शुक्रवार, 31 अक्तूबर 2014

''तेरहवीं''


''तेरहवीं''

''पापा''अब क्या करोगे ,दीदी की शादी को महीना भर ही रह गया है और ऐसे में दादाजी की मृत्यु, ये तो बहुत बड़ा खर्चा पड़ गया ,विजय ने परेशान होते हुए अपने पापा मनोज से कहा .मनोज बोला -''बेटा;क्यों परेशान होता है ,ये तो हमारे लिए बहुत आराम का समय है .वो कैसे पापा?
 वो ऐसे बेटा कीमैं तो तेरे चाचाओं  से  पहले ही कह दूंगा की मुझे तो अपनी बेटी की शादी की तैयारी करनी है इसलिए न तो मैं अंतिम संस्कार ही कर पाऊँगा और न ही इससे सम्बंधित कोई खर्चा ,वैसे भी हम वैश्य जातिऔर सभी जानते हैं की वैश्य जाति में शादी में कितना खर्चा होता है .पापा की बात सुन विजय के चेहरे पर भी चमक आ गयी ,तभी जैसे उसे कुछ याद आया और वह बोला ,''पर पापा चाचा तो बाबाजी के पैसे मांगेगे और कहेंगे कीहमें वे ही दे दो हम उनसे ही उनके अंतिम संस्कार  का खर्चा निकाल लेंगे ,अरे बेटा तू तो बहुत आगे की सोच रहा है ,पिताजी के पास अब कोई पैसा था ही कहाँ ,वो तो सारा ही बाँट चुके थे और रहा जो उनके बक्से में कुछ पैसा रखा है उसे उठा और अपने कमरे में ले चल ,वो कह देंगे की उनके खाने और इलाज में खर्च हो गया .''
इस तरह जब मनोज का बेटा विजय संतुष्ट हो गया और वह वो बक्सा अपने कमरे में ले गया तब मनोज ने भाइयों को फोन पर पिताजी के मरने की सूचना दी और भाइयों के आने पर उन्हें अपना फैसला सुना दिया .आपस की बातों से ये निश्चय हुआ की पिता का अंतिम संस्कार दूसरे नंबर का बेटा करेगा और मनोज की बेटी की शादी की बात कहकर कम से कम 

पैसे में तेरहवीं आदि कर दी जाएगी .
जैसे जैसे जो सोचा गया था सभी भाइयों ने मिलकर वह कर दिया और तेरहवीं के बाद जब मेहमान जाने लगे तो सभी के हाथ जोड़कर अपने बनाये हुए पिता के वाक्य सभी के सामने दोहरा दिए .मनोज ने कहा-''पिताजी ने ही कहा था की मेरे कारण पोती की शादी में कोई कमी न करना वर्ना मेरी आत्मा नरक में भटकती रहेगी .''मनोज के ये शब्द सभी मेहमानों के दिल में घर कर गए और सभी उसे सांत्वना दे अपने अपने घर चले गए .

शालिनी कौशिक
http://shalinikaushik2.blogspot.com

शनिवार, 25 अक्तूबर 2014

जन सहयोग जरूरी पर स्वच्छ मन से

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   2 अक्टूबर का दिन और इंडिया गेट हमेशा से महत्वपूर्ण रहे हैं किन्तु अचानक अति महत्वपूर्ण श्रेणी में आ गए तब जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने इस दिन इस स्थान पर अपनी महत्वाकांक्षी योजना ''स्वच्छ भारत अभियान ''की शुरुआत की और देशवासियों को माँ भारती को स्वच्छ रखने के लिए काम से काम १०० घंटे का श्रमदान करने की शपथ दिलाई .दिल्ली के ऐतिहासिक राजपथ पर उन्होंने शपथ दिलवाई ''न गंदगी करूँगा न करने दूंगा।''
   गंदगी जो आज भारत में विस्तृत अर्थों में व् विस्तृत क्षेत्रों में फैली हुई है .७९ लाख टन कचरा भारत में प्रतिवर्ष निकलता है और ८०%गंदगी शहरों से प्रतिवर्ष पवित्र गंगा में आती है .
     पी आई वी के स्रोत से प्राप्त जानकारी के अनुसार हमारे देश के ग्रामीण इलाकों में स्वच्छता की भारी कमी है ,अगर ग्रामीण इलाकों में स्वच्छ भारत अभियान को ठीक से चलाया जायेगा तो निश्चित रूप से लोगों के जीवन स्तर में तो सुधार होगा ही ,स्वास्थ्य पर होने वाला खर्च भी घटेगा .
      २०११ की जनगणना की शौचालय सुविधा पर आधारित आंकड़े बताते हैं कि सबसे कम ग्रामीण स्वच्छता वाले राज्य हैं -
      राज्य                             स्वच्छता प्रतिशत
     झारखण्ड                             ०८.३३%
    मध्य प्रदेश                            १३.५८%
   छत्तीसगढ़                            १४.८५%
    ओडिशा                                १५.३२%
   बिहार                                    १८.६१%
       ३ अक्टूबर २०१४ को अमर उजाला अपने सम्पादकीय में लिखता है -
   ''महात्मा गांधी ने १९२५ में जब यह कहा था कि देश की स्वतंत्रता से कहीं अधिक ज़रूरी स्वच्छता है तो उस समय की परिस्थितियां आज से एकदम भिन्न थी .उस वक्त देश में आयु प्रत्याशा ३५ वर्ष से भी कम थी और हैजा ,अतिसार ,मलेरिया और टाइफाइड जैसी बीमारियां बच्चों की मौत का बड़ा कारण थी .गांधी ने ९० वर्ष पूर्व जिस मुद्दे की ओर ध्यान खींचा था ,उसकी ओर दुनिया का ध्यान ९० के दशक में तब गया जब संयुक्त राष्ट्र ने इसे अभियान की तरह लिया .वास्तव में इन बीमारियों का सम्बन्ध प्रदूषित पानी व् गंदगी से है .हालाँकि भारत के सम्बन्ध में स्वच्छता का मुद्दा छुआछूत और जाति तथा वर्ग व्यवस्था से भी जुड़ा हुआ है जिसके बारे में गांधी का मानना था कि सफाई का काम करने वाले और मैला ढोने वाले वर्ग के उत्थान के बिना असमता को दूर नहीं किया जा सकता ...........''
        प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने गांधी जी की इसी विचारधारा को मद्देनज़र रखते हुए उनकी १४५ वीं जयंती पर स्वच्छ भारत के इस अभियान की शुरुआत की और अपनी इसी मंशा को सफल बनाने हेतु उन्होंने सोशल मीडिया को स्वच्छता का हथियार बनाया है .mygov.in में स्वच्छता अभियान को शामिल करने के साथ प्रधानमंत्री ने कहा कि क्लीन इंडिया के लिए एक अलग वेबसाइट बनायीं है . 
    ''आप कहीं कूड़ा कचरा है तो उसकी फोटो आप अपलोड कीजिये फिर उसकी सफाई आप कीजिये ,उसका वीडियो अपलोड कीजिये और फिर स्वच्छ हुए स्थान का फोटो अपलोड कीजिये .''
   
  और प्रधानमंत्री की इस पहल का असर सारे देश में देखने में आया .लखनऊ में गृहमंत्री राजनाथ सिंह पत्नी सावित्री सिंह के साथ सफाई करते देखे गए ,देवरिया रेलवे स्टेशन पर केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्रा ने सफाई की ,बंगलुरु में दीवारों और फुटपाथों को साफ़ करते सॉफ्टवेयर इंजीनियर दिखे .मुंबई में बृहस्पतिवार को दादर बीच पर साफ सफाई करते कॉलेज के छात्र-छात्राएं दिखे ,स्वयं प्रधानमंत्री ने नई दिल्ली स्थित वाल्मीकि बस्ती में सफाई की .
   किन्तु सवाल ये उठता है कि हमारा देश बहुत विशाल है और उतना ही विशाल है यहाँ गंदगी का साम्राज्य और पहल अच्छी है किन्तु निरंतरता इसमें कायम रहेगी इसमें संदेह है क्योंकि ऐसे कार्यक्रम एक दिन में सफलता प्राप्त नहीं कर सकते इसके लिए निरंतरता ज़रूरी है .अमर उजाला समाचार में एक पाठक मोहित शर्मा खतौली से लिखते हैं -''सफाई सिर्फ दिखावा -प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो अक्टूबर से देश में सफाई अभियान चलाया है लेकिन क्षेत्रीय नेता कैमरे के सामने झाड़ू उठाकर सफाई करने का सिर्फ दिखावा कर रहे हैं फोटो खिंचते ही ये नेता झाड़ू रखकर चले जाते हैं .''
   वाकई यह शर्मनाक है कि देश के ग्रामीण क्षेत्रों में करीब ६० फीसदी घरों में आज भी शौचालय नहीं हैं .संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट बताती है कि खुएल में शौच करने वालों की संख्या भारत में सर्वाधिक है .अब यह बात सामने आ चुकी है कि भारत में कुपोषण और अनेक बीमारियों की जड़ गंदगी और खुले में शौच करने की मजबूरी में छिपी है .जाहिर है मात्र झाड़ू लगाना इस चुनौती से निपटने में नाकाफी प्रयास है .
      और इस प्रयास को सक्षम बनाने हेतु उस तबके के सहयोग की परम आवश्यकता है जिसके जिम्मे साफ़ सफाई की वर्तमान में जिम्मेदारी है और जो आज भी तिरस्कार व् उपेक्षा के सर्वाधिक भोगी हैं .आम आदमी पार्टी के मुख्य प्रवक्ता योगेन्द्र यादव कहते हैं -''सफाई कर्मचारियों के कामकाज की स्थितियों पर ध्यान देना राष्ट्र की प्राथमिकता में शामिल किया जाना चाहिए ......सीवरों की सफाई करने वाले लोगों की दयनीय स्थिति राष्ट्रीय शर्म की बात है .....काम के लिए जिस किस्म के सुरक्षा उपकरण अग्निशामक दस्ते में शामिल लोगों को दिए जाते हैं वैसे ही उपकरण सीवरों की सफाई करने वाले लोगों को दिए जाने चाहियें .''
          योगेन्द्र यादव ,अमर उजाला का सम्पादकीय और स्वयं मैं भी यही मानती हूँ कि इस अभियान की सार्थकता तभी है जब हम अपने मन की सफाई कर सकें .छुआछूत को अपने दिमाग से परे हटाकर हमें महात्मा गांधी की भांति अपने को स्वच्छता की कसौटी पर कसना होगा .यह अभियान तो मात्र एक पहल है इसे आंदोलन हमें बनाना होगा और सफाई कर्मचारी समुदाय के साथ जुड़कर अपना निष्पक्ष योगदान देना होगा .स्वयं वीरभूम जिले में मिशन की शुरुआत करते हुए राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने भी यही सन्देश दिया है -
    ''कि सरकार अकेले अशिक्षा ,अस्वच्छता ,पर्यावरण जैसी समस्याओं को नहीं सुलझा सकती इसके लिए आम लोगों को साथ जुड़ना ही होगा .''
  क्योंकि इस सच से इंकार नहीं किया जा सकता कि -
    ''पूरी धरा भी साथ दे तो और बात है ,
    पर तू ज़रा भी साथ दे तो और बात है ,
    चलने को तो एक पाँव से भी चल रहे हैं लोग 
     ये दूसरा भी साथ दे तो और बात है .''

शालिनी कौशिक 
   [कौशल ]

शुक्रवार, 24 अक्तूबर 2014

अब पछताए क्या होत-[कहानी]









विनय के घर आज हाहाकार मचा था .विनय के पिता का कल रात ही लम्बी बीमारी के बाद निधन हो गया .विनय के पिता चलने फिरने में कठिनाई अनुभव करते थे .सब जानते थे कि वे बेचारे किसी तरह जिंदगी के दिन काट रहे थे और सभी अन्दर ही अन्दर मौत की असली वजह भी जानते थे किन्तु अपने मन को समझाने के लिए सभी बीमारी को ही मौत का कारण मानकर खुद को भुलावा देने की कोशिश में थे .विनय की माँ के आंसू रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे .बच्चे और पत्नी इधर उधर के कामों में व्यस्त थे ....नहीं थी तो बस अवंतिका......विनय की बेटी....कहाँ है अवंतिका ...छोटी सी सबकीआँखों का तारा आज कहाँ है ,दादा जी के आगे पीछे डोल डोल कर कभी टॉफी ,कभी आइसक्रीम के लिए उन्हें मनाने वाली अवंतिका .....सोचते सोचते विनय अतीत में पहुँच गया.
मम्मी पापा का इकलौता बेटा होने का खूब सुख उठाया विनय ने ,जो भी इच्छा होती तत्काल पूरी की जाती ,अब कॉलिज जाने लगा था .मित्र मण्डली में लड़कियों की संख्या लडकों से ज्यादा थी .दिलफेंक ,आशिक ,आवारा ,दीवाना न जाने ऐसी कितनी ही उपाधियाँ विनय को मिलती रहती पर मम्मी ,वो तो शायद बेटे के प्यार में अंधी थी ,कहती -''यही तो उम्र है  अब नहीं करेगा तो क्या बुढ़ापे में करेगा .''और पापा शायद पैसा कमाने में ही इतने व्यस्त थे कि बेटे की कारगुज़ारी पता ही नहीं चलती और यदि चल भी जाती तो जैसे सावन के अंधे को हरा ही हरा दिखता है ऐसे ही पैसे के आगे उन्हें कुछ नहीं दिखता .
ऐसे ही गुज़रती जा रही थी विनय की जिंदगी .एक दिन वह  माँ के साथ बाज़ार गया .....मम्मी..मम्मी ....मम्मी विनय फुसफुसाया ...हाँ ... मम्मी बोली तब विनय ने माँ का हाथ पकड़कर कहा -''माँ !मेरी उस लड़की से दोस्ती करा दो ,देखो कितनी सुन्दर ,स्मार्ट है .हाँ ...सो तो है ..मम्मी ने कहा ...पर .बेटा ...मैं नहीं जानती उसे ...मम्मी प्लीज़ ...अच्छा ठीक है .....कोशिश करती हूँ ,तुम यहीं रुको मैं आती हूँ .मम्मी उस लड़की के पास पहुंची ,''बेटी !हाँ हाँ ....मैं तुम्ही से कह रही हूँ .जी -वह युवती बोली ...क्या अपनी गाड़ी में तुम मुझे मेरे घर तक छोड़ दोगी...,पर ...आंटी मैं आपको नहीं जानती हूँ न आपके घर को फिर भला मैं आपको आपके घर कैसे छोड़ सकती हूँ  .... युवती ने हिचकिचाते हुए कहा ..बेटी मेरी तबीयत ख़राब हो रही है ,मेरा बेटा साथ है पर वह बाईक पर है और मुझे कुछ चक्कर आ रहे हैं .....यह कहते हुए मम्मी ने थोड़े से चक्कर आने का नाटक किया ....लड़की कुछ घबरा गयी और उन्हें गाड़ी में बिठा लिया ....अच्छा आंटी अब अपना पता बताओ ,मैं घर पहुंचा दूँगी ....मम्मी ने धीरे धीरे घर का पता बताया और आराम से गाड़ी में बैठ गयी .
''लो आंटी ''ये ही है आपका घर ,युवती बोली ..हाँ बेटी ...यही  है ...''आओ आओ अन्दर तो आओ ''गाड़ी से उतारते हुए मम्मी ने कहा ,नहीं आंटी जल्दी है .... ....फिर कभी ...ये कह युवती ने जाना चाहा  तो मम्मी बोली....नहीं बेटा ऐसा नहीं हो सकता ..... तुम मेरे घर तक आओ और बिना चाय पिए चली जाओ ...मम्मी की जबरदस्ती के आगे युवती की एक नहीं चली और उसे घर में आना ही पड़ा .थोड़ी ही देर में विनय भी आ गया .विनय बेटा....तुम इनके साथ यहाँ बैठो ,मैं चाय लेके आती हूँ ...बीमार मम्मी एकदम ठीक होती हुई रसोईघर में चली गयी और थोड़ी ही देर में ड्राइंगरूम से हंसने खिलखिलाने की आवाज़ आने लगी .
फिर तो ये रोज़ का सिलसिला शुरू हो गया .एक दिन विनय एक लड़की के साथ ड्राइंगरूम में उसकी गोद में सिर रखकर लेटा हुआ था कि पापा आ गए .पापा !आप ....कहकर हडबड़ाता  हुआ विनय उठा ....हाँ मैं ये कहकर गुस्सा दबाये पापा बाहर चले गए ....पर विनय घबरा गया और लड़की को फिर मिलने की बात कह टाल दिया .घबराया विनय मम्मी के पास पहुंचा ,''मम्मी मम्मी !....क्या है इतना क्यूं घबरा रहा है ?मम्मी पापा आये थे ....पापा आये थे ....कहाँ हैं पापा ..इधर उधर देख मम्मी ने विनय से पूछा और साथ ही कहा तू कहीं पागल तो नहीं हो गया ....नहीं मम्मी ...पापा आये थे और हॉल में मुझे सिमरन की गोद में सिर रखे देखा तो गुस्से में वापस लौट गए .तो तू क्यूं घबरा रहा है ..तेरे पापा को तो मैं देख लूंगी ...तू डर मत ....और हुआ भी यही... रात को पापा के आने पर मम्मी ने उन्हें ऐसी बातें सुने कि पापा की बोलती बंद कर दी ..''वो बड़े घर का लड़का है ,जवान है ,फिर दोस्ती क्या बुरी चीज़ है ...अब आप तो बुड्ढे हो गए हो क्या समझोगे उसकी भावनाओं को और ज्यादा ही है तो उसकी शादी कर दो सब ठीक हो जायेगा ,विनय के पापा को यह बात जँच गयी .
आज विनय की शादी है .मम्मी पापा की ख़ुशी का ठिकाना नहीं और विनय उसे तो फोन सुनने से ही फुर्सत नहीं ,''अरे यार !कल को मिल रहा हूँ न ,तुम गुस्सा क्यूं हो रही हो ,अच्छा यार कल को मिलते हैं कहकर फोन को काट दिया ...विनय ..हाँ मम्मी ...बेटा ये फोन अभी बंद कर दे कल से जो चाहे करना ....जी मम्मी ...आई लव यू  ..आई लव यू बेटा ...और इस तरह के स्नेहपूर्ण संबोधन के संचार होते ही फोन बंद कर दिया गया .शादी हो गयी .
धीरे धीरे विनय की बाहर की जिंदगी के साथ घर की जिंदगी चलती रही .कहीं कोई बदलाव नहीं था बदलाव था तो बस इतना ही कि विनय के एक बेटा और एक बेटी हो गयी थी .कारोबार पापा ही सँभालते रहे ..विनय तो बस एक दो घंटे को जाता और उसके बाद रातो रातो अपनी मित्र मण्डली में घूमता फिरता .
''विनय'' पापा ने गुस्से में विनय को पुकारा तो विनय अन्दर तक कांप उठा  ''जी पापा!''थाने से फोन आया है ...''क्यूं ''विनय असमंजस भरे स्वर में बोला ..अभय ....तेरा बेटा ...मेरा पोता ..चांदनी जैसे बदनाम होटल में एक कॉल गर्ल के साथ पकड़ा गया है ...''क्याआआआआआअ ''विनय का मुंह खुला का खुला रह गया ...उसकी इतनी हिम्मत ...मैं उसे जिंदा नहीं छोडूंगा ''विनय का मुहं गुस्से से लाल हुआ जा रहा था ...क्यूं मैंने कौन तुम्हे मार डाला ...पापा ने विनय से प्रश्न किया तो विनय सकते  में आ गयाअब पहले अभय की जमानत करनी है फिर देखते हैं क्या करना है चलो मेरे साथ ...पापा के साथ जाकर विनय अभय को घर तो ले आया लेकिन अभय को माफ़ नहीं कर पाया .
एक दिन सुबह जब विनय ने देखा कि घर के सभी लोग सो रहे हैं तो वो अभय के कमरे में पहुँच गया ..पर ये क्या ...अभय वहां नहीं था ..विनय थोड़ी देर अभय का वहां इंतजार कर बाहर निकलने ही वाला था कि पीछे से पापा आ गए ...अभय अब तुम्हे नहीं मिलेगा ...क्यूं पापा? मैंने उसे उसके मामा के घर भेज दिया है ...अच्छे काबिल लोग हैं कम से कम वहां रहकर अभय काबिल तो बनेगा तुम्हारे जैसा आवारा निठल्ला नहीं ...तभी विनय की मम्मी वहां आ गयी और तेज़ आवाज़ में बोली ,''किसने कहा आपसे कि मेरा विनय आवारा निठल्ला है और किसने हक़ दिया आपको अभय को उसके मामा के घर भेजने का ,मैं कहती हूँ आप होते कौन हैं परिवार की बातों में बोलने वाले ,किया क्या है आपने हम सबके लिए ,पैसा वो तो ज़मीन जायदाद से हमें मिलता ही रहता ,आपने कौन कारोबार में अपना समय देकर हमारी जिंदगी बनायीं है ,विनय मेरा बेटा है और मुझे पता है कि वह कितना काबिल है और जिस मामले का आपसे मतलब नहीं है उसमे आप नहीं बोलें तो अच्छा !कभी मेरे लिए या अपने बेटे के लिए दो मिनट भी मिले हैं आपको ..'' विनय की मम्मी बोले चली जा रही थी और विनय के पापा का दिल बैठता जा रहा था ..कितनी मेहनत और संघर्षों से उन्होंने ज़मीन जायदाद को दुश्मनों से बचाया था ...कैसे दिन रात एक कर कारोबार को ऊँचाइयों पर पहुँचाया था ..विनय की मम्मी को इससे कोई मतलब नहीं था ...पापा बीमार रहने लगे और विनय और उसकी मम्मी की बन आई अब उन्हें दिन या रात की कोई परवाह नहीं थी और उधर विनय की पत्नी दिन रात बढती विनय की आवारागर्दी से तंग हर वक़्त रोती रहती थी .घर में नौकरानी से ज्यादा हैसियत नहीं थी उसकी ,उसकी अपनी इच्छा का तो किसी के लिए कोई मूल्य नहीं था .
उधर अवंतिका ,अपने पापा के नक़्शे कदम पर आगे बढती जा रही थी ,दिनभर लडको के साथ घूमना ,फिरना और रात में मोबाइल पर बाते करना यही दिनचर्या थी उसकी .''दादीईईईईईईईईईईईइ ,मैं कॉलिज जा रही हूँ शाम को थोड़ी देर से आऊंगी....क्यूं ...वो मेरी बर्थडे पार्टी दी है नील व् निकी ने होटल में ...ठीक है कोई बात नहीं ....आराम से मजे करना बर्थडे कोई रोज़ रोज़ थोड़े  ही आती है ...थैंक यू दादी ,''सो नाईस ऑफ़ यू ''कह अवंतिका ने दादी के गालों को चूम लिया और उधर अवंतिका की मम्मी उसे रोकना चाहकर भी रोक नहीं पाई क्योंकि अवंतिका माँ के आगे से ऐसे निकल गयी जैसे वो उसकी माँ न होकर कोई नौकरानी खड़ी हो .
रात गयी सुबह हो गयी अब शाम के चार बजने वाले थे अवंतिका घर नहीं आई ...दादी ने अवंतिका को ..उसके दोस्तों को फोन मिलाया पर किसी ने भी फोन नहीं उठाया ..परेशां होकर दादी ने विनय से कहा ,''विनय ..अवंतिका कल सुबह घर से गयी थी अब तक भी नहीं आई ''और आप मुझे अब बता रही हो -विनय गुस्से से बोला .कल उसका बर्थडे था और वह बता कर गयी थी कि दोस्तों ने होटल में पार्टी दी है ..रात को देर से आऊंगी ....घबराते हुए मम्मी ने कहा ..और आपने उसे जाने दिया ..आपको उसे रोकना चाहिए था ...मैंने तुझे कब रोका जो उसे रोकती ...मम्मी मुझमे और उसमे अंतर............कहते हुए खुद को रोक लिया विनय ने ..आखिर वह भी तो लड़कियों के साथ ही मौज मस्ती करता था और आज जब अपनी बेटी वही करने चली तो अंतर दिख रहा था उसे ....विनय सोचता हुआ घर से निकल गया .
विनय देर रात थका मांदा टूटे क़दमों से घर में घुसा तो मम्मी एकदम से पास में आकर बोली ...कहाँ है अवंतिका ...विनय कहाँ है वो ....मम्मी वो रॉकी के साथ भाग गयी ...क्याआआआआआअ  रॉकी के साथ ,हाँ नील ने मुझे बताया और कहा ये प्लान तो उनका एक महीने से बन रहा था  सुन मम्मी अपने सिर पर हाथ रख कर बैठ गयी ...पापा जो अब तक चुप बैठे थे बोले ,''विनय की मम्मी देख लिया अपने लालन पालन का असर यही होना था ,जो आज़ादी तुम बच्चों के लिए वरदान समझ रही थी उसमे यही होना था .बच्चों की इच्छाएं पूरी करना सही है किन्तु सही गलत में अंतर करना क्या वे कहीं और से सीखेंगे कहते कहते पापा कांपने लगे ....पापा आप शांत हो जाइये मैं अवंतिका को ढूंढ लाऊंगा ....बेटा मैं जीवन भर चुप ही रहा हूँ यदि न रहता तो ये दिन न देखना पड़ता कहते कहते पापा रोने लगे और निढाल होकर गिर पड़े ..
''विनय ''चलो बेटा ...सुन जैसे सोते से जाग गया हो उठा और अपने पापा के अंतिम संस्कार के लिए सिर झुका अर्थी के साथ चल दिया .

शालिनी  कौशिक 



बुधवार, 22 अक्तूबर 2014

दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं -''शालिनी''के दीप हजारों काम यही कर जायेंगे -

''शालिनी''के दीप हजारों काम यही कर जायेंगे -दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं 

30 Best and Beautiful Diwali Greeting card Designs and backgrounds

वसुंधरा के हर कोने को जगमग आज बनायेंगे ,
जाति-धर्म का भेद-भूलकर मिलकर दीप जलाएंगे .
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पूजन मात्र आराधन से मात विराजें कभी नहीं ,
होत कृपा जब गृहलक्ष्मी को हम सम्मान दिलायेंगें .
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आतिशबाजी छोड़-छोड़कर बुरी शक्तियां नहीं मरें ,
करें प्रण अब बुरे भाव को दिल से दूर भगायेंगे .
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चौदह बरस के बिछड़े भाई आज के दिन ही गले मिले ,
गले लगाकर आज अयोध्या भारत देश बनायेंगे .
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सफल दीवाली तभी हमारी शिक्षित हो हर एक बच्चा ,
छाप अंगूठे का दिलद्दर घर घर से दूर हटायेंगे .
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भ्रष्टाचार ने मारा धक्का मुहं खोले महंगाई खड़ी ,
स्वार्थ को तजकर मितव्ययिता से इसको धूल चटाएंगे .
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उल्लू पर बैठी लक्ष्मी से अंधी दौलत हमें मिले ,
अंधी भक्ति मिटाके अपनी गरुड़ पे माँ को लायेंगे .
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बेरोजगारी निर्धनता ने युवा पीढ़ी भटकाई है ,
स्वदेशी को सही भाव दे इन्हें इधर ले आयेंगे .
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मंगलमय है तभी दीवाली खुशियाँ बिखरें चारों ओर ,
''शालिनी''के दीप हजारों काम यही कर जायेंगे .
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शालिनी कौशिक
[कौशल ]

बुधवार, 15 अक्तूबर 2014

good servant but a bad master -सोशल साइट्स

जनलोकपाल का मुद्दा और जनांदोलन कोई ऐसी नयी बात नहीं थी पहले भी ऐसे बहुत से मुद्दे लेकर जनांदोलन होते रहे  और थोड़ी बहुत असहज परिस्थितियां सरकार के लिए उत्पन्न करते रहे किन्तु यह आंदोलन अन्ना और केजरीवाल की अगुआई में एक ऐसा आंदोलन बना कि सरकार की जड़ें हिला दी कारण था इसका सोशल साइट्स से भी जुड़ा होना और सोशल साइट्स के माध्यम से जनता के एक बहुत बड़े वर्ग की इसमें भागीदारी और इसी का परिणाम रहा दशकों से लटके जनलोकपाल के मुद्दे पर सरकार का सकारात्मक कदम उठाना।
रेप ,गैंगरेप रोज़ होते हैं थोड़ी चर्चा का विषय बनते हैं और फिर भुला दिए जाते हैं किन्तु १६ दिसंबर २०१२ की रात को हुआ दामिनी गैंगरेप कांड देश ही नहीं सम्पूर्ण विश्व को हिला गया और इसका कारण भी वही था सोशल साइट्स ,सोशल साइट्स के माध्यम से रातो रात ये खबर सारे विश्व में फ़ैल गयी और इन सोशल साइट्स ने ही जगा दी संवेदना सदियों से सोयी उस दुनिया की जो रेप ,गैंगरेप की दोषी पीड़िता को ही मानते रहे सदा सर्वदा और पहली बार दुनिया उठ खड़ी हुई एक पीड़िता के साथ इस अपराध के खिलाफ उसके लिए न्याय की मांग करने को .
महंगाई ,भ्रष्टाचार ,महिलाओं के प्रति बढ़ते अत्याचार मुद्दे पहले भी थे और ऐसी ही निन्दित अवस्था में थे जैसे अब हैं लेकिन सोशल साइट्स ने यहाँ भी अपना सशक्त योगदान दिया और उखाड़ फेंका दस साल से जमी यू,पी,ए.सरकार व् १५ साल से दिल्ली में जमी शीला दीक्षित सरकार को .
किन्तु ऐसा नहीं कि सोशल साइट्स केवल सोशल ही हों, ये सामाजिक रूप से यदि सकारात्मक कार्य कर रही हैं  तो असामाजिकता में भी पीछे नहीं हैं .फेसबुक ट्विटर ऐसी सोशल साइट्स  बन चुकी हैं जिनका इस्तेमाल न केवल समाज को जोड़ने में किया जा रहा है बल्कि समाज तोड़ने में भी ये पीछे नहीं हैं -धार्मिक उन्माद फैलाना हो तो फेसबुक ,साम्प्रदायिक दंगे करवाने हों तो ट्विटर ,लड़की को बहकाना हो तो फेसबुक ,लड़के को पागल बनाना हो तो फेसबुक ,और ये सब साबित होता है इन समाचारों से जो आये दिन हम पढ़ते हैं समाचारपत्रों में ,देखते हैं अपने आस पास -
*मंगलवार २९ जुलाई २०१४ का अमरउजाला इन सोशल साइट्स की असलियत से जुडी तीन ख़बरें प्रकाशित करता है -
१-खटीमा [ऊधमसिंह नगर ]-फेसबुक पर सहारनपुर दंगे से सम्बंधित फोटो टैग कर धार्मिक उन्माद फ़ैलाने के आरोप में पुलिस ने एक युवक को गिरफ्तार किया है .
२-सहारनपुर में दंगों के समाधान के रूप में गुजरात मॉडल की वकालत करने वाले भाजपा विधायक व् पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य सीटी रवि बाद में अपने ट्वीट पर सफाई देते नज़र आये .
३-इंदौर-२३ वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवती का फेसबुक पर फ्रेंड बने युवक ने बुलाकर धोखे से अश्लील वीडियो बनाया .
**मेरठ में भारत से जुडी गोपनीय सूचनाये हासिल करने के लिए सोशल साइट्स ने युवतियों को खास ट्रेनिंग दे रखी है यह खुलासा इंटेलिजेंस द्वारा विज्ञानं शिक्षक दीपक शर्मा से की गयी पूछताछ में हुआ है उनसे एक युवती रानी ने चैटिंग में अपना नाम रेनू रख कहा -
''साइंस से प्यार करती हूँ इसलिए आपको बनाया दोस्त .''
यही नहीं सेना के और भी जवानों को भेजी फ्रेंड रिक्वेस्ट .
यही नहीं आज हाईटेक युवाओं पर आतंकियों की नज़र है और वे इन सोशल साइट्स के माध्यम से इनसे जुड़ रहे हैं .
ये सोशल साइट्स आज हर तरह के काम कर रही हैं एक तरफ ये लोगों की मददगार भी बन रही हैं और एक तरफ चैन हराम करने वाली  भी .यूनिवर्सिटी ऑफ़ अलबामा के असोसिएट प्रोफ़ेसर डॉ.पाविका शेल्डन ने बताया कि शोध में शर्मीले लोग फेसबुक पर ज्यादा वक्त बिताते हैं .साथ ही एक नए शोध के मुताबिक सोशल मीडिया पर वजन घटाने के तरीके भी लोग सीख रहे हैं लन्दन के इम्पीरियल कालेज में १२ शोध का साझा नतीजा यही है कि सोशल मीडिया से मोटापा घटाने में मदद मिल रही है .साथ ही हमारी सरकार भी इस और अब सक्रियता दिखाकर जनता की मददगार बन रही है इसका प्रत्यक्ष उदाहरण यह है -

ट्विटर पर अखिलेश चौंका देंगे आपको

ट्वीट करते ही आया सीएम का जवाब
चार दिन बीत चुके थे। वह सारी भाग-दौड़ कर चुका था। यहां तक कि लाइनमैन को घूस देने को भी तैयार था। लेकिन कोई भी उसके घर की बिजली ठीक करने को तैयार नहीं था।

आखिर पांचवे दिन उसने गुस्से में उत्तर-प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को ट्वीट किया। उसने लिखा कि 'नोएडा सेक्टर 52 में पश्चिमांचल विधुत के जेई ने मुझसे घूस मांगी है और चुनौती दी है कि जो करना है कर लो।'

आपको जानकर हैरानी होगी कि उसी दिन शाम को चार बजे मुख्यमंत्री कार्यालय से जवाब आया कि आप अपना फोन नंबर भेजें।
किन्तु ऐसा नहीं कि सब अच्छा है बुरा भी है ये देखिये डॉ.शिखा कौशिक 'नूतन 'की एक पुरानी पोस्ट -


शुक्रवार, 27 सितंबर 201ये मामला केवल फेसबुक तक सीमित नहीं
27-9-13 को यह फोटो फेसबुक पर देखा था
फेसबुक पर यह पढ़ा-

 Vishal Haloli Congress

 इस लड़की का नाम है सुष्मिता।

इसने फेसबुक पर फोटो अपलोड किया था।

किसी लड़के ने इसका फोटो सेव करके गूगल में

इसका प्रोफाइल दाल कर कॉल गर्ल की लिस्ट में डाल

दिया।

ये लड़की बहुत अच्छे परिवार की थी।

उस लड़के ने पूरे शहर में फैला दिया की ये एक कॉल

गर्ल है।

जब उस लड़की और उसके परिवार को पता चला तो पूरे

परिवार ने सामूहिक आत्महत्या कर ली।

दोस्तों ये है फेसबुक की दुनिया।

अब आप ही बताएं इसका क्या उपाय

किया जा सकता है?

सभी बहनों से हाथ जोड़ कर नम्र निवेदन है

की कृप्या अपनी फोटो फेसबुक से त्वरित हटायें।



पहले बहुत दुःख हुआ पर फिर गुस्सा आया .सुष्मिता के परिवार ने गलत कदम उठाया .ये मामला केवल फेसबुक तक सीमित नहीं है .आज तक हजारों लड़कियों ने बदनामी के डर से आत्महत्या कर डाली है पर हमारा समाज नहीं सुधरा .अब जरूरत है ऐसे गंदे लोगों का सामना डट कर करने का .गलत जानकारी देकर तो कोई भी ,कहीं से किसी भी महिला के फोटो को अपलोड कर बदमान कर सकता है ...पर इसका मतलब ये तो नहीं कि आत्महत्या कर ऐसे अपराधियों को बढ़ावा दिया जाये .जिसने ऐसा गन्दा काम किया है उसे पूरे समाज व् देश के सामने लाकर उसको उचित दंड दिलाना ही सही रास्ता है .
प्रस्तुतकर्ता shikha kaushik पर 8:32 am
इस प्रकार आज ये सोशल साइट्स दोस्त व् दुश्मन दोनों रूप में हैं जिनसे न मिलते बनता है न बिछड़ते ,न निगलते बनता है न उगलते ,समझ का इस्तेमाल हो तो सही और न हो तो गलत ये विश्वास बनाती भी हैं और बिगाड़ती भी ,सम्बन्ध बनाती भी हैं और तोड़ती भी ,एक तरफ हम इनके माध्यम से विश्व से जुड़ रहे हैं किन्तु ये भी सच्चाई है कि इन्हीं के माध्यम से अपने घर ,समाज से कट रहे हैं उन्हें तोड़ रहे हैं .इसलिए इनके बारे में ,जैसे विज्ञानं के लिए कहा गया है कि -
''science is a good servant but a bad master .''
ऐसे ही इन सोशल साइट्स के लिए भी कहा जा सकता है -
''social sites are good servant but bad master .
अर्थात इन्हें यदि हम अपने ऊपर हावी न कर अपनी समझ से इस्तेमाल करते हैं तो ये सही और यदि इन्हें हावी कर इनके हिसाब से चलते हैं तो गलत .वास्तव में सोशल होना हम पर निर्भर है ,समाज चलना व् समभलना हम पर निर्भर है इन साइट्स पर नहीं ये केवल हमारे हाथ में है कि हम इनके माध्यम से समाज की मदद करते हैं या उसका चैन हराम करते हैं .







फेसबुक दीवार

दीवार
मेरी
आपकी
पडोसी की
हर किसी की .
......................
हिफाज़त करे
मेरी
आपकी
पडोसी की
हर किसी की .
............................
राहत की साँस
मेरी
आपकी
पडोसी की
हर किसी की .
...........................

श्रृंगार भीतरी ,शान बाहरी,
मेरी
आपकी
पडोसी की
हर किसी की .
......................
अब बन गयी
ज़रुरत
दिलों की भड़ास की ,
उत्पाद प्रचार की ,
वोट की मांग की ,
किसी के अपमान की ,
किसी के सम्मान की .
..................................

भरा जो प्यार दिल में
दिखायेगा दीवार पर ,
भरा जो मैल मन में
उतार दीवार पर ,
बेचना है मॉल जो
प्रचार दीवार पर ,
झुकानी गर्दन तेरी
लिखें हैं दीवार पर ,
पधारी कौन शख्सियत
देख लो दीवार पर .
.........................................

मार्क जुकरबर्ग ने
संभाला एक मोर्चा ,
देखकर गतिविधि
बैठकर यही सोचा ,
दीवार सी ही स्थिति
मैं दूंगा अंतर्जाल पर ,
लाऊंगा नई क्रांति
फेसबुक उतारकर ,
हुआ कमाल जुट गए
करोड़ों उपयोक्ता ,
दीवार का ही काम अब
फेसबुक कर रहा ,

जो चाहे लिख लो यहाँ ,
जो चाहे फोटो डाल लो ,
क्रांति या बबाल की
लहर यहाँ उफान लो ,
करे कोई ,भरे कोई ,
नियंत्रण न कोई हद ,
जगायेगा कभी लगे
पर आज बन गया है दर्द .
..........................................

शालिनी कौशिक
[कौशल ]






शनिवार, 4 अक्तूबर 2014

करवा चौथ - श्री नरेंद्र मोदी जी और जशोदा बेन

   
  11 अक्टूबर को हिन्दू सुहागिन स्त्रियां उल्लास व् उत्साह से भरकर करवा चौथ का पर्व मनाएंगी जिनमे से अधिकांश को छलनी में चन्द्रमा देवता के दर्शन के बाद अपने पति के मुख का प्रत्यक्ष दर्शन करने का सौभाग्य भी प्राप्त होगा और जिनके पति उनके पास नहीं हैं उनके पति उनसे आधुनिक संचार तकनीक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये रु-ब-रु होंगे किन्तु एक विवाहिता ऐसी भी है जो दशकों से अपने पति के लिए व्रत भी रख रही है और उनके आने का इंतज़ार भी ,जो पति का साथ देने को कुछ भी करने को तैयार है ,बरसों बरस के त्याग के अपमान का गरल पीने के बावजूद वह धरती माँ की गोद में माता सीता की भांति शरण नहीं मांगती अपितु अपने पति को क्षमा कर पति के साथ रहने को तैयार है।

Jashodaben to Modi: I am extremely happy he is becoming PM, he accepted me as wife 

   क्या शिक्षक दिवस पर बच्चों की क्लास लगाकर बच्चों का दिल जीतने वाले और विजयादशमी पर्व पर मन की बात के जरिये जनता जनार्दन से जुड़ने वाले हमारे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी अपनी धर्मपत्नी जशोदा बेन को इस करवा चौथ पर उनकी  त्याग -तपस्या का फल उन्हें अपनाकर देंगे या उन्हें यही कहने को विवश करेंगे -
  ''बड़ी देर भई ,बड़ी देर भई ,कब लोगे खबर मोरे राम 
                          कब लोगे खबर मोरे राम !
    चलते -चलते मेरे पग हारे ,आई जीवन की शाम 
                          कब लोगे खबर मोरे राम !

शालिनी कौशिक 
     [कौशल ]

''बेटी को इंसाफ -मरने से पहले या मरने के बाद ?

   '' वकील साहब '' कुछ करो ,हम तो लुट  गए ,पैसे-पैसे को मोहताज़ हो गए ,हमारी बेटी को मारकर वो तो बरी हो गए और हम .....तारी...