुए केवल व्यापारिक हित देखते हुए ये उसका निमंत्रण स्वीकार करते हैं .अब ये गुण हम अपने देश के एक कथित धरती पुत्र में भी देख रहे हैं .आज के समाचारों में ये बात काफी प्रचारित की जा रही है कि मेरठ रैली में नरेंद्र मोदी गुजरात पुलिस के घेरे में ही रहेंगे और और ''डी'' में रहेंगी सिर्फ गुजरात पुलिस कमांडो और ए.टी.एस.और मंच पर स्पेशल कमांडों की निगहबानी में भाषण देंगे मोदी .ये सब देखकर एक बात तो साफ़ है कि मोदी को पुलिस पर तो यकीन है पर केवल गुजरात की पुलिस पर और किसी जगह की पुलिस पर नहीं और चूँकि वे भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार हैं इसलिए सब राज्यों में जा तो रहे हैं किन्तु केवल वोट की खातिर न कि देश प्रेम की खातिर क्योंकि वे भी एक व्यापारी हैं अमेरिका की तरह वह अपना माल बेचने आता है ये अपने विचारों से जनता का वोट खरीदने आ रहे हैं लेकिन महत्व केवल गुजरात को ही देते हैं और ये यह साबित करने के लिए काफी है कि मोदी और अमेरिका एक ही नीति के अनुसरणकर्ता हैं और वह है पहले अपने शिकार को गधा बनाने की और फिर केवल ज़रुरत के लिए गधे को बाप बनाने की .
शालिनी कौशिक
[कौशल]

गुरुवार, 30 जनवरी 2014

धिक् पुरुष की गन्दी सोच

NCP woman leader nirbhaya was responsible for her rape
दामिनी गैंगरेप कांड और इसके पहले हुए बलात्कार और इसके बाद निरंतर हो रहे बलात्कारों ने देश में एक बहस सी छेड़ दी है और अधिकांशतया ये बहस एक ही कोण पर जाकर ठहर जाती है और वह कोण है नारी विरोध ,नारी से सम्बंधित जितने भी अपराध हैं उन सबमे एक ही परंपरा रही है नारी को ही जिम्मेदार ठहराने की .ये पहली और आखिरी पीड़ित होती है जो स्वयं ही अपराधी भी होती है .ऐसा नहीं है कि मात्र पुरुष ही नारी पर दोषरोपण करते हैं नारी भी स्वयं नारी पर ही दोष मढ़ती है और इसी कड़ी में एक नया नाम जुड़ा है महाराष्ट्र महिला आयोग की सदस्य और एन.सी.पी. नेता डॉ.आशा मिर्गी का ,जो कहती हैं कि नारी के साथ हो रहे इस अपराध के तीन ही कारण हैं -१-उसके अनुचित कपडे ,२-उसका अनुचित व्यवहार और ३- उसका अनुचित जगहों पर जाना ,बहुत गहराई से शोध किया गया है बलात्कार के कारणों का डॉ.आशा मिर्गी के कथन से तो यही लगता है और आश्चर्य है कि ऐसा वे तब कह रही हैं जब वे महाराष्ट्र जैसे राज्य की निवासी हैं जहाँ इस तरह के अपराधों की संख्या देश में सबसे ज्यादा होनी चाहिए क्योंकि उनके हिसाब से अनुचित कपडे ,अनुचित व्यव्हार व् अनुचित जगहों पर जाना इस अपराध का मूल कारण है तो महाराष्ट्र की राजधानी मुम्बई ,मुम्बई में बॉलीवुड और बॉलीवुड की हीरोइन जो इन सभी कार्यों में लिप्त हैं तब तो बलात्कार की संख्या सर्वाधिक भारत में यहीं होनी चाहिए जबकि आंकड़े तो कुछ और ही कहते हैं -

[Maximum rapes in India recorded in this state

Maximum rapes in India recorded in this state
Madhya Pradesh reported the highest number of rape cases (3,406) accounting for 14.1 per cent of total such cases reported in the country.
Rape cases have been further categorised as incest rape and other. Incest rape cases have decreased by 7.3 per cent from 288 cases in 2010 to 267 cases in 2011 as compared to 9.2 per cent increase in overall rape cases.
Maharashtra (44 cases) has accounted for the highest (15.3 per cent) incest rape cases.][एन.डी.टी.वी .से साभार ]
उपरोक्त आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश में ये संख्या सर्वाधिक है महाराष्ट्र में नहीं ,फिर क्या डॉ.आशा मिर्गी ने उन्हें अपने शोध में सम्मिलित करते हुए ये विचार व्यक्त किये हैं या उन्हें भी यहाँ वैसे ही दरकिनार कर दिया है जैसे अपने सतही शोध में वास्तविक कारणों को .
बलात्कार आज हमारे देश ही क्या विश्व की समस्या बन चूका है ,न केवल भारत बल्कि सम्पूर्ण विश्व की नारी इस अपराध को झेल रही है .जब मिस वर्ल्ड की प्रतियोगिता में शामिल होने जा रही प्रतिभागी तक को ये झेलना पड़ता है तब इस अपराध के विश्वव्यापी होने को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता ,अंतर सिर्फ ये है कि वह प्रतिभागी तब भी उस प्रतियोगिता में भाग लेती है और विजयी होती है और भारत भारत में बलात्कार की शिकार नारी का तो मानो जीवन ही समाप्त हो जाता है क्योंकि भारत के बाहर यह एक अपराध है इसमें नारी का दोष नहीं ढूँढा जाता किन्तु भारत में ये अपराध होने पर सर्वप्रथम नारी को ही कलंकित करना शुरू कर दिया जाता है अपराधी बना दिया जाता है .
सभी ये मानते हैं कि लड़कियों को सही कपडे पहनने चाहियें ,सही व्यवहार रखना चाहिए ,सही जगहों पर जाना चाहिए किन्तु क्या कोई भी यह कह सकता है कि आज बलात्कार हर तरह से गलत लड़की के साथ हो रहे हैं यदि ऐसा है तो बॉलीवुड की कोई हेरोइन ,डैली सोप की अभिनेत्री ,मॉडल आदि तो इस अपराध से बच ही नहीं सकती क्योंकि वे तो हर तरह से गलत कपडे पहनती हैं ,गलत व्यवहार के रूप में हर तरह के गलत हाव-भाव का प्रयोग करती हैं और ऐसी गलत जगहों पर जाती हैं जहाँ यौन शोषण एक आम बात है ,जब दूरदर्शन जैसे राष्ट्रीय चैनल पर खुलेआम नगनता, उत्तेजक दृश्यों व् अश्लील व्यवहार सबके सामने हो रहा है -

आलोचना -सामाजिक -दूरदर्शन पर खुलेआम महिला शोषण [contest]

तब अन्य चैनल्स की स्थिति तो सोची भी नहीं जा सकती ऐसे में इस अपराध के मूल कारणों से ध्यान हटाकर नारी पर ही इसका दोषारोपण किया जाना निंदनीय है .
इस अपराध का करने वाला पुरुष है और मात्र एक शरीर नहीं वरन उसकी सोच भी इस अपराध का मूल कारण है .न केवल नारी शरीर से पुरुष अपनी हवस मिटाता है वरन वह मिटाता है इससे सम्बंधित नारी के पिता ,भाई, पति से अपनी रंजिश की प्यास ,वह लेता है बदला उस नारी से अपनी उपेक्षा का ,वह सिखाता है उसे सबक कि उसे नहीं अधिकार पुरुष के एकतरफा प्यार को ठुकराने का और वह दिखाता है उसे उसकी वास्तविक स्थिति कि उसमे नहीं दम इस समाज में अपना प्रतिष्ठापूर्ण स्थान बनाने का और यदि ऐसा नहीं है तो गाँव में चारा काटने गयी ,खेत में पति के लिए भोजन लेकर गयी ,शहरों -कस्बों में स्कूल में पढने-पढ़ाने गयी ,बस में सफ़र कर रही कपड़ों से ढकी छिपी डरी डरी सी लड़कियां क्यूँ खुलेआम बलात्कार का शिकार हो रही अं ?क्यूँ शिकार हो रही हैं वे ज़रा सी बच्चियां जिन्होंने अभी चलना -फिरना बाते करना सीखा ही है ?क्यूँ इनके साथ हो रहे हैं गैंगरेप ?क्या एक लड़की के अनुचित कपडे ,अनुचित व्यवहार ,अनुचित जगह पर जाने मात्र से ५ से ७ लोगों की हवस की भावना या कहूँ वासना इस कदर उबल सकती है कि वे ऐसी घटना को अंजाम दे दें ?
क्यूँ नहीं ऐसे विषयों पर बोलते वक़्त ये हमारे देश समाज के कर्णधार गहराई से अवलोकन करते हैं इन तथ्यों का जो चीख-चीखकर कहते हैं कि ये सब पुरुषों के द्वारा पूर्व नियोजित होता है .यह अचानक से नहीं होता और नारी केवल इसी करना इसका शिकार होती है क्योंकि नारी को प्रकृति ने कमज़ोर बनाया है और उसे इस अपराध से उत्पन्न बीज को ढोने का श्राप दिया है[जो कार्य समाज की मर्यादाओं के अनुसार होने पर नारी के लिए वरदान कहा जाता है वही कार्य ऐसी परिस्थितियों में नारी के लिए श्राप बन जाता है क्योंकि ये साबित करना कि ये बच्चा धर्म युक्त है या धर्म विरुद्ध नारी की ही जिम्मेदारी होती है और ये कार्य उसके लिए ऐसी परिस्थितियों में मुश्किल नहीं तो कठिन अवश्य होता है और उसकी इसी मजबूरी का लाभ पुरुष वर्ग द्वारा एक खेल की तरह उठाया जाता है .]
और बाकी सब ऐसी सोच रखने वाले लोग कर रहे हैं जो पुरुषों की गन्दी सोच का कारण भी नारी को ही बना रहे हैं जबकि इस अपराध का केवल और केवल एक ही कारण है ''पुरुष की गन्दी सोच'' और ये ही वजह भी है बहुत सी जगह नारी के अनुचित कपड़ों,अनुचित व्यवहार व् अनुचित जगहों पर जाने की क्योंकि वह इसी सोच का फायदा उठाने को कभी मजबूरी वश तो कभी तरक्की की चाह में ऐसा करने को आगे बढ़ जाती है .
शालिनी कौशिक
[कौशल ]

बुधवार, 29 जनवरी 2014

तेरी रब ने बना दी जोड़ी

एक फ़िल्मी गाना शायद सभी ने सुना होगा -
''सच्चाई छिप नहीं सकती बनावट के उसूलों से ,
कि खुश्बू आ नहीं सकती कभी कागज़ के फूलों से .''
और आम आदमी पार्टी चाहे आम आदमी का कितना ही चोला ओढ़ ले चाहे अपनी सफलता को कितना ही अपनी जन लोकप्रियता में तोल ले किन्तु 'जैसे कि कागज़ के फूलों से कभी खुश्बू नहीं आ सकती ,जैसे चोर की दाढ़ी में तिनका हो तो वह देर-सवेर दिख ही जाता है तो यही दिखने लगा है .सत्ता हाथ में आते ही आम आदमी पार्टी पर यह सफलता पचाए नहीं पच रही रोज़ नए नाटक ,यही कहना होगा क्योंकि इन्हें कोई काम नहीं है सिवाय इसके कि किसी भी तरह ऐसा कुछ किया जाये कि कॉंग्रेस अपना समर्थन वापस ले ले और हम अपने को पीड़ित दिखाकर जनता से सहानुभूति वोट ले ले .राहुल गांधी की लोकप्रियता से मुफ्त में प्रचार पाने वाले कुमार विश्वास आज राहुल गांधी के नाम की ही बदौलत एक जाना पहचाना नाम हैं और लगातार लगे हुए हैं कुछ भी ऐसा करने में जिससे जनता एक ऐसी पार्टी को समर्थन देने के लिए राहुल जी के पार्टी को नकार दे और इसलिए जानते हैं कि इसका आसान तरीका है जनता की भावनाओं को भड़काने का और वे यही कर रहे हैं
पार्टी के ल‌िए मुसीबत बने कव‌िराज  [आम आदमी पार्टी के नेता कुमार व‌िश्वास एक के बाद एक मुश्क‌िलों में फंसते जा रहे हैं। मुस्ल‌िमों की भावनाओं के भड़काने के मामले के बाद अब उन पर स‌िख धर्म को मानने वालों की भावनाएं भड़काने का आरोप लगा है।
इससे पहले कुमार व‌िश्वास पर लखनऊ और बरेली में धार्म‌िक भावनाएं आहत करने के मामले में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। एक के बाद एक व‌िवाद और अपनी ही पार्टी में शुरू हुई बगावत के कारण कुमार व‌िश्वास पार्टी के ल‌िए बड़ी मुश्क‌िलें खड़ी कर रहे हैं।
धार्म‌िक भावनाओं के अलावा उन पर नस्लवाद जैसे गंभीर आरोप भी लगे हैं, ज‌िस पर केरलकांग्रेस की ओर से उनके ख‌िलाफ आपत्त‌ि दर्ज कराई गई थी।].[अमर उजाला से साभार ]
यही नहीं यह पार्टी बात तो आम आदमी के हित की करती है और काम उसके खिलाफ करती है इस वक़्त जब दिल्ली की सत्ता इनके हाथ लगी है तो इन्हें जबकि यह पता है कि यह सत्ता एक स्थिर सरकार नहीं है और ज़रूरी नहीं कि आगे इन्हें सत्ता में आने का मौका मिले तो फिर इन्हें यदि ये जनता का हित चाहने वाले हैं तो जनता का हित देखते हुए उस तरफ ही अपना ध्यान लगाना चाहिए किन्तु ये लगे हैं ऐसे कार्यों में जिससे अधिक से अधिक लोकप्रियता हासिल कर अपने लिए लोकसभा चुनावों में आने का एक मजबूत स्थान बना सकें इस पार्टी को देखकर और इनके कानून मंत्री को देखकर तो यही लगता है कि बिल्ली के भाग से छींका फूटा ,पहले तो स्वयं सेक्स रैकिट पर छापा डालने पहुँच गए और अब जब बात गले से नीचे नहीं उतर रही तो लगे हैं अनर्गल प्रलाप करने .
जुबान संभाल कर बोलें सोमनाथ
जैसे सावन के अंधे को हरा ही हरा दिखायी देता है ऐसे ही इनके साथ हुआ है ये भ्रष्टाचार के अंधे हैं इन्हें हर जगह भ्रष्टाचार ही दिख रहा है और यह भी हो सकता है कि हर जगह मीडिया को साथ लेकर फिरने वाले ये स्वयं भी उसका ऐसे ही इस्तेमाल करते हों इसलिए दिल्ली महिला आयोग व् अपने वकील की बहस पर सवाल पूछने पर सोमनाथ भारती जल्दी में अपनेही तरीके उजागर कर गए और कह गए कि मोदी से कितने पैसे लिए और अब इनके मुखिया जी को ही देख लीजिये एक तरफ तो उपराज्यपाल महोदय के पास पहुँचते हैं १९८४ के दंगों में कॉंग्रेस की भूमिका की जाँच के लिए और उस आतंकी के लिए जिसका कच्चा चिठा ये है -
देवेंद्र सिंह भुल्लर को 1993 में नई दिल्ली के रायसीना रोड पर यूथ कांग्रेस ऑफिस पर हुए धमाके में मौत की सजा हुई है। धमाके में 9 लोग मारे गए थे और उस समय के युवा कांग्रेस अध्यक्ष एमएस बिट्टा सहित 25 लोग घायल हुए थे।[अमर उजाला से साभार ]
उसके लिए मांगते हैं माफ़ी [स्वयं का तो कुछ भी नहीं है इस पार्टी के पास सब कुछ नक़ल ,इस आतंकी के मानसिक रूप से बीमार होने पर इसकी पत्नी की मांग पर ये मांग तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने भी की थी]
Arvind kejriwal oppose bhullar's capital punishment

आतंकी भुल्लर की फांसी के व‌िरोध में आए केजरीवाल

और मीडिया हर वक़्त हर कदम पर इनके साथ ये भला करें तो बखान , बुरा करें तो ढलान .किन्तु आप के तेवर देखकर भी यही लगता है कि वह भी मीडिया के साथ वैसे ही है जैसे ''तू डाल डाल मैं पात पात ''और इसलिए अभी तो सोमनाथ ने इनसे ये ही पुछा है कि कितने पैसे दिए मोदी ने आगे पता नहीं क्या क्या पूछेंगे .वैसे भी मीडिया ने ही इस पार्टी को उभारा है इसलिए ये भी तो अपने पर किये गए एहसान को चुकाएंगे और इस तरह विभीषण बन मीडिया की लंका को ढहाएंगे .अब तो केवल यही कहा जा सकता है -
''इब्तदाये इश्क़ है रोता है क्या ,
आगे आगे देखिये होता है क्या .''
शालिनी कौशिक
[कौशल ]

मंगलवार, 28 जनवरी 2014

ग़ज़ल-पहेली

 

सियासत से बचो इसकी ,करीब ऐसे दिन आये ,
छुरी घोपे जिन हाथों से ,उन्हीं को जोड़कर आये ,
महारत इसको हासिल है ,क़त्ल में और खुशामद में ,
संभल जाओ वतन वालो ,ये नेता जब नज़र आये .
.........................................................
मुशफ़िक़ है मुआ ऐसा ,जल्लाद शरम खाये ,
मुस्कान से ये अपनी ,मुर्दा मुझे कर जाये ,
मौका परस्त ऐसा ,मेराज समझ मुझको ,
मैयत मेरी सजाकर ,मासूम बनकर आये .
.................................................
जन्मा ये जिस जमीं पर ,उसपर ही ज़ुल्म ढाये ,
जमहूर के गले लग ,जेबें भी क़तर जाये ,
करता खुशामदें है ,पाने को तख़्त आज ,
पाये जो गद्दी ,गरदनों पे छुरी फेर जाये .
..................................
फितरत से है तकसीमी ,तंगदिल ही नज़र आये ,
तजवीज़ ये बड़ों की ,बिल्कुल न समझ पाये ,
कितने ही वार करले ,कितना ही मुंह छुपाले ,
नेता या आम इंसां ,करनी से बच न पाये .
.......................................
तरक्की की सभी मंज़िल ,हमारा मुल्क चढ़ जाये ,
मगर जिसकी ये मेहनत है ,उसे ये देख न पाये ,
ये चाहे बांटना हमको ,हिन्दू और मुसलमाँ में ,
भले इसकी सियासत से ,लहू का दरिया बह जाये .
......................................................
मुझे तो ये सियासत का ही ,बस पुतला नज़र आये ,
काबिल औ नाकाबिल में ,नहीं ये भेद कर पाये ,
डरे क्या ''शालिनी'' इससे ,डरी है सारी दुनिया ही ,
कोई भी वीज़ा देने को ,इसे आगे न बढ़ पाये .
.......................
शब्दार्थ:मुशफ़िक़-कृपालु ,मुआ-निगोड़ा ,मेराज़ -सीढ़ी ,जमहूर-जनसमूह ,तकसीमी-बंटवारे की चाह वाला ,

-शालिनी कौशिक
[कौशल ]

सोमवार, 27 जनवरी 2014

दिल्ली वापस केंद्रशासित हो

Delhi Photos Map
संविधान के ६९ वे संशोधन अधिनियम १९९१ द्वारा संविधान में दो नए अनुच्छेद २३९ क क और २३९ क ख जोड़े गए हैं जिनके अधीन दिल्ली को एक नया दर्जा प्रदान किया गया .अनु.२३९ क क कहता है -
''कि संघ राज्य क्षेत्र दिल्ली को अब राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के नाम से जाना जायेगा और अनुच्छेद २३९ के अधीन नियुक्त इसके प्रशासक को अब उपराज्यपाल कहा जायेगा .''
अनुच्छेद २३९ क क राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र के लिए एक विधान सभा सृजित करता है .विधान सभा में सदस्यों की संख्या और इसके कार्यों से सम्बंधित सभी मामलों को संसद विधि द्वारा विनियमित करेगी .
विधान सभा को राष्ट्रीय राजधानी राज्यक्षेत्र के सम्पूर्ण अथवा किसी भाग के लिए राज्य सूची अथवा समवर्ती सूची में विनिर्दिष्ट विषयों में से किसी के सम्बन्ध में विधि बनाने की शक्ति होगी किन्तु उसे राज्य सूची की प्रविष्टि १,२,१८ और ६४ ,६५ तथा ६६ के सम्बन्ध में विधि बनाने की शक्ति नहीं होगी .उपखण्ड [१] में का कुछ भी ,संघ राज्य क्षेत्र या उसके किसी भाग के मामले के सम्बन्ध में विधि बनाने के लिए संसद की शक्तियों का अल्पीकरण नहीं करेगी .
और राज्य सूची की प्रविष्टि २ -
२-सूची -१ की प्रविष्टि २ [क] के उपबंधों के अधीन रहते हुए पुलिस [जिसके अंतर्गत रेल और ग्राम पुलिस भी हैं ].
और राज्य सूची की इसी प्रविष्टि पर दिल्ली की सरकार के लिए कानून बनाने पर लगाया गया प्रतिबन्ध दिल्ली में पहली बार बनी ''आप'' की सरकार ने विवाद का मुद्दा बना लिया .दिल्ली में पुलिस दिल्ली सरकार के अधीन न होकर संसद के अधीन है और यह मुद्दा इससे पहले दामिनी गैंगरेप कांड के समय २०१२ में भी सामने आया था किन्तु शीला दीक्षित सरकार ने इसे कोई खास तूल न देते हुए सारी जिम्मेदारी स्वयं पर ली किन्तु जैसा कि अरविन्द केजरीवाल कहते हैं कि हम मुद्दों के लिए ही आये हैं तो ये बात वे सिद्ध भी कर रहे हैं और जिस दिन से उन्होंने सरकार बनायीं है किसी भी बात को हल्के में न लेकर चर्चा का विषय बनाया है .सर्वप्रथम तो उन्होंने शपथग्रहण समारोह ही निश्चित सरकारी स्थल से और जगह आयोजित कराया और जिस कारण एक निश्चित क्षेत्र से बढाकर पुलिस को सुरक्षा व्यवस्था का बहुत लम्बे क्षेत्र में आयोजन करना पड़ा और यहाँ तक तो फिर भी खैर थी किन्तु वे आजतक भी स्वयं के लिए कोई सुरक्षा नहीं ले रहे हैं ये कहकर कि मुझे कोई खतरा नहीं जबकि मुख्यमंत्री जैसे पद पर बैठकर उनका सुरक्षा दायरे से बाहर रहना न केवल उनके लिए बल्कि उनसे जुड़ने वाले भारी जनसमूह के लिए भी खतरा है .

दुसरे उनके कानून मंत्री सोमनाथ भारती कहने को तो कानून का पालन कराने के लिए स्वयं आगे बढ़ रहे हैं जबकि वास्तव में वे कानून का केवल मखौल उड़ा रहे हैं .वे दिल्ली पुलिस से बिना वारंट कथित सेक्स रैकैट की रात में गिरफ़्तारी चाहते हैं सर्वप्रथम तो पुलिस द्वारा बगैर वारंट के गिरफ़्तारी कानून ने कुछ निश्चित मामलों में ही सम्भव की हुई है किन्तु यहाँ सर्वाधिक महत्वपूर्ण बात यह थी कि यहाँ विशेषकर महिलाओं की गिरफ़्तारी होनी थी जिसके बारे में दंड प्रक्रिया संहिता १९७३ की धारा ४६ में उपधारा [४] जो कि दंड प्रक्रिया संहिता [संशोधन अधिनियम संख्या २५,२००५ द्वारा अन्तः स्थापित किया गया है और जिसे दिनांक २३.६.२००५ को राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त हुई ]में कहा गया है -
''असाधारण परिस्थितियों के सिवाय कोई स्त्री सूर्यास्त के पश्चात् और सूर्योदय से पहले गिरफ्तार नहीं की जायेगी और जहाँ ऐसी असाधारण परिस्थितियां विद्यमान हैं वहाँ स्त्री पुलिस अधिकारी लिखित में रिपोर्ट करके ,ऐसे प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट की पूर्व अनुज्ञा अभिप्राप्त करेगी ,जिसकी स्थानीय अधिकारिता के भीतर अपराध किया गया है या गिरफ़्तारी की जानी है .''
और इस प्रक्रिया के अनुसरण की जगह दिल्ली के कानून मंत्री सोमनाथ भारती स्वयं पहले पुलिस पर हुकुम चलाते हैं और उनके द्वारा कानून की अवज्ञा से इंकार करने पर स्वयं उस कथित सेक्स रैकैट पर सेंध डालने पहुँच जाते हैं और कानून का मखौल स्वयं उड़ाते हुए महिलाओं से बदसलूकी करते हैं और बाद में मुद्दों के लिए आये केजरीवाल उनके समर्थन में अपनी राजनीतिक गरिमा की धज्जियाँ उड़ाते हुए धरने पर उतारू हो जाते हैं और केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा धरना स्थल के लिए जगह सुझाने पर ,''कौन होता है शिंदे ,मैं मुख्यमंत्री हूँ मैं कहीं भी बैठ सकता हूँ ,कहकर नॉर्थ ब्लॉक पर पहुँच पाने में असफल रहने पर रेल भवन के आगे अपने पूरे मंत्रमंडल व् पूरे तामझाम सहित धरना देने बैठ जाते हैं और गणतंत्र मनाने पर के लिए भी देशविरोधी टिप्पणी करते हैं ये भूलकर कि वे भी इसी गणतंत्र के नागरिक हैं और जिस आम आदमी के नाम पर वे सत्ता में आये हैं और जिसके वे इस वक़्त सबसे बड़े हितेषी के रूप में स्वयं को प्रदर्शित कर रहे हैं उसे उनके इस तरह के कार्यों से प्रत्यक्ष व् अप्रत्यक्ष दोनों ही तरह से असुविधा ही हो रही है .इनकी कार्यप्रणाली इनकी राजनैतिक अनुभवहीनता ही दिखाती है साथ ही साफ़ तौर पर यही दिखाती है कि कॉंग्रेस के समर्थन ने इन्हें सत्ता में आने को और सत्ता सँभालने को विवश कर दिया नहीं तो इनके इरादे अभी जनता को और सपने दिखाने के थे पर अब जब ये दिल्ली के आकाश पर आ गए तो अपने प्रशंसकों में अपना रुतबा बनाये रखने के लिए ऐसी कार्यवाही पर उतारू हैं जिससे तंग आकर केंद्र वहाँ राष्ट्रपति शासन लागू कर दे और इन्हें स्वयं के साथ अन्याय का रोना रोने का अवसर मिल सके .इनकी भूतपूर्व सहयोगी किरण बेदी भी इनके बारे में यही विचार रखती हैं .वे कहती हैं -
''दिल्ली का राजनीतिक नेतृत्व शासन की जिम्मेदारी से बाहर निकलने की खुजली से छटपटा रहा है .शायद वे दिल्ली पुलिस के साथ इसलिए टकराव मोल ले रहे हैं कि उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाये .''
ऐसे में खुद को अराजकतावादी कहने वाले केजरीवाल शिंदे के लिए अराजकता पैदा करने की बात कर रहे हैं और साथ ही यह भी कहते हैं कि यदि कोई संवैधानिक संकट पैदा हुआ तो इसके लिए केंद्र ,प्रधानमंत्री व् गृह मंत्री जिम्मेदार होंगे और इस तरह से ''चित भी मेरी पट भी मेरी .....''वाली बात कर देश को ही संकट में डालने पर उतारू हो रहे हैं .वे पुलिस में भी ईमानदार लोगों को धरने में आने के लिए उकसाते हैं और जब बात उनकी ईमानदारी की आती है अर्थात उनके कानून मंत्री पर कार्यवाही की आती है -
[सोमनाथ पर कोई कार्रवाई नहीं करेगी 'आप'
जुबान संभाल कर बोलें सोमनाथ
युगांडा की कुछ महिलाओं के साथ कथित दुर्व्यवहार के मामले में फंसे दिल्ली के कानून मंत्री सोमनाथ भारती को फिलहाल राहत मिल गई है।
आम आदमी पार्टी ने उपराज्यपाल की जांच कमेटी की रिपोर्ट आने तक कानून मंत्री पर किसी तरह की कार्रवाई से इंकार किया।][अमर उजाला से साभार ]
.....तो उसकी जगह वे उनके समर्थन में खड़े हो जाते हैं .
ऐसे में वे दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने व् पुलिस की नकेल खुद के अर्थात दिल्ली सरकार के हाथ में होने की बात करते हैं जबकि जो परिस्थितियां उन्होंने उत्पन्न की हैं उन्हें देखते हुए दिल्ली का राज्य का दर्जा ही समाप्त हो जाना चाहिए क्योंकि दिल्ली भारत की राजधानी है ,यहाँ देश के महत्वपूर्ण प्रतिष्ठान हैं ,पूरे देश की सुरक्षा दिल्ली की सुरक्षा पर निर्भर है और यहाँ पहले भी संसद पर हमले जैसी घटनाएं हो चुकी हैं .ऐसे में भविष्य़ में सतर्कता को लेकर और सम्पूर्ण राष्ट्र की सुरक्षा के मद्दे नज़र दिल्ली को वापस केंद्र शासित प्रदेश का ही दर्जा मिल जाना चाहिए क्योंकि राज्य और केंद्र का टकराव सर्वविदित है किन्तु दिल्ली के सम्बन्ध में आप की कार्यप्रणाली को देखते हुए ऐसे खतरे को मोल नहीं लिया जा सकता .
शालिनी कौशिक
[कौशल ]

सच्चाई ये ज़माने की थोड़ी न मुकम्मल ,


ज़िंदगी उस शख्स की सुकूँ से गुज़र सकी ,
औलाद जिसकी दुनिया में काबिल न बन सकी .
.....................................
बेटे रहे हैं साथ वही माँ-बाप के अपने ,
बदकिस्मती से नौकरी जिनकी न लग सकी .
..................................................
बेटी करे बढ़कर वही माँ-बाप की खातिर ,
मैके के दम पे सासरे के सिर जो चढ़ सकी .
.............................
भाई करे भाई का अदब उसी घडी में ,
भाई की मदद उसकी गाड़ी पार कर सकी .
...............................................
बहन बने भाई की तब ही मददगार ,
अव्वल वो उससे उल्लू अपना सीधा कर सकी .
..................................................
बीवी करे है खिदमतें ख्वाहिश ये दिल में रख ,
शौहर की शख्सियत से उसकी साख बन सकी .
..............................................
शौहर करे है बीवी का ख्याल सोच ये ,
रखवाई घर की दासी से बेहतर ये कर सकी .
................................................
सच्चाई ये ज़माने की थोड़ी न मुकम्मल ,
तस्वीर का एक रुख ही ''शालिनी ''कह सकी .
....
शालिनी कौशिक
[कौशल ]

शनिवार, 25 जनवरी 2014

तिरंगा शान है अपनी ,फ़लक पर आज फहराए ,

तिरंगा शान है अपनी ,फ़लक पर आज फहराए ,
फतह की ये है निशानी ,फ़लक पर आज फहराए .
...............................................
रहे महफूज़ अपना देश ,साये में सदा इसके ,
मुस्तकिल पाए बुलंदी फ़लक पर आज फहराए .
.............................................
मिली जो आज़ादी हमको ,शरीक़ उसमे है ये भी,
शाकिर हम सभी इसके फ़लक पर आज फहराए .
...............................
क़सम खाई तले इसके ,भगा देंगे फिरंगी को ,
इरादों को दी मज़बूती फ़लक पर आज फहराए .
..................................
शाहिद ये गुलामी का ,शाहिद ये फ़राखी का ,
हमसफ़र फिल हकीक़त में ,फ़लक पर आज फहराए .
..................................
वज़ूद मुल्क का अपने ,हशमत है ये हम सबका ,
पायतख्त की ये लताफत फ़लक पर आज फहराए .
........................
दुनिया सिर झुकाती है रसूख देख कर इसका ,
ख्वाहिश ''शालिनी''की ये फ़लक पर आज फहराए .
............................शालिनी कौशिक
[कौशल]