सोमवार, 31 मार्च 2014

संघी मानसिकता


इसलिए राहुल सोनिया पर ये प्रहार किये जाते हैं .

जगमगाते अपने तारे गगन पर गैर मुल्कों के ,
तब घमंड से भारतीय सीने फुलाते हैं .
टिमटिमायें दीप यहाँ आकर विदेशों से ,
धिक्कार जैसे शब्द मुहं से निकल आते हैं .
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नौकरी करें हैं जाकर हिन्दुस्तानी और कहीं ,
तब उसे भारतीयों की काबिलियत बताते हैं .
करे सेवा बाहर से आकर गर कोई यहाँ ,
हमारी संस्कृति की विशेषता बताते हैं .
Sonia Gandhi, Rahul Gandhi and Prime Minister Manmohan Singh look at newly elected party state presidents of the Indian Youth Congress seek blessings at a convention in New Delhi. Sonia in action
राजनीति में विराजें ऊँचे पदों पे अगर ,
हिन्दवासियों के यशोगान गाये जाते हैं .
लोकप्रिय विदेशी को आगे बढ़ देख यहाँ ,
खून-खराबे और बबाल किये जाते हैं.
Demonstrators from the Samajwadi Party, a regional political party, shout slogans after they stopped a passenger train during a protest against price hikes in fuel and foreign direct investment (FDI) in retail, near Allahabad railway station September 20, 2012 (Reuters / Jitendra Prakash)
क़त्ल होता अपनों का गैर मुल्कों में अगर ,
आन्दोलन करके विरोध किये जाते हैं .
अतिथि देवो भवः गाने वाले भारतीय ,
इनके प्रति अशोभनीय आचरण दिखाते हैं .
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विश्व व्यापी रूप अपनी संस्था को देने वाले ,
संघी मानसिकता से उबर नहीं पाते हैं .
भारतीय कहकर गर्दन उठाने वाले ,
वसुधैव कुटुंबकम कहाँ अपनाते हैं 

भारत का छोरा जब गाड़े झंडे इटली में ,
भारतीयों की तब बांछें खिल जाती हैं .
इटली की बेटी अगर भारत में बहु बने ,
जिंदादिल हिंद की जान निकल जाती है .

अलग-अलग मानक अपनाने वाले ये देखो ,
एक जगह एक जैसे मानक अपनाते हैं ,
देशी हो विदेशी हो भारत की या इटली की ,
बहुओं को सारे ये पराया कह जाते हैं .


मदर टेरेसा आकर घाव पर लगायें मरहम ,
सेवा करवाने को ये आगे बढ़ आते हैं .
सोनिया गाँधी जो आकर राज करे भारत पर ,
ऐसी बुरी हार को सहन न कर पाते हैं.
The dead Indira Gandhi with her son, Prime Minister Ranjiv Ghandi.
सारा परिवार देश हित कुर्बान किया ,
ऐसी क़ुरबानी में ये ढूंढ स्वार्थ लाते हैं .
नेहरु गाँधी परिवार की देख प्रसिद्धि यहाँ ,
विरोधी गुट सारे जल-भुन जाते हैं .
सोनिया की सादगी लुभाए नारियों को यहाँ ,
इसीलिए उलटी सीधी बाते कहे जाते हैं .
पद चाह छोड़कर सीखते जो ककहरा ,
राहुल के सामने खड़े न हो पाते हैं .
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राजनीति में विराजें कितने ही अंगूठा टेक ,
पीछे चल जनता उन्हें सर पर बैठाती है .
राहुल गाँधी कर्मठता से छा न जाये यहाँ कहीं ,
उनकी शिक्षा को लेकर हंसी करी जाती है .
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भेदभाव भारत में कानूनन निषिद्ध हुआ ,
लोग पर इसे ही वरीयता दिए जाते हैं 
योग्यता और मेहनत को मिलता तिरस्कार यहाँ ,
इसलिए राहुल सोनिया पर ये प्रहार किये जाते हैं .
                      शालिनी कौशिक 
                                   [कौशल ]







रविवार, 30 मार्च 2014

हाथ करें मजबूत

BJP recalls Rajiv Gandhi's speech as inspiring, dismisses Rahul'sकेजरीवाल पर साधा निशाना

सरकार चलाना कोई बच्‍चों का खेल नहीं है: सोनिया गांधी



भावनाएं वे क्या समझेंगे जिनकी आत्मा कलुषित हो ,
अटकल-पच्चू  अनुमानों से मन जिनका प्रदूषित हो .
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सौंपा था ये देश स्वयं ही हमने हाथ फिरंगी के ,
दिल पर रखकर हाथ कहो कुछ जब ये बात अनुचित हो .
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डाल गले में स्वयं गुलामी आज़ादी खुद हासिल की ,
तोल रहे एक तुला में सबको क्यूं तुम इतने कुंठित हो .
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देश चला  है प्रगति पथ पर इसमें मेहनत है किसकी ,
दे सकता रफ़्तार वही है जिसमे ये काबिलियत हो .
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अपने दल भी नहीं संभलते  कहते देश संभालेंगें ,
क्यूं हो ऐसी बात में फंसते जो मिथ्या प्रचारित हो .
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आँखों से आंसू बहने की हंसी उड़ाई जाती है ,
जज्बातों को आग लगाने को ही क्या एकत्रित हो .
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गलती भूलों  से जब होती माफ़ी भी मिल जाती है ,
भावुकतावश हुई त्रुटि पर क्यूं इनपर आवेशित हो .
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पद लोलुपता नहीं है जिसमे त्याग की पावन मूरत हो ,
क्यूं न सब उसको अपनालो जो अपने आप समर्पित हो .
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बढें कदम जो देश में अपने करने को कल्याण सभी का ,
करें अभिनन्दन आगे बढ़कर जब वह समक्ष उपस्थित हो .
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हाथ करें मजबूत उन्ही के जिनके हाथ हमारे साथ ,
करे ''शालिनी ''प्रेरित सबको आओ हम संयोजित हों .
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शालिनी कौशिक
[कौशल ]

शनिवार, 29 मार्च 2014

महज़ इज़ज़त है मर्दों की ,महज़ मर्दों में खुद्दारी ,

 
बहाने खुद बनाते हैं,हमें खामोश रखते हैं ,
बहाना बन नहीं पाये ,अकड़कर बात करते हैं .
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हुकुम देना है हक़ इनका ,हुकुम सुनना हमारा फ़र्ज़ ,
हुकुम मनवाने की ताकत ,पैर में साथ रखते हैं .
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मेहरबानी होती इनकी .मिले दो रोटी खाने को ,
मगर बदले में औरत के ,लहू से पेट भरते हैं .
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महज़ इज़ज़त है मर्दों की ,महज़ मर्दों में खुद्दारी ,
साँस तक औरत की अपने ,हाथ में बंद रखते हैं .
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पूछकर पढ़ती-लिखती हैं ,पूछकर आती-जाती हैं ,
इधर ये मर्द बिन पूछे ,इन्हीं पर शासन करते हैं .
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इशारा भी अगर कर दें ,कदम पीछे हटें उसके ,
खिलाफत खुलकर होने पर ,भी अपनी चाल चलते हैं .
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नहीं हम कर सकते हैं कुछ भी ,टूटकर कहती ''शालिनी ''
बनाकर  जज़बाती हमको ,ये हम पर राज़ करते हैं .

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शालिनी कौशिक 


   [WOMAN ABOUT MAN

गुरुवार, 27 मार्च 2014

महबूबा यहाँ सबकी बस कुर्सी सियासत की ,


फुरसत में तुम्हारा ही दीदार करते हैं ,
खुद से भी ज्यादा तुमको हम प्यार करते हैं। 

 अपनों से ज़ुदा होने की फ़िक्र है नहीं ,
तुम पर ही जान अपनी निसार करते हैं। 

झुकती हमारी गर्दन तेरे ही दर पे आकर ,
हम तेरे आगे सिज़दा बार -बार करते हैं। 

ये ज़िंदगी है कितनी हमको खबर नहीं है ,
पलकें बिछाके फिर भी इंतज़ार करते हैं। 

बालों में है सफेदी ,न मुंह में दाँत कोई ,
खुद को तेरी कशिश में तैयार करते हैं। 

महबूबा यहाँ सबकी बस कुर्सी सियासत की ,
पाने को धक्का -मुक्की और वार करते हैं। 

''शालिनी ''देखती है देखे अवाम सारी ,
बहरूपिये बन -ठन कर इज़हार करते हैं। 

शालिनी कौशिक 
    [कौशल ]

बुधवार, 26 मार्च 2014

रविशंकर प्रसाद मात्र बोलने के लिए क्यूँ बोलें

Congress releases manifesto for election 2014
''कभी चिराग़ तय थे हरेक घर के लिए ,
कभी चरागाँ मयस्सर नहीं शहर के लिए.''
कहकर भाजपा के रविशंकर प्रसाद ने कॉंग्रेस के चुनावी घोषणा पत्र को धोखा करार दिया ,कोई विशेष बात नहीं की  हरेक पार्टी अपनी विरोधी पार्टी के वादों को धोखा ही कहती है किन्तु जो कहकर वे कॉंग्रेस के घोषणा पत्र की बुराई कर रहे हैं , आलोचना का विषय वह है कॉंग्रेस वह पार्टी है जिसने स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से लेकर अब तक देश पर सर्वाधिक शासन किया है इसका कारण महज शासन करने की काबिलियत का होना व् जनता में कॉंग्रेस के लिए विश्वास और उसके प्रति प्रेम ही नहीं है अपितु कॉंग्रेस के द्वारा देश हित व् जन हित में किये गए कार्य भी हैं .
कॉंग्रेस ने अपने चुनावी घोषणा पत्र को इस बार युवाओं ,महिलाओं व् समाज के विभिन्न तबकों से बातचीत के आधार पर तैयार किया है .उसने इसमें आने वाले समय के लिए वादे भी किये हैं और अपने दस वर्षीय शासन काल की उपलब्धियां  .भी गिनवाई हैं और ये स्वाभाविक भी है क्योंकि इसमें न केवल कॉंग्रेस की मेहनत है बल्कि कॉंग्रेस के द्वारा देशहित में देखे गए वे सपने भी हैं जो वह अपने देश की जनता के लिए पूरे करना चाहती है और ये उपलब्धियां ही विपक्षी दल भाजपा की राह का कांटा हैं जिनके कारण रविशंकर प्रसाद इस घोषणा पत्र को धोखा कह रहे हैं जबकि वे स्वयं जानते हैं कि जनता का वह वर्ग जो इन उपलब्धियों के फायदे उठा रहा है उसका कॉंग्रेस में इससे विश्वास और मजबूत हो जायेगा और जो वर्ग इन उपलब्धियों से अनजान है वह भी अब इनसे परिचित हो जायेगा और धोखे में उसके जो कदम भाजपा की ओर बढे जा रहे थे अब वापस कॉंग्रेस की ओर मुड़ जायेंगें और रही बात रविशंकर प्रसाद के चिराग़ की तो उसका जवाब कॉंग्रेस के बड़े नेता अपने बलिदानों से पहले ही दे चुके हैं जिसे अगर वे गम्भीरता से विचारें ,प्रमाणित मानें या न मानें  और कान खोलकर सुनें या बंदकर न सुन पाने का स्वयं को धोखा दें  तब भी कभी अपना मुंह नहीं खोल पाएंगे जो मात्र इतना सा है -
''रौशनी देश के हर घर में हो सके ,
मैंने अपने ही घर को बनाया दिया .
देश के बच्चे-बच्चे को सांसे मिलें
खून अपने बदन का बहा यूँ दिया .''

शालिनी कौशिक
[कौशल ]

मंगलवार, 25 मार्च 2014

आधार अनिवार्य करे सुप्रीम कोर्ट


''आधार से सम्बंधित किसी भी प्रकार के आंकड़े बिना सम्बंधित व्यक्ति की सहमति के किसी अन्य प्राधिकरण से साझा नहीं किये जाने चाहियें '' ये कहकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर सरकार से आधार कार्ड की अनिवार्यता ख़त्म करने को कहा है जबकि अभी कल ही की बात है शरद पंवार जी द्वारा ''स्याही मिटाओ और दोबारा वोट डालो ''
का आह्वान चुनाव आयोग द्वारा आचार संहिता के उल्लंघन हेतु संज्ञान में लिया जा रहा था और यह मात्र शरद पंवार जी के आह्वान पर होने वाला कार्य नहीं है अपितु यह हमारे देश के नागरिकों द्वारा अभ्यास से किया जा रहा है और उनके लिए वोट डालने के बाद स्याही को ऊँगली से छिड़ककर साफ कर देना एक शौक बन चुका है .
लोकतंत्र जनता की सरकार कही जाती है और जनता का एक वोट देश की तकदीर बदल सकता है किन्तु जनता यहाँ जितनी ईमानदारी से अपना कर्त्तव्य निभाती है सब जानते हैं .पहले जब वोटर आई.डी. कार्ड नहीं होता था तब एक ही घर से राजनीति में भागीदारी के इच्छुक लोग ऐसे ऐसे लोगों के वोट बनवा लेते थे जिनका दुनिया में ही कोई अस्तित्व नहीं होता था फिर धीरे धीरे फोटो पहचान पत्र आये और इनके कारण बहुत सी वोट ख़त्म हो गयी किन्तु वोट के नाम पर की जाने वाली धांधली ख़त्म नहीं हुई .बहुत से ऐसे वोटर हैं जिनके पास एक ही शहर में अलग अलग पतों के वोटर कार्ड हैं और यही नहीं ऐसी बेटियों की वोट अभी भी वर्त्तमान में है जिनकी शादी हो गयी और वे अपने घर से विदा हो गयी और ऐसे में उनकी वोट मायके वाले भी रखते हैं और ससुराल वाले भी और वे दोनों जगह ही अपने फोटो पहचान पत्र के साथ अपना सिर गर्व से उठाकर वोट करती हैं किन्तु ये हमारे लोकतंत्र के साथ कितना बड़ा धोखा है जहाँ चालबाजियां चलकर उम्मीदवार व् उनके समर्थक अपनी वोट बढ़ा लेते हैं ऐसे में आधार कार्ड ही वह सफल योजना है जिसके दम पर इस तरह की धांधलियों को रोका जा सकता है क्योंकि ये सारे देश में एक ही होता है .आदमी चाहे यू.पी. का हो या पंजाब का और फिर ये केवल एक वोट की बात नहीं और भी बहुत सी सरकारी योजनाओं की बात है .सरकार की बहुत सी योजनाएं ऐसी हैं जिनका लाभ सभी लोगों तक नहीं पहुँच पाता  उसका कारण भी यही है कि कुछ चालबाज लोग इस तरह की धांधलियों से उन योजनाओं का लाभ हड़प जाते हैं .वे एक ही व्यक्ति को कई व्यक्ति साबित कर देते हैं और उसे बार बार वह लाभ दिलाकर अपने लिए सरकारी पैसा जमा कर लेते हैं .
ऐसे में सुप्रीम कोर्ट को आधार कार्ड की अनिवार्यता को ख़त्म करने का नहीं अपितु सरकार को उसे जल्दी पूरा करने का निर्देश देना चाहिए तभी सरकार जनता की सही हितैषी हो सकती है और सुप्रीम कोर्ट सही रूप में न्याय की संरक्षक क्योंकि न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए बल्कि वह दिखना भी चाहिए और वह तभी सम्भव है जब कि व्यक्ति का एक ही अस्तित्व हो न कि स्याही मिटाकर दूसरा .
शालिनी कौशिक
[कौशल ]


सोमवार, 24 मार्च 2014

..कहीं नारे की तरह सत्ता भी ......

''यहाँ दरख्तों के साये में धूप लगती है ,
चलो यहाँ से कहीं दूर ..........''
पंक्तियाँ दूरदर्शन के एंकर अश्विनी मिश्रा अपने एक कार्यक्रम के सम्बन्ध में रहे थे किन्तु आज सियासी परिस्थितियों ने इन पंक्तियों से ध्यान एकाएक भाजपा की वर्त्तमान कार्यप्रणाली की ओर मोड़ दिया जिसमे दरख्त समान हमारे बुज़ुर्ग नेताओं के साथ यही व्यवहार अपनाया जा रहा है.पहले जोशी ,टंडन से उनकी सीट छीन ली गयी ,फिर आडवाणी को भोपाल /गांधी नगर में उलझाया गया और अब जसवंत सिंह का तो टिकट ही काट दिया गया और अभिनेता परेश रावल के लिए आडवाणी के करीबी हरेन पाठक का टिकट कट दिया गया ,पार्टी के प्रति समर्पित ये व्यक्तित्व आज अपमान के दौर से गुज़र रहे हैं और वह भी मात्र उन नेताओं के कारण जिनका पार्टी के राष्ट्रीय स्वरुप में कोई योगदान नहीं .
नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री हैं और गुजरात को विकास की राह का घोड़ा बताते हैं ये अच्छी बात है कि देश का एक राज्य प्रगति की राह पर सरपट दौड़ रहा है किन्तु अभी तक २८ राज्य वाले इस देश में एक पार्टी का राष्ट्रीय व्यक्तित्व तब बनता है जब कम से कम ४ राज्यों में पार्टी अपना अस्तित्व बनाये हो और इसीलिए ऐसे में गुजरात का महत्व मात्र एक राज्य का है और इस तरह नरेंद्र मोदी का महत्व भी मात्र एक राज्य के मुख्य़मंत्री का ही है और यह भाजपा में महत्वाकांक्षाओं के पर्वतों की अधिकता ही कही जायेगी कि राष्ट्रीय राजनीति में लगे कर्मठ ,समर्पित नेता एक और धरे रह गए और एक राज्य की राजनीति करने वाला अपनी पहुँच बनाकर और मीडिया से अपनी हवा बनवाकर ,सोशल मीडिया में अपने फेक अकॉउंट बनाकर अपनी लहर दिखाता है और इस प्रभाव में सत्ता पाने की ललक में फंसे भाजपाइयों को फंसकर अपने को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करा लेता है और धीरे धीरे पार्टी की बागडोर ही अपने हाथ में ले लेता है और परिणाम सबके सामने है पार्टी के बड़े से बड़े नेता की गर्दन अब मोदी के हाथ में है और भाजपाइयों के होशोहवास भी .इस सबका ही परिणाम है कि जसवंत सिंह जी जैसे पूर्ण रूप से समर्पित नेता निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में परचा भर रहे हैं -

Jaswant singh slams bjp

भाजपा को तगड़ा झटका, जसवंत स‌िंह ने भरा न‌िर्दलीय पर्चा


और जेटली जैसे ए सी कमरे के नेता उन्हें ना स्वीकारने की नसीहत दे रहे हैं
यही नहीं आज भाजपा में मोदी लहर को लेकर अफरातफरी का माहौल है .स्वयं पार्टी के लिए पिता सदृश आर.एस.एस.संचालक मोहन भगवत नमो नमो के उच्चारण को बंद करने का आदेश दे चुके हैं .पार्टी की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज पार्टी की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जाता चुकी हैं और अब द्वारकापीठ के जगद गुरु शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने''हर हर मोदी ''नारे पर आपति जताते हुए इसे भगवान शिव का अपमान बताया है और ये सब ना केवल हमारे संतों की विचारधारा है अपितु हमारी स्वयं की भी यही सोच है कि मोदी को एक भगवान की तरह दिखाने की कोशिश की जा रही है जबकि मोदी एक सामान्य राजनेता की तरह राजनीति ही तो खेल रहे हैं और अभी क्योंकि उनकी पहुँच मात्र अपनी पार्टी तक है इसलिए अभी वे केवल उसी के साथ अपनी कूटनीतिक चालें चल रहे हैं पहले तो उन्होंने अपनी पार्टी के समर्पित नेताओं का मखोल उड़ा कर उनसे सीट छीनी और अब उनके निर्देश पर पार्टी के लिए निरंतर लगे नेताओं को तो टिकट से वंचित किया जा रहा है और सत्ता की ओर तेज़ी से बढ़ती प्रतीत होने वाली भाजपा की गाड़ी में सवार होने के लिए अपने दलों को छोड़कर भागे आ रहे दलबदलुओं का तहेदिल से स्वागत किया जा रहा है और टिकट का तोहफा देकर नवाज़ा जा रहा है जिससे पार्टी में निरंतर असंतोष बढ़ता जा रहा है .
भाजपा की ऐसी परिस्थितियां उसकी राजनीतिक अपरिपक्वता को ही ज़ाहिर करती हैं .इंडिया शाइनिंग की तरह मोदी लहर भी आज पार्टी को भले ही ऊंचाई की ओर बढाती दिख रही हो किन्तु ये सी-सा झूले की तरह है और इसमें पलड़ा पलटते देर नहीं लगती .ये सब सोचकर भाजपा को आज ध्यान देना ही होगा .दलबदलुओं के कारण अपनों की उपेक्षा और स्वयं जसवंत सिंह का ये बयान कि पार्टी में अहंकार का अहसास हो रहा है और अहंकार पतन का कारण होता है ध्यान में रखते हुए बड़ों को ना स्वीकारने की नसीहत देने से बेहतर है कि बाहर से आये हुए दलबदलुओं को पहले कम से कम पञ्च साल पार्टी के सेवा करने की नसीहत दी जाये क्योंकि इन खोखले बादलों से बेहतर पार्टी के लिए इन्हीं दरख्तों के साये हैं जिनमे रहकर भले ही धुप लगे पर वह पार्टी की सेहत को दुरुस्त करने वाली ही होगी .पार्टी को ये समझना ही होगा कि ये बुजुर्ग और समर्पित नेता ही पार्टी के रथ के वे पहिये हैं जो इसके रथ को सत्ता की सवारी करा सकते हैं .आज पार्टी जिन चंद उल्लू की सवारी करने वाले नेताओं पर आश्रित है उनकी चलते रहने पर तो यही सम्भव है कि अभी पार्टी का नारा ''अबकी बार मोदी सरकार ''बदलकर ''अबकी बार भाजपा सरकार ''करना पड़ा आगे कहीं सत्ता को एक दुःस्वप्न ही सोचकर छोड़ना न पड़ जाये .
शालिनी कौशिक
[कौशल ]

रविवार, 23 मार्च 2014

.............सियासत के काफिले .

हमको बुला रहे हैं सियासत के काफिले ,
सबको लुभा रहे हैं सियासत के काफिले .
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तशरीफ़ आवरी है घडी इंतखाब की,
दिल को भुना रहे हैं सियासत के काफिले .
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तसलीम कर रहे हैं हमें आज संभलकर ,
दुम को दबा रहे हैं सियासत के काफिले .
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न देते हैं मदद जो हमें फ़ाकाकशी में ,
घर को लुटा रहे हैं सियासत के काफिले .
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मख़मूर हुए फिरते हैं सत्ता में बैठकर ,
मुंह को धुला रहे हैं सियासत के काफिले .
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करते रहे फरेब हैं जो हमसे शबो-रोज़ ,
उनको छुपा रहे हैं सियासत के काफिले .
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फ़ह्माइश देती ''शालिनी'' अवाम समझ ले ,
तुमको घुमा रहे हैं सियासत के काफिले .
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शालिनी कौशिक
[कौशल ]
शब्दार्थ-तशरीफ़ आवरी-पधारना ,इंतखाब-चुनाव ,फाकाकशी-भूखो मरना ,मखमूर-नशे में चूर