शुक्रवार, 28 फ़रवरी 2014

इम्तिहान-ए-तहम्मुल लिए जा रहे हैं ये ,


Bharatiya Janata PartyNarendra Modi
सरज़मीन नीलाम करा रहे हैं ये ,
सरफ़रोश बन दिखा रहे हैं ये ,
सरसब्ज़ मुल्क के बनने को सरबराह
सरगोशी खुलेआम किये जा रहे हैं ये .
..................................
मैकश हैं गफलती में जिए जा रहे हैं ये,
तसल्ली तमाशाइयों से पा रहे हैं ये ,
अवाम के जज़्बात की मजहब से नज़दीकी
जरिया सियासी राह का बना रहे हैं ये .
......................................................
ईमान में लेकर फरेब आ रहे हैं ये ,
मजहब को सियासत में रँगे जा रहे हैं ये ,
वक़्त इंतखाब का अब आ रहा करीब
वोटें बनाने हमको चले आ रहे हैं ये .
.....................................................
बेइंतहां आज़ादी यहाँ पा रहे हैं ये ,
इज़हारे-ख्यालात किये जा रहे हैं ये ,
ज़मीन अपने पैरों के नीचे खिसक रही
फिकरे मुख़ालिफ़ों पे कसे जा रहे हैं ये .
............................................
फिरकापरस्त ताकतें उकसा रहे हैं ये ,
फिरंगी दुश्मनों से मिले जा रहे हैं ये ,
कुर्बानियां जो दे रहे हैं मुल्क की खातिर
उन्हीं को दाग-ए-मुल्क कहे जा रहे हैं ये .
.............................................
इम्तिहान-ए-तहम्मुल लिए जा रहे हैं ये ,
तहज़ीब तार-तार किये जा रहे हैं ये ,
खौफ का जरिया बनी हैं इनकी खिदमतें
मर्दानगी कत्लेआम से दिखा रहे हैं ये .
............................................
मज़रूह ज़म्हूरियत किये जा रहे हैं ये ,
मखौल मजहबों का किये जा रहे हैं ये ,
मज़म्मत करे ''शालिनी'' अब इनकी खुलेआम
बेख़ौफ़ सबका खून पिए जा रहे हैं ये .
.......
शब्दार्थ-सरबराह-प्रबंधक ,फिकरे-छलभरी बात ,तहम्मुल-सहनशीलता .

शालिनी कौशिक
[कौशल ]

गुरुवार, 27 फ़रवरी 2014

अभी राजनीति सीखनी होगी भाजपा को


भाजपा भी पलटवार में भूली तहजीब

'मोदी मूंछ के बाल हैं, राहुल पूंछ के बाल'

after impotent jibes, shivraj calls rahul gandhi tail
लोकसभा चुनाव का एक-एक दिन करीब आ रहा है और नेता एक-दूसरे पर हमला बोलते हुए मर्यादा या संयम का लिहाज भूलते जा रहे हैं। केंद्रीय विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने भाजपा के पीएम पद के दावेदार नरेंद्र मोदी को 'नपुंसक' करार दिया, तो बवाल हो गया।[अमर उजाला से साभार ]
आजकल के समाचार पत्र भरे पड़े हैं ऐसी शीर्षक युक्त चटपटी सुर्ख़ियों से यही कही जा सकती हैं ऐसी टिप्पणियाँ और ये ऐसे दलों द्वारा की जा रही हैं जो कि इस देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टियां हैं.देश की बागडोर सँभालने का जिम्मा मुख्यतया इन्हीं दोनों के कन्धों पर है .इन दोनों दलों में अनुभव ,सत्ता की दावेदारी ,लोकप्रियता ,सदस्य संख्या आदि मोर्चों पर कॉंग्रेस भाजपा से आगे है वहीँ महत्वाकांक्षा ,लोकतंत्र ,मुखालफत आदि मोर्चों पर भाजपा कॉंग्रेस से ,ऐसे में अभी अभी एक नया मोर्चा और उभरा है और वह है ''राजनीतिक शब्दावली का ज्ञान ''राजनीतिक शब्दावली अर्थात वह भाषा जिससे राजनेता अपने विपक्षियों को विभूषित करते हैं उनके परिवारों अर्थात सम्बंधित पार्टी पर कटाक्ष करते हैं और इस शब्दावली का सही ज्ञाता ,सही रचयिता भी कॉंग्रेस को ही कहा जा सकता है क्योंकि भाजपा आज तक राजनीति में अपने लिए एक मजबूत नींव वाले भवन का निर्माण तक नहीं कर सकी और कॉंग्रेस राजनीति की एक पूरी कॉलोनी ,एक सशक्त विश्विद्यालय की मालकिन है जबकि भाजपा कॉंग्रेस द्वारा स्थापित कॉलोनी में येन केन प्रकारेण किसी फ्लैट को दलाली में खरीदने की कोशिश में लगी है और सिफारिश के आधार पर कॉंग्रेस के राजनीतिक विश्विद्यालय में प्रवेश पाने में ,ताकि वहाँ जम सके और राजनीति में पारंगत हो सके जिससे उसकी भी वह क्षमता हो पाये जो ऊँगली पकड़ कर पहुंचा पकड़ने वालों की होती है .
कॉंग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने नरेंद्र मोदी को मौत का सौदागर कहा और कॉंग्रेस के विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने नपुंसक ,जानते हैं कोंग्रेसी कि एक राजनेता ही ऐसी उपाधि से विभूषित हो सकता है सामान्य नागरिक नहीं क्योंकि आम आदमी के वश में नहीं मौत का कारोबार करना ,ये कारोबार वही कर सकता है जिसके हाथों में जनसमूह की ज़िंदगी हो और जब जनसमूह की ज़िंदगी एक हाथ में हो और वह उसे मौत की आग में झोंक दे तो उसे मौत का सौदागर कहा जाता है और यह संज्ञा राजनीति के शीर्ष पर विराजमान सत्तासीन शख्सियत की ही हो सकती है ऐसे ही जब शक्ति हाथ में होते हुए वह राजनीतिक शख्सियत कुछ न कर सके तब उसे नपुंसक कहा जाता है किन्तु कॉंग्रेस बुढ़िया हो गयी ,राहुल शहजादे हैं ,पप्पू हैं ,मोदी शेर हैं राहुल चिड़िया ,मोदी मूंछ के बल राहुल पूँछ के बल आदि टिप्पणियाँ भाजपा के राजनीतिक ज्ञान की अपरिपक्वता ही ज़ाहिर करती हैं ,ये राजनीति को मंडी ,चौराहा ,नाई की दुकान ,चौराहा ,पशुशाला बनाने में लगे हैं जहाँ ऐसे शब्दों को बहुतायत में शोहदों ,चरवाहों ,नाईयों ,ठलुओं आदि की ज़बान उगलती रहती है .
इसलिए आवश्यक यह है कि भाजपा पहले कॉंग्रेस से राजनीति सीखे और तभी यहाँ अपना मुंह खोले क्योंकि राजनीति को जो सड़क छाप स्वरुप देने में भाजपा लगी है और अपने स्वरुप में मुख़ालिफ़ों को ढलने की जिस नापाक कोशिश वह अंजाम दे रही है भारतीय राजनीति और भारतीय जनता उसे कभी स्वीकार नहीं करेगी हाँ इतना ज़रूर है कि अपने फुर्सत के क्षणों में चुटकुलों के स्थान पर उन अभद्र टिप्पणियों को याद कर हंस ज़रूर लिया करेगी .
शालिनी कौशिक
[कौशल ]

बुधवार, 26 फ़रवरी 2014

माफ़ी मांगने की अक्ल भाजपाईयों में अभी क्यूँ ?


BJP ready to apologise for mistakes, says Rajnath Singh, reaching out to Muslims
लगता है कि चुनावों का समय बहुत करीब आ गया है और अब भाजपा जो मूलतः हिंदुओं को साथ लेकर चलने का दम भरती है और हिंदुओं के ही साथ से सत्ता में अपने लिए कुर्सी पक्की  करने की कोशिश करती है अब मुस्लिमों के वोट भी अपने लिए महत्वपूर्ण समझ रही है और उनसे अपनी किसी गलती के लिए सर झुकाकर माफ़ी मांगने को भी स्वयं को प्रस्तुत कर रही है .राजनाथ जी कहते हैं कि यदि हमसे कोई भी गलती [कोई भी गलती ]का यदि आकलन किया जाये तो जो भाजपा ने आज तक किया है वह मात्र गलती नहीं कही जा सकती वह गुनाह कहा जाता है .बाबरी मस्जिद का विध्वंस न केवल धर्म विशेष के इबादत स्थल का विनाश था बल्कि वह हमारे देश की सहिष्णु संस्कृति का भी विनाश था और ऐसा करना भाजपा ने केवल अपने सत्ता की राह को सुविधाजनक बनाने के लिए किया और ऐसा कर वह जिस समुदाय को अपने से जोड़ रही थी उसकी महत्वाकांक्षा राम मंदिर के रूप में भी वह पूर्ण नहीं कर पायी बल्कि उसके कितने ही नवयुवकों को इसी भाजपा ने धर्म की ऐसी आग में धकेला कि उन्हें पूरी तरह से तबाह कर दिया .गोधरा के दंगे इस बात का प्रमाण हैं कि मोदी कितने सहिष्णु हैं देश के इन धर्मावलम्बियों के प्रति .भाजपा की इन गतिविधियों के कारण देश का नाम आज तक विश्व में कलंकित है और कलंकित हैं स्वयं इनके प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार मोदी जी .माफ़ी तो भाजपा को मांगनी ही होगी न केवल अपने पूर्व के गुनाहों की बल्कि वर्त्तमान में मोदी को अपना उम्मीदवार बनाकर सारे देश में खुलेआम घूमकर इन धर्मावलम्बियों में भय की राजनीति करने की खुली छूट देने की भी.अब ये माफ़ी मांगने की अक्ल भाजपाईयों में कब आती है ये तो वक़्त ही बतायेगा .
  शालिनी कौशिक
   [कौशल ]

मंगलवार, 25 फ़रवरी 2014

चंहु ओर विराजमान !


 सुन्दर कर्म
पुण्य और दान
फल
भविष्य में
अगले जन्म में ,
दुःख ,पाप ,
संताप
कष्ट
वर्त्तमान में
इसी जन्म में
फिर मनुज
की प्रतीक्षा
वर्त्तमान
या
भविष्य
चयन मात्र
वर्त्तमान
तभी पाप
का साम्राज्य
कष्ट का
अस्तित्व
दुःख की
उपस्थिति
संताप की
प्रत्यक्षता
आज है
चंहु ओर
विराजमान
अपने सशक्त
स्वरुप में
चंहु ओर
विराजमान !

 शालिनी कौशिक
[कौशल ]

रविवार, 23 फ़रवरी 2014

मेरी चाय में कहे तू कैसे ,स्वाद नहीं है आता,



मोदी का हमला, 'भ्रष्टाचार की एबीसीडी है कांग्रेस'
चले पहनकर सिर पर टोपी .अचकन और पजामी ,
मियां शराफत ने हाथों में ले ली बेंत बदामी .
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इत्र लगाया बांह पर अपनी ,मूंछ को किया रंगीन ,
जूती पहनी पाकिस्तानी ,पैर न छुए ज़मीन .
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मिले अकड़कर गले दोस्त के ,बोले भाई सलाम ,
तुमसे मिलने हम हैं आये ,छोड़ के काम तमाम .
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अबकी बार खड़ा हूँ तेरे ,शहर विधायक पद पर ,
जिम्मेदारी मुझे जिताने की ,तेरे काँधे पर .
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हम दोनों की जात एक है ,काम भी एक है प्यारे ,
मेरा साथ अगर तू दे दे ,होंगे वारे न्यारे .
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मैं बेचूं हूँ रोज़ तरक्की ,तुझको ख्वाब दिखाकर ,
तू बेचे है आटा चावल ,कंकड़ धूल मिलाकर .
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मेरी चाय में कहे तू कैसे ,स्वाद नहीं है आता,
तेरे घर से दूध में पानी ,आता दूध से ज्यादा .
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मैंने भला कहा क्या सबको ,तू झूठा मक्कार ,
अब मेरे साथ में मेरे जैसा ,करना मेरे यार .
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जैसे तेरी चलवाई है ,मेरी तू चलवाना ,
अबकी बार मुझी को अपनी ,सारी वोट दिलाना .
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नेताओं के भेदभाव को ,दोस्त न तू अपनाना ,
तेरे आगे हाथ मैं जोडूं ,मुझे न भूल जाना .
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हाथ मिलकर गले लगाकर ,चले मियां जी आगे ,
पकड़के माथा दोस्त सोचता ,क्या देखा जब जागे .
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शालिनी कौशिक
[कौशल ]

शनिवार, 22 फ़रवरी 2014

हँसे जा रहा है हँसे जा रहा है .

मृत्यु
का आलिंगन
मनुष्य के लिए
स्वयं करना
है कायरता
जीवन
व्यतीत करना
भले बने मनुज के लिए
एक विवशता
फिर भी
कायर न कहलाये
खून के घूँट पीता
जीये जा रहा है
और ईश्वर
देख अपनी माया की
सफलता
मोह की ज़ंज़ीरों में
उसे बंधा समझ
पालन के कर्त्तव्य में
होकर विफल भी
हँसे जा रहा है
हँसे जा रहा है .

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शालिनी कौशिक
[कौशल ]

शुक्रवार, 21 फ़रवरी 2014

आभास और संकेत

कल्पना
ख्वाब
गफलत
आभास एक नारी मन का !
हकीकत
चेतन
यथार्थ
संकेत एक पुरुष सोच का !
कल्पना कर नारी सजाये सुन्दर घर
ख्वाब देख रखे खुशियों की तमन्ना
गफलत में माने सब अपना .
हकीकत दिखाए जीवन की पुरुष सबको
चेतन अवस्था में ले आये शिथिल मन को
यथार्थ ला उजाड़े ख्वाबों के उपवन को .

शालिनी कौशिक

[woman about man]

गुरुवार, 20 फ़रवरी 2014

कॉंग्रेस में ही है दम

आखिर कॉंग्रेस ने एक बार फिर दिखा दिया कि देश हित में वह किसी भी हद पर जाकर अपने दुश्मनों को भी साथ लेकर चल सकती है और उन्हें अपनी बात मानने को मजबूर कर सकती है .तेलंगाना पर अपनी धुर विरोधी भाजपा को कॉंग्रेस ने अपने साथ इस खूबी से जोड़ लिया कि वह कॉंग्रेस को कमजोर ,जनहित विरोधी सरकार कहते कहते न न करते हुए उससे अलग न हो सकी .यह खूबी कॉंग्रेस में ही है कि वह जो ठान ले उसे पूरा करके ही दम लेती है ऐसे में कॉंग्रेस से ही ये आशा की जा सकती है कि वह उत्तर प्रदेशके नागरिकों को भी इतने बड़े राज्य से उत्पन्न कठिनाइयों से छुटकारा दिलाएगी और मायावती जी द्वारा की गयी पहल के अनुसार उत्तर प्रदेश के चार टुकड़े कराकर यहाँ के नागरिकों को उनकी मेहनत के अनुसार सही फल दिलाएगी क्योंकि सभी दलों को सही राह दिखने की जो क्षमता कॉंग्रेस में है वह किसी में नहीं और ये कॉंग्रेस अध्यक्षा द्वारा देश हित के मुद्दों पर सभी दलों से और विपक्ष की नेता से बिना किसी अहम् के सहयोग की अपील किये जाने जैसे कृत्य स्वयंमेव ही साबित कर देते हैं .किसी शायर ने क्या खूब कहा है -
''कोई दुश्मन भी मिले तो करो बढ़कर सलाम,
पहले खुद झुकता है औरों को झुकाने वाला .''
और यही आज कॉंग्रेस की सफलता का एक महत्वपूर्ण रहस्य है और सच्चाई भी .कॉंग्रेस को अपनी एक और सफलता की और समस्त आंध्र प्रदेश वासियों को तेलंगाना के रूप में एक नया राज्य मिलने की बहुत बहुत शुभकामनायें 
शालिनी कौशिक 
[कौशल ]

मंगलवार, 18 फ़रवरी 2014

भाजपा सर्वाधिक लोकतान्त्रिक-कॉंग्रेस की तारीफ क्यूँ ?


नरेंद्र मोदी ने कहा, "उनके लिए लोकतंत्र का सीमित अर्थ है और वो है चुनाव के जरिया सत्ता तक पहुंचना। बाकी किसी प्रकार से कांग्रेस के जीवन में लोकतंत्र नहीं है। लोकतंत्र के चार दुश्मन - वंशवाद-परिवारवाद, जातिवाद, सम्प्रदायवाद, अवसरवाद। कांग्रेस में ये चारों चीजें हैं।"
नरेंद्र मोदी जी का उक्त विश्लेषण ये तो स्पष्ट करता ही है कि उन्हें बहुत शीघ्र राजनीति में डॉक्ट्रेट की उपाधि मिलने वाली है किन्तु ये उपाधि उन्हें उनकी पार्टी से धक्के मारकर निकालने के बाद ही दी जायेगी क्योंकि उनका सारा ध्यान एकमात्र कॉंग्रेस पर ही लगा है और इस सारी लीपापोती में वे ये नहीं देख पा रहे हैं कि जो गुण वे कॉंग्रेस में बता रहे हैं वे आज लगभग सभी पार्टियों में रच बस गए हैं .
वे कहते हैं कि लोकतंत्र के चार दुश्मन -जिसमे सबसे पहले वंशवाद -परिवारवाद-क्या केवल कॉंग्रेस में जबकि सपा के नेताजी के चश्मो चिराग अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं ,भाजपा में विजयराजे सिंधिया की सुपुत्री वसुंधरा राजे सिंधिया राजस्थान की मुख्यमंत्री हैं ,राजनाथ सिंह जो इस वक्त भाजपा के अध्यक्ष हैं उनके सुपुत्र पंकज सिंह राजनीति में क्या ढोल बजाने के लिए आये हैं क्या ये वंशवाद नहीं ?इससे अगर बची है तो केवल बसपा और वह भी इसलिए क्योंकि उसकी प्रमुख मायावती जी का कोई वंश ही नहीं .
जातिवाद आज हर दल की सत्ता में पहुँचने की सीढ़ी है और सपा यादव को लेकर ,बसपा दलितों को लेकर व् भाजपा बनियों -ब्राह्मणों को लेकर जब तब अपना वोट बैंक सुदृढ़ करने में व्यस्त हैं फिर अकेली कॉंग्रेस की तारीफ क्यों ?
सम्प्रदायवाद -ये तमगा मोदी किसी और के गले में कैसे डाल सकते हैं जबकि जिस पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बनकर अपने बैंड मोदी बजवा रहे हैं वह पार्टी इस परंपरा की शुरुआत करने वाली है .भाजपा ही वह दल है जिसने रामजन्मभूमि बाबरी मस्जिद का मुद्दा सत्ता में आने के लिए हथियार के रूप में इस्तेमाल किया और फिर सपा को भी एक हथियार अपनी तरफ से तोहफे के रूप में दे दिया मुसलमानों को एक रहनुमा के रूप में .ये भाजपा की ही करनी है जो आज मुसलमानों में डर कायम कर रही है और उन्हें सुरक्षा की दीवार सपा के रूप में दिखायी दे रही है फिर क्यों वे अपनी मेहनत का श्रेय दूसरों को दे रहे हैं ?
और रही अवसरवाद की बात तो बेकार की बात है इसका मुकुट मात्र कॉंग्रेस के सर सजाना क्योंकि अवसर मिला तो मोदी ने अडवाणी जी से वेटिंग का पद भी झटक लिया ,अवसर मिला तो अखिलेश ने नेताजी को राज्य से बाहर पटक दिया अवसर मिला तो मायावती ने कभी सपा तो कभी भाजपा को सत्ता से बाहर लटका दिया तो फिर कॉंग्रेस ही क्यों सभी दल इस सम्मान के लायक हैं किन्तु बस एक वाद है जो सबसे ज्यादा भाजपा में है और जिसके कारण यहाँ लोकतंत्र सर्वाधिक प्रभाव में है और वह है'' विवाद ''और इसी कारण सर्वाधिक प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार यहीं हैं और यही कारण है कि यह पार्टी सर्वाधिक लोकतान्त्रिक पार्टी कही जा सकती है क्योंकि हमारे लोकतंत्र में यही तो एक महान गुण है जिसके कारण हम सही गलत का भेद नहीं कर पाते और जैसे भी हो अपने वर्चस्व के कायम करने में ही लगे रहते हैं भले ही इसके लिए हमारा घर बिक जाये देश टूट जाये .इसलिए भाजपा के ये महानुभाव निश्चित रूप में अपनी पार्टी की सही पहचान न करने के कारण निंदा के अधिकारी हैं क्योंकि बाहर दूसरों पर पत्थर फैंकने से पहले उन्हें अपने शीशे के घर को तो देखना ही होगा .
शालिनी कौशिक
[कौशल ]

गुरुवार, 13 फ़रवरी 2014

''प्यार कर्म प्यार धर्म प्यार प्रभु नाम है."


 प्यार है पवित्र पुंज ,प्यार पुण्य धाम है.
पुण्य धाम जिसमे कि राधिका है श्याम  है .
श्याम की मुरलिया की हर गूँज प्यार है.
प्यार कर्म प्यार धर्म प्यार प्रभु नाम है."
एक तरफ प्यार को "देवल आशीष"की उपरोक्त पंक्तियों से विभूषित किया जाता है तो एक तरफ प्यार को "बेकार बेदाम की चीज़ है"जैसे शब्दों से बदनाम किया जाता है.कोई कहता है जिसने जीवन में प्यार नहीं किया उसने क्या किया?प्यार के कई आयाम हैं जिसकी परतों में कई अंतर कथाएं    छिपी हैं .प्रेम विषयक दो विरोधी मान्यताएं हैं-एक मान्यता के अनुसार यह व्यर्थ चीज़ है तो एक के अनुसार यह  जीवन में सब कुछ है .पहली मान्यता को यदि देखा जाये तो वह भौतिकवाद  से जुडी है .जमाना कहता है कि लोग प्यार की अपेक्षा दौलत को अधिक महत्व देते हैं लेकिन यदि कुछ नए शोधों पर ध्यान दें तो प्यार का जीवन में स्थान केवल आकर्षण तक ही सीमित  नहीं है वरन प्यार का जीवन में कई द्रष्टिकोण  से महत्व है .न्यू   हेम्पशायर विश्व विध्यालय के प्रोफ़ेसर एडवर्ड लीमे और उनके येल विश्व विध्यालय के साथियों ने शोध में पाया कि जिन लोगों को दुनिया में बहुत प्यार और स्वीकृति मिलती है वे भौतिक वस्तओं को कम तरजीह देते हैं.वे लोग जिन्हें ऐसा लगता है कि उन्हें लोग ज्यादा प्यार नहीं करते और अपना नहीं मानते ,वे भौतिक चीजों से ज्यादा जुड़े होते हैं .शोध कर्ताओं ने १८५ लोगों पर शोध किया और पाया कि दूसरी तरह के लोग ,पहली तरह के लोगों के मुकाबले वस्तओं को पांच गुना महत्व दे रहे थे .इसका सीधा साधा अर्थ यह है कि जिन्हें जीवन में प्रेम और जुडाव की कमी ज्यादा महसूस होती है वे चीज़ों के प्रति ज्यादा लगाव महसूस करते हैं या उनमे असुरक्षा की भावना होती है जिसे वे भौतिक उपलब्धियों के जरिये पूरा करने की कोशिश करते हैं .जाहिर है कि जिसको यह लगता है कि आसपास के लोग उसे प्यार नहीं करते या उसे अपना नहीं मानते वह असुरक्षित महसूस करने लगता है और तब उसे लगेगा कि दुनियावी चीज़ें ही उसे सहारा और सुरक्षा दे सकेंगी.
अमेरिका के स्टेनफोर्ड विश्वविद्यालय के एक हालिया शोध में पता चला है कि प्रेम के कारण उपजे दर्दे दिल का इलाज भी प्रेम की अनुभूति से ही होता है .शोधकर्ताओं ने कुछ छात्रों को हल्का शारीरिक दर्द पहुंचाते हुए उनकी प्रतिक्रियाएं रिकॉर्ड  की .गौरतलब है कि अधिकांश छात्र प्रेम की शुरूआती अवस्था में थे ,और पाया कि छात्रों के सामने उनके प्रेमी या प्रेमिका की तस्वीर रखने पर उनका ध्यान मामूली सा बँटा .शोध में सभी छात्रों के मस्तिष्क का स्कैन  किया गया  था .शोध में शामिल डॉ.जेरेड यंगर का कहना है "कि प्रेम एक दर्द निवारक का भी काम करता है."
असलम कोल असली ने कहा है-
"कभी इश्क करो और फिर देखो,
इस आग में जलते रहने से
कभी दिल पर आंच नहीं आती
कभी रंग ख़राब नहीं होता."
प्रेम के बारे में कवि, दार्शनिक,प्रेमीजन आदि ऐसे विचार व्यक्त करते ही रहे हैं किन्तु प्रेम न  सिर्फ कलाकारों,लेखकों और दार्शनिकों को प्रेरित करता है अपितु आम इंसानों की रोजमर्रा की जिन्दगी में आने वाली परेशानियों से और तनावों से उबरने में भी मदद करता है .वाशिंगटन पोस्ट ने एक शोध के बारे में बताते हुए कहा कि यदि हमारा करीबी भावनात्मक संबल या सलाह दे तो नकारात्मक विचारों या तनाव  से आसानी से  उबरा जा सकता है .शोध के दौरान उन्होंने पाया कि एक खुशहाल दंपत्ति का ब्लड  प्रेशर अविवाहित लोगों के मुकाबले कम था .हालाँकि बुरे वैवाहिक संबंधों से गुजर रही जोड़ी का ब्लड प्रेशर सबसे ज्यादा पाया गया.प्रेम सम्बन्ध जिन्दगी को मायने और अर्थ देते हैं .एरोन ने पाया कि "प्यार का एहसास मस्तिष्क के डोपेमायीं रिवार्ड सिस्टम को सक्रिय कर देता है  .ख़ुशी और प्रेरणा जैसी भावनाओं के लिए दिमाग का यही हिस्सा जिम्मेदार है.
प्रेम के क्षेत्र में बाधा बनकर आज "एड्स "भी उपस्थित हुआ है  किन्तु इस बीमारी के लिए भी कहा जाता है  कि "एड्स के रोगी को नफरत नहीं प्यार दीजिये,इससे उसकी उम्र बढ़ेगी रोग घटेगा."इस बात की पुष्टि की है  स्विट्ज़रलैंड स्थित वेसल इंस्टीट्यूट फार क्लिनिकल अपिदेमोलोग्य ने.रिपोर्ट के अनुसार अगर एड्स प्रभावित रोगी प्यार पाए ,रोमांस करे तो उसकी जीवन अवधि बढ़ जाती है  .शोधकर्ता डॉ.हेनर सी.बचर ने अपने प्रयोग को एक बड़े समूह पर किया .हैरान करते परिणाम यह थे कि जो रोगी घबराये हुए थे और जीने की आस छोड़ चुके थे उनमे न केवल जीने की लालसा बढ़ी बल्कि वे नई स्फूर्ति से भर गए.शोधकर्ता का मानना  है  कि उनके परीक्षण इस बात की पुष्टि करते हैं कि "प्यार और स्वास्थ्य साथसाथ चलता है ."
इस प्रकार देखा जाये तो प्रेम ही जीवन  ऊर्जा का शिखर है  जिसने प्रेम को जान लिया उसने सब जान लिया,जो प्रेम से वंचित रहा वह सबसे वंचित रह गया .प्रेम का अर्थ है  समर्पण की दशा जहाँ दो मिटते है  और एक बचता है  .जिसे अपने लक्ष्य से,सहस से ,उद्देश्य से जरा भी प्रेम है  वह स्वयं को मिटा देता है  .यही सच्चा प्रेम है  रही और मंजिल एक हो जाते हैं .जीवन आनंद की सच्ची रह वहीँ से निकलती है  .कबीर ने भी कहा है -
"प्रेम न हाट बिकाय"
अर्थात प्रेम किसी बाज़ार में नहीं बिकता.प्यार के मायने बदल सकते हैं किन्तु सच्चे प्रेम का स्वरुप कभी नहीं बदल सकता.सच्चा प्रेम वह महक है  जो हर दिशा को महकाती है  .सच्चे प्रेम को तलवार की धार कहा जाता है  और हर किसी के बस का इस पर चलना नहीं होता.इसलिए सच्चा प्रेम कम ही दिखाई देता है .वर्तमान युवा पीढ़ी प्रेम की और अग्रसर  है  किन्तु उसके लिए सच्चे  प्रेम का स्वरुप कुछ अलग है  .होटल मैनजमेंट   कर रही पारुल के अनुसार-"प्रेम को मैं तलवार की धार नहीं मानती हूँ  पर हंसी  खेल  भी नहीं मानती हूँ .मेरा  मानना है  कि ये  एक दैवीय  एहसास  है  जिसे सिर्फ  महसूस  किया जा  सकता है  ,व्यक्त  नहीं किया जा  सकता है ."
पल्लवी  कहती   हैं-"प्रेम करना  आसान  लग  सकता है  पर यह निभाना  उतना  ही मुश्किल  है .ये  एक ऐसा  करार  है   जो कभी ख़त्म  नहीं होता है  ."
ये  तो प्रेम का एक रूप  है  .प्रेम तो कई    स्वरूपों  में ढला  है .देश  प्रेम,प्रभु  प्रेम.मानव  प्रेम,मात्र -प्रेम पितृ  प्रेम,पुत्र  प्रेम आदि  इसके  अनेको  स्वरुप हैं.प्रभु  ईसा  मसीह  ने सभी  प्राणियों , अपने पड़ोसियों  आदि  से प्रेम का सन्देश  दिया .गुरु  नानक  ने प्रेम करने  वालो  को सारी  दुनिया  में बिखर  जाने   का आशीर्वाद  दिया  ताकि  वे प्यार को सारेजहाँ  में फैला  सकें .सभी  धर्मो  के गुरु  जन प्राणी  मात्र   को प्रेम का सन्देश  देते  हैं और आपस  में मिलजुल  कर रहने  की शिक्षा  देते  हैं.उनका  भी मानना है  कि प्रेम वह है  जो अपने प्रिय  के हित  में सर्वस्व  त्याग  करने  को तैयार  रहता  है  .प्यार त्याग  करता  है  बलिदान  नहीं मांगता .प्रेम की ही महिमा  को हमारे  कविजनो  ने  अलग अलग तरह  से वर्णित  किया है    -
देश -प्रेम
"जो भरा  नहीं  भावों  से बहती  जिसमे  रसधार  नहीं ,
वह ह्रदय  नहीं है  पत्थर  है  जिसमे  स्वदेश  का प्यार  नहीं ."
मानव  प्रेम-
"यही  प्रवृति  है  जो आप  आप  ही चरे ,
मनुष्य  है  वही  जो मनुष्य  के लिए मरे."
प्रेमी जनों  का प्यार यहाँ देखिये-
"जब जब कृष्ण की बंसी बाजी  निकली राधा सज के
जान अजान का ध्यान भुला के लोक लाज को तज के ,
वन वन डोली जनक दुलारी पहन के प्रेम की माला,
दर्शन जल की प्यासी मीरा पी गयी विष का प्याला."
मात्र पितृ भक्ति कहे या मात्र पितृ प्रेम -इसके वशीभूत हो श्रवण कुमार माता पिता को कंधे पर बिठाकर तीर्थ यात्रा करते हैं,पितृ भक्ति में परशुराम माता का गला काट देते हैं,मात्र भक्ति में श्री गणेश भगवान भोलेनाथ से अपना मस्तक कटवा देते हैं और पुत्र प्रेम में माँ पार्वती भयंकर रूप धारण करती हैं और गणेश को भोलेनाथ से पुनर-जीवन दिलवाकर उन्हें देवताओं में प्रथम पूज्य के स्थान पर विराजमान कराती हैं.
सच पूछा जाये तो दुनिया की समस्त समस्याओं का हल प्रेम में है.अनादर,उपेक्षा,द्वेष,ईर्षा और अंधी स्पर्धा की मारी हुई इस दुनिया में हर व्यक्ति हर प्रसंग एक बिदके हुए घोड़े की तरह हमारा वजूद कुचलने को उद्धत घूम  रहा हो तब आहत अहम् पर यह    कितना बड़ा मरहम है की कोई तो है जो मेरी कद्र करता है,कोई तो है जिसकी आँखों में मुझे देख चमक पैदा होती है .मुझे देखकर जो मेरी भलमन साहत पर प्रश्नचिन्ह नहीं लगाता.
इस तरह यदि हम विचार करें तो प्रेम का जीवन में वास्तविक महत्व जीवन अस्तित्व से है और अस्तित्व ऐसा की -
"हज़ार बर्फ गिरें लाख आंधियां चलें
वो फूल खिलकर रहेंगे जो खिलने  वाले हैं,"
प्यार से बढ़कर कुछ नहीं और सच्चा  प्रेम वही  है जो रोते को हंसी दे ,गिरते को उठने की ताक़त दे
मरणासन्न व्यक्ति में   जान फूँक दे.सच्चे प्रेम की महक  संसार महसूस करता है और सच्चे  प्रेम के आगे ये दुनिया झुकती है.सच्चा प्रेम  समस्याएँ मिटाता है चाहे दिलों की हों या देशों की.बलिउद्दी देवबंदी ने कह है-
"फैसले सब के होते   नहीं तलवार से ,
प्यार से भी मसलों का हल   निकलता है."
शालिनी कौशिक
http://shalinikaushik2.blogspot.com/

मंगलवार, 11 फ़रवरी 2014

हसीबा को फिर से सामने लाओ -हर हाथ हसीबा के साथ

 आजकल लोकसभा चुनाव २०१४ की तैयारियां ज़ोरों पर हैं .सभी दल अपनी अपनी तरह से चुनावों का प्रचार कर रहे हैं और सभी दलों को ऐसा अधिकार भी है किन्तु एक दल को यह अधिकार न तो हमारा मीडिया देना चाहता है और न ही विपक्षी दल .इसीलिए जैसे ही कॉंग्रेस ने अपना चुनाव प्रचार आरम्भ किया तो विपक्षी दलों व् मीडिया दोनों को ही आग सी लग गयी और दोनों ही जुट गए कॉंग्रेस के प्रचार में लगी प्रचारक पर प्रहार करने .
दूरदर्शन पर जिस दिन से हसीबा अमीन ने कॉंग्रेस से २०१४ के लोकसभा चुनावों में प्रधानमंत्री पद के सम्भावित उम्मीदवार राहुल गांधी जी के पक्ष में प्रचार आरम्भ किया तभी विभिन्न वेबसाइट हसीबा अमीन को राहुल गांधी से ठीक वैसे ही जोड़ने लगी जैसे आम भारतीय समाज में यदि कोई कामकाजी महिला किसी पुरुष सहकर्मी से बात कर लेती है तो फ़ौरन उसके साथ उसकी प्रेम कहानियां बतायी जाने लगती हैं यही नहीं कॉंग्रेस में इस नए चेहरे को इन वेबसाइट ने इतना महत्व दिया कि उसे ३०० करोड़ के घोटाले जैसे झूठ में भी फंसाने की साजिशें आरम्भ हो गयी जबकि हसीबा एकमात्र वह शख्सियत हैं जो इस स्वतंत्र भारत में अपने पसंद के दल से जुड़ते हैं और उसके लिए अपनी सेवाएं देते हैं .
देखा जाये तो हसीबा अमीन कॉंग्रेस के वोट बैंक में विपक्षियों की नज़र में इज़ाफ़ा कर रही थी और इसी का खामियाज़ा उन्हें भुगतना पड़ गया .जिस कॉंग्रेस से अलका लाम्बा जैसी कार्यकर्ता मात्र इसलिए अलग हो जाती हैं कि वे तीन साल से राहुल गांधी से मिलने की कोशिश कर रही थी और उन्हें मिलने का समय नहीं दिया गया जबकि वे कॉंग्रेस के मुख्य कार्यक्षेत्र दिल्ली में ही थी उसी कॉंग्रेस में हसीबा जैसी छोटी कार्यकर्ता को न केवल राहुल गांधी से व्यक्तिगत रूप से जोड़कर बदनाम करने की साजिश की गयी बल्कि ३०० करोड़ के घोटाले जैसी अफवाहें भी फैलायी गयी मतलब तो ये हुआ कि कॉंग्रेस को इस कदर बदनाम करने की साजिश कि इसका छोटे से छोटा कार्यकर्ता भी भ्रष्टाचारी है ,यही बात सारे में प्रचारित करने की साजिश की गयी और कॉंग्रेस ने इसका विरोध करने की बजाय हसीबा का प्रचार ही वापस ले लिया ,ये गलत है .
हसीबा का प्रचार विज्ञापन हटाकर कॉंग्रेस कि अगर यह सोच है कि वह इस तरह अपने विरोधियों की गलत बातों पर अंकुश लगा देगी ,मात्र वहम है क्योंकि इस कार्यवाही का मात्र यही प्रचार किया जा रहा है कि हसीबा गलत है इसलिए उसका प्रचार हटा लिया गया .अपने प्रचारकों के नाम और सम्मान का ध्यान रखना भी एक दल का ही कर्त्तव्य है और यदि उसे अपने साथ इस तरह से कार्यकर्ताओं का जोश चाहिए तो उसे उनके साथ खड़ा होना होगा .आज मुनीश यादव ,शब्बीर अहमद , श्रवण गिरी उसे अन्य प्रचारक मिल गए हैं किन्तु इस अभियान की शुरुआत करने वाली हसीबा के बिना यह अभियान अधूरा है और विपक्षी खेमे के इरादों को मिटटी में मिलाने के लिए और अपने युवा जोश को कायम रखने के लिए हसीबा की ज़रुरत है इसलिए हसीबा को सामने लाओ -हर हाथ हसीबा के साथ है .

शालिनी कौशिक
[ कौशल ]

सोमवार, 10 फ़रवरी 2014

खिले कमल है कीचड में ही -हाथ से नाल जुडी है .


आधी बांह का कुरता पहने ,उलटे हाथ घडी है ,
सिर पर पगड़ी पहन सुनहरी ,त्यौरी चढ़ी पड़ी है .
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अपने घर को छोड़ के भागे ,बाप का माल हड़पने ,
काम पड़े पर कहे तुनककर ,मेरी नहीं अड़ी है .
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खुद के काम के ढोल बजाये ,और में कमी निकाले ,
अपनी बात की तारीफों की आदत इसे बड़ी है .
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शीशे के घर में रहकर ये ,मारे कंकड़ पत्थर ,
भूल गया खुद उसकी मूरत ,लाठी लिए खड़ी है .
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अपने दम आगे बढ़ने की ,हिम्मत नहीं है जिसमे ,
हाथ बांधकर वह हस्ती ही ,करने नक़ल बढ़ी है .
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जिस ताकत ने किया मुल्क का ,नाम जहाँ में ऊँचा ,
उसे मिटाने की सौगंध ले ,थामी हाथ छड़ी है .
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ख़तम अगर करने की कुव्वत ,ख़तम करो मक्कारी ,
जो सत्ता की दहलीजों में,दीमक लगी कड़ी है .
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खिले कमल है कीचड में ही ,सबने यहाँ है देखा ,
प्रभ चरण छूने को ''शालिनी'' हाथ से नाल जुडी है .
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शालिनी कौशिक
[कौशल ]