शुक्रवार, 27 नवंबर 2015

भारत में असहिष्णुता है .


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संविधान दिवस और धर्मनिरपेक्षता और असहिष्णुता पर संग्राम ये है आज की राजनीति का परिपक्व स्वरुप जो हर मौके को अपने लिए लाभ के सौदे में तब्दील कर लेता है .माननीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह इस मौके पर संविधान निर्माता के मन की बात बताते हैं वैसे भी इस सरकार के मुखिया ही जब मन की बात करते फिरते हैं तब तो इसके प्रत्येक सदस्य के लिए मन की बात करना जरूरी हो जाता है भले ही वह अपने मन की हो या किसी दुसरे के मन की .वे कहते हैं -
''संविधान निर्माता ने कभी भी ''धर्मनिरपेक्ष '' शब्द को संविधान में रखने के बारे में नहीं सोचा था , इसे तो १९७६ में एक संशोधन के जरिये शामिल किया गया किन्तु ये कहते समय उन्होंने संविधान की प्रस्तावना के सही शब्द पर गौर नहीं किया और बाद में अपनी बात को वजनदार बनाने के लिए सही शब्द को अपना सुझाव बता वाहवाही लूटने का काम अपनी तरफ से कर गए .जबकि अगर वे ध्यान से संविधान की प्रस्तावना पढ़ते तो अपनी बात कहने से बच सकते थे और संविधान निर्माता के मन की बात का ढोल पीटने से भी .भारतीय संविधान की प्रस्तावना में कहा गया है -
   ''हम भारत के लोग भारत को एक प्रभुत्व संपन्न ,लोकतंत्रात्मक ,पंथनिरपेक्ष ,समाजवादी गणराज्य बनाने के लिए -दृढ़संकल्प होकर इस संविधान को अंगीकृत ,अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं .''
    पर जिस बात पर संसद में बहस छिड़ी है उसके लिए संविधान में शामिल इस शब्द को घसीटना एक बेतुकी बात ही कही जाएगी क्योंकि संविधान में भले ही पंथनिरपेक्षता शब्द हो या धर्मनिरपेक्षता इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है फर्क पड़ता है केवल उस सोच से जो भारत में इंसान -इंसान को बाँटने का काम करती है और सब जानते हैं ये काम यहाँ कौन कर रहा है. इसके लिए किसी विशेष व्यक्ति -धर्म -समुदाय को दोषी नहीं ठहराया जा सकता  क्योंकि यहाँ बहुत से व्यक्ति -समुदाय इस काम में जुटे हैं जो स्वयं को ऊपर और दूसरे को नीचे मानते हैं और जिसे नीचे मानते हैं उसे ऐसा दिखाने से चूकते भी नहीं .वे कहाँ ये देखते हैं कि संविधान हमें इस बात की इज़ाज़त देता है या नहीं .उनके लिए स्वयं के विचार ही महत्वपूर्ण हैं और ये भी सत्य है कि यहाँ मुसलमानों को इस तरह के व्यवहार का सर्वाधिक सामना करना पड़ता है .उन्हें मांसाहारी होने के कारण बहुत से संकीर्ण सोच वालों द्वारा अछूत की श्रेणी में रखा जाता है और उनके साथ दुर्व्यवहार भी किया जाता है .ये मैंने स्वयं देखा है इसीलिए कह रही हूँ .मेरे साथ पढ़ने वाली एक छात्रा ने स्कूल में अपने बर्तनों का इस समुदाय की लड़की द्वारा इस्तेमाल होने पर स्कूल में हंगामा खड़ा कर दिया था .अब इसे क्या कहा जायेगा जब तक की उसे ये सोच उसके घर परिवार से नहीं मिली होगी तब तक वह ऐसा नहीं कर सकती थी .इसलिए इस समय जो यह संविधान में इस शब्द को लेकर बहस खड़ी कर हमारी सरकार गैरजरूरी बहस शुरू करना चाहती है उसका कोई औचित्य ही नहीं है और असहिष्णुता के लिए इसकी कोई जिम्मेदारी भी नहीं है .अगर सरकार वाकई देश में फैली असहिष्णुता के प्रति गंभीर है तो पहले संविधान की आत्मा को समझे और इसके निर्माताओं के ह्रदय की भावनाओं को जो देश में प्रत्येक नागरिक को गरिमामय जीवन देने की भावना रखती है और एक गरिमामय जीवन सम्मान चाहता है और आपसी प्रेम व् सद्भाव न कि बात बात में भारत छोड़े जाने की धमकी और सामाजिक जीवन में भेदभाव .
शालिनी कौशिक
[कौशल ]

मंगलवार, 24 नवंबर 2015

हिम्मतें दुश्वारियों में दोस्त बन जाएँगी .


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ज़िंदगी की मुश्किलें हर रोज़ आज़माएंगी ,
डरते-डरते गर जियेगा यूँ ही ज़ान जाएगी .
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इस जहाँ में कोई तेरा साथ देगा ही नहीं ,
यूँ डरेगा ,परछाई भी साथ छोड़ जाएगी .
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आये हैं तन्हा सभी जायेंगे तन्हा सभी ,
न समझ इस बार दुनिया तेरे साथ जाएगी .
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गम नहीं अपने मुकाबिल दुश्मनों को देख ले ,
मंज़िलें यूँ हर कदम पर नित नयी मिल जाएँगी .
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झेलकर हर बदजुबानी समझा रही ''शालिनी '',
हिम्मतें दुश्वारियों में दोस्त बन जाएँगी .
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शालिनी कौशिक
[कौशल ]

रविवार, 22 नवंबर 2015

ये दायित्व सुब्रमनियम स्वामी का है


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भारतीय राजनीति में ऐसे लोग कम नहीं जिनकी राजनीतिक रोटियां केवल और केवल गांधी परिवार की बुराई के चूल्हे पर ही सिंकती  हैं और केवल इस परिवार की बुराई करकर ही वे स्वयं को बहुत बड़ा देशभक्त साबित करते हैं और इन्हीं नेताओं में से सर्वप्रमुख नेता हैं ''माननीय सुब्रमणियम स्वामी'' अभी हाल ही में वे एक बहुत बड़ा मुद्दा [केवल उनकी नज़रों में ] लेकर आये हैं और वह है राहुल गांधी के ब्रिटिश नागरिक होने का मुद्दा ,वे कहते हैं कि -
''राहुल ब्रिटिश नागरिक हैं ''

Rahul Gandhi is a British citizen, Subramanian Swamy says;

NEW DELHI: BJP leader Subramanian Swamy on Monday alleged that Congress vice-president Rahul Gandhi has claimed himself to be a British national before the authorities there and has demanded that he be stripped of Indian citizenship and Lok Sabha membership.
और अब वे कह रहे हैं कि ''राहुल साबित करें , वह ब्रिटिश नागरिक नहीं ''और अपने इस दावे के समर्थन में वे ब्रिटिश सरकार की आधिकारिक वेबसाइट से उपलब्ध दस्तावेज का हवाला देते हुए कहते हैं कि राहुल भारत के नहीं बल्कि ब्रिटिश के नागरिक हैं और अब राहुल साबित करें कि ये कागजात फर्जी हैं .
जहाँ तक हम जानते हैं सुब्रमणियम स्वामी एक जाने माने विधिवेत्ता हैं विकिपीडिया भी कहता है -
''डॉ॰ सुब्रह्मण्यम् स्वामी (जन्म: 15 सितम्बर 1939 चेन्नई, तमिलनाडु, भारत) जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके हैं। वे सांसद के अतिरिक्त 1990-91 में वाणिज्य, विधि एवं न्याय मन्त्री और बाद में अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार आयोग के अध्यक्ष भी रहे''
और ऐसे में वे स्वयं जानते हैं कि यहाँ ये साबित करने का भार किस पर है चलिए अगर वे अपने इस भार से बचना चाहते हैं तो हम उन्हें बता दें कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा १०२ और १०३ उन्हें इससे बचने नहीं देंगी क्योंकि ये कहती हैं -
धारा १०२ -किसी वाद या कार्यवाही में सबूत का भार उस व्यक्ति पर होता है जो असफल हो जायेगा ,यदि दोनों में से किसी भी ओर से कोई भी साक्ष्य न दिया जाये .
और धारा १०३ उस विशिष्ट तथ्य के बारे में सबूत के भार के बारे में कहती है जो सुब्रमणियम स्वामी जी यहाँ लाये हैं -
धारा १०३ - किसी विशिष्ट तथ्य के सबूत का भार उस व्यक्ति पर होता है जो न्यायालय से यह चाहता है कि वह उसके अस्तित्व में विश्वास करे ,जब तक कि किसी विधि द्वारा यह उपबंधित न हो कि उस तथ्य के सबूत का भार किसी विशिष्ट व्यक्ति पर होगा .
और इस तरह यहाँ इस तथ्य को साबित करने का भार पूरी तरह से सुब्रमणियम स्वामी पर है क्योंकि वे मात्र अनर्गल प्रलाप कर रहे हैं कोई पुख्ता सबूत पेश नहीं कर रहे .मात्र वहां की आधिकारिक वेबसाइट पर से उपलब्ध दस्तावेज के जरिये वे अपने अनर्गल प्रलाप को पुख्ता सबूत के रूप में प्रस्तुत नहीं कर सकते क्योंकि वेबसाइट कितना सही बोलती हैं यह अभी हाल में ही गूगल ने दिखा दिया जब प्रथम प्रधानमंत्री के रूप में जवाहर लाल नेहरू के स्थान पर नरेंद्र मोदी को दिखाया गया .इसलिए अब सुब्रमणियम स्वामी पुख्ता सबूत पेश कर साबित करें कि राहुल ब्रिटिश नागरिक हैं तब आगे बात करें .
शालिनी कौशिक
[कौशल ]

गुरुवार, 19 नवंबर 2015

तेजाबी हमले :सरकार सही रास्ते पर आये


एक रुसी युवती पर तेजाबी हमला और वह भी प्रधानमंत्री जी के लोकसभा कार्यक्षेत्र में बहुत ही दुखद विषय है। समाचारों के अनुसार स्थिति ये है -
The 23-year-old Russian woman who was attacked with acid in Varanasi and was undergoing treatment has been flown to Moscow with Indian government assuring her that all medical expenses will be borne by it.
और उससे भी दुखद ये कि देश की विदेश मंत्री इस सम्बन्ध में अपने कर्तव्य का निर्वहन अपनी सरकार की ही कार्यप्रणाली के अनुसार कर रही हैं अर्थात सोशल मीडिया पर और इसके लिए वे ट्विटर का लगातार इस्तेमाल कर रही हैं -
External Affairs Minister Sushma Swaraj has sought a report from the Uttar Pradesh government about the attack on Russian national and tweeted about her leaving for Russia today.
Here's what Swaraj tweeted:
Acid attack on Russian girl - A senior officer of MEA met the victim in hospital today. He also spoke to the Doctors attending on her.


इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार
the Indian Express reported that doctors in New Delhi were trying to salvage the left eye of victim.
"Her face and eyes are badly burnt. We have stabilised her and completed initial tests. Now our priority will be to prevent any infection. We will also try to see how far her vision can be restored, particularly in the left eye, which is the less severely burnt of the two," a senior doctor in the burns department told The Indian Express.

कानून क्या कहता है -अभी हाल ही में हुए दंड विधि [ संशोधन] अधिनियम ,२०१३ में तेजाब सम्बंधित मामलों के लिए धारा ३२६ -क व् धारा ३२६-ख  अन्तः स्थापित की गयी हैं जिसमे धारा ३२६-क '' स्वेच्छ्या तेजाब ,इत्यादि के प्रयोग से घोर उपहति कारित करना  ''को ही अपने घेरे में लेती है जिसमे कारावास ,जो दस वर्ष से कम नहीं किन्तु जो आजीवन कारावास तक हो सकेगा और ज़ुर्माना जिसका भुगतान पीड़िता को किया जायेगा ......और धारा ३२६ -ख स्वेच्छ्या तेजाब फेंकने या फेंकने के प्रयत्न को ही अपने घेरे में लेती है जिसमे ५ वर्ष का कारावास ,किन्तु जो सात वर्ष तक का हो सकेगा और जुर्माने का दंड मिलेगा .

रुसी युवती  पर तेजाबी हमले की ये घटना १३ नवम्बर को हुई और अब अगर हम देखें तो इतने दिन में कोई भी  सही कदम इस दिशा में नहीं उठाया गया। ये कोई पहली घटना तेजाबी हमले की नहीं है तेजाबी हमले होते रहे हैं और सरकार के तेजाब की बिक्री पर प्रतिबन्ध के बावजूद ये हमले रूक नहीं रहे हैं और कानून में जो संशोधन किये भी गए हैं वे नाकाफी हैं क्योंकि इनमे सजा बहुत कम रखी जाती है। तेजाब की बिक्री पर  बंदिशें हैं उससे कहीं बढ़कर इस तरह के हमलों में सजा में वृद्धि जरूरी है और ये सजा फांसी से कम नहीं होनी चाहिए क्योंकि ये हमले पीड़ित की ज़िंदगी को तहस-नहस कर देते हैं और रही सरकार के रवैये की बात तो वह तो किसी भी तरह से सुधरने वाला नहीं क्योंकि अच्छे दिन लाने का वादा करने वाली ये सरकार सोशल मीडिया में अपने फॉलोवर ही बढ़ाने में लगी है भले ही कितने बलात्कार हो जाओ या तेजाबी हमले इसकी सेहत पर कोई असर पड़ने वाला नहीं है ये तो इसके लिए फॉलोवर बढ़ाने के मौके हैं इसे ही तो कहते हैं ''बिल्ली के भाग से छींका फूटा ''
शालिनी कौशिक
[कौशल ]

मंगलवार, 17 नवंबर 2015

जन्मदिन ये मुबारक हो उसी इंदिरा की जनता को ,


 
अदा रखती थी मुख्तलिफ ,इरादे नेक रखती थी ,
वतन की खातिर मिटने को सदा तैयार रहती थी .
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मोम की गुड़िया की जैसी ,वे नेता वानर दल की थी ,,
मुल्क पर कुर्बां होने का वो जज़बा दिल में रखती थी .
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पाक की खातिर नामर्दी झेली जो हिन्द ने अपने ,
वे उसका बदला लेने को मर्द बन जाया करती थी .
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मदद से सेना की जिसने कराये पाक के टुकड़े ,
शेरनी ऐसी वे नारी यहाँ कहलाया करती थी .
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बना है पञ्च-अग्नि आज छुपी है पीछे जो ताकत ,
उसी से चीन की रूहें तभी से कांपा करती थी .
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जहाँ दोयम दर्जा नारी निकल न सकती घूंघट से ,
वहीँ पर ये आगे बढ़कर हुकुम मनवाया करती थी .
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कान जो सुन न सकते थे औरतों के मुहं से कुछ बोल ,
वो इनके भाषण सुनने को दौड़कर आया करती थी .
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न चाहती थी जो बेटी का कभी भी जन्म घर में हो ,
मिले ऐसी बेटी उनको वो रब से माँगा करती थी .
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जन्मदिन ये मुबारक हो उसी इंदिरा की जनता को ,
जिसे वे जान से ज्यादा हमेशा चाहा करती थी .
शालिनी कौशिक
[कौशल ]

रविवार, 15 नवंबर 2015

राजनीति में जमी आतंकवाद की जड़ें



   पेरिस में मुंबई जैसा आतंकवादी हमला , १२६ की मौत ,आई एस के फिदायीन हमलावरों ने भीड़ भरे सात स्थानों को निशाना बनाया -इस तरह की घटनाएँ कभी रुकने वाली हैं ऐसा कभी भी नहीं कहा जा सकता क्योंकि जो तत्व इस तरह की घटनाओं के लिए जिम्मेदार है वह इन्हें कभी रुकने नहीं देगा और भले ही किसी भी देश में ये घटनाएँ घटने पर वहां के हुक्मरान इनसे हताहत हुई जनता के दुःख को दूर करने के लिए आतंकवाद से निबटने के लिए प्रतिबद्ध दिखाई दें किन्तु वास्तव में इन घटनाओं के पीछे अगर कोई है तो हुक्मरानों का यही  प्रतिबद्धता का नाटक है क्योंकि हुक्मरानों की यह प्रतिबद्धता मात्र एक दिखावा है जो कि घटना के घटित होने पर तुरत प्रतिक्रिया के रूप में दिखाई जाती है और धीरे धीरे इस पर समय का मरहम लगा दिया जाता है और यही इस तरह की घटनाओं का मूल कारण है क्योंकि यह आम तौर पर देखने में आया है कि किसी महत्वपूर्ण घटनाक्रम से  जो कि राजनीति के आकाश में अगर धुंधलका आता दिखाई देता है तो इस तरह के घटनाक्रम से उस आकाश को स्वच्छ करने की प्रक्रिया हमारे हुक्मरानों द्वारा अपनायी जाती है ऐसी ही कुछ मुंबई के आतंकवादी हमले के समय आशंकाएं उठी थी किन्तु जैसा कि मैंने पहले ही कहा है कि समय का मरहम सब कुछ भुला देता है और राजनीति अपना उल्लू सीधा करती रहती है .इसलिए जब फिर सब कुछ सुचारू रूप से चलता दिखाई देता है तब फिर से राजनीति को कुछ चुभन होती है और यह चुभन एक नये आतंकवादी हमले के रूप में दूर की जाती है और हर नया आतंकवादी हमला नए ज़ख्म दे जाता है और ध्यान फिर भटक जाता है और हमें डर की ओर धकेल जाता है .
    कहने को कहा जायेगा कि ये हमला पेरिस में हुआ है भारत में नहीं, किन्तु जवाब वही है राजनीति पूरे विश्व में एक जैसी है ''अवसरवादी -अपना उल्लू सीधा करने वाली '' और रही बात आतंकवादी संगठन द्वारा इन हमलों की जिम्मेदारी लेने की तो यह किसे नहीं पता कि इन संगठनों को पनपने का अवसर कौन देता है .एक छोटा सा अपराधी धीरे धीरे बड़े आपराधिक गिरोह का सरगना बन जाता है ,पुलिस की नाक के नीचे ही वह कितनों को मौत के घाट उतार देता है पुलिस को उसका पता ही नहीं चलता लेकिन जब पुलिस की अपनी ही जान पर बन आती है तब न केवल वह अपराधी पकड़ा जाता है बल्कि मारा भी जाता है और यह तो रही छोटे स्तर की बात पर यह बात ही केवल छोटे स्तर की है छोटी है नहीं क्योंकि इन आतंकवादी हमलों में पुलिस की भूमिका में राजनीति के  आकाश पर चमकते हमारे बड़े बड़े देश और इनके हुक्मरान  हैं और ये जब तक चाहेंगे तब तक ये संगठन ऐसे ही अस्तित्व में रहेंगे और जब ये इनका ख़ात्मा चाहेंगे तब वह भी हो जायेगा और ओसामा बिन लादेन का सफाया इसका जीता जागता सबूत है .इसलिए अगर ये कहा जाये कि राजनीति की जमीन में ही आतंकवाद की जड़ें जमीं हैं और इसका ख़ात्मा मुश्किल नहीं तो कठिन अवश्य है तो यह सही ही होगा क्योंकि राजनीति अमर घुंटी पीकर ही पैदा हुई लगती है .
शालिनी कौशिक
 [कौशल ]

शुक्रवार, 13 नवंबर 2015

बाल सुरक्षा पर ध्यान दें प्रधानमंत्री जी -change .org


आज मेरे मेल में राज्य सभा सांसद राजीव चंद्रशेखर जी का ये मेल मिला जो कि आज भारत में यौन हिंसा के शिकार बच्चों से सम्बंधित था जो कि मूल रूप में सभी के समक्ष प्रस्तुत है -



In 2 weeks, I am meeting PM Modi with this petition. I want him to commit protecting our children from sexual abuse. I need you to sign my petition so I can showcase huge support on this issue. SHALINI KAUSHIK, sign my petition now!

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Trigger Warning: Content about Child Sexual Abuse
Dear SHALINI KAUSHIK,
15-year-old was stripped and photographed by 4 young men. Unable to bear the burden she took her own life.
3 year-old-child was raped. She was assaulted in school by an employee who was supposed to be taking care of her.
Both these incidents took place in my hometown of Bengaluru. I am shocked and ashamed. We are not doing enough to protect our children.
I am a Rajya Sabha MP and I want to use all my resources to keep our children safe. I am asking Prime Minister Modi to commit to a roadmap to protect our children from sexual abuseSign my petition.
SHALINI KAUSHIK, your support on this petition willhelp me make a strong case to PM Modi. Help mereach 2 lakh signatures this week.
We think our child is safe, something like this will never happen to anyone I know. Sadly, that’s not true! Sexual abuse is a risk all our children face all the time. At school, in our own neighbourhood and even at home.
Our children deserve a safe childhoodSign my petition.
Thank you for taking action,
Rajeev Chandrasekhar
Rajya Sabha MP
राजीव चंद्रशेखर जी का ये मेल आज की परिस्थितियों में और भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि ये न केवल उनके क्षेत्र में घटित हो रही दुखद घटना है बल्कि ये हम सबके आस पास भी घट रही है . आज ही समाचार-पत्र में मोदीपुरम के पल्लवपुरम में एक ५ साल की बच्ची के साथ तीन भाइयों द्वारा दुष्कर्म किये जाने की घटना इस बात की गवाह है कि स्थितियां बिगड़ती जा रही हैं और अब ये स्थिति बर्दाश्त के बाहर है और इस सम्बन्ध में प्रधानमंत्री जी द्वारा हस्तक्षेप आवश्यक है क्योंकि उनके दिशा-निर्देश इस नागवार स्थिति से हमारे बच्चों को बचाने में निश्चित रूप में मददगार साबित होंगे इसलिए राजीव चंद्रशेखर जी ने change . org के माध्यम से प्रधानमंत्री जी से इस सम्बन्ध में रोडमैप तैयार करने की अपील की है और हम सबसे साइन कर प्रधानमंत्री जी से इस सम्बन्ध में निवेदन करने की .अतः हम सभी का ये कर्तव्य है कि हम इस पुनीत कार्य में राजीव चंद्रशेखर जी का साथ देकर अपने बच्चों की सुरक्षा हेतु अपना योगदान दें .
शालिनी कौशिक
[कौशल ]

सोमवार, 9 नवंबर 2015

जाति-धर्म का भेद-भूलकर मिलकर दीप जलाएंगे -सहिष्णुता हेतु दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें


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वसुंधरा के हर कोने को जगमग आज बनायेंगे ,
जाति-धर्म का भेद-भूलकर मिलकर दीप जलाएंगे .
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पूजन मात्र आराधन से मात विराजें कभी नहीं ,
होत कृपा जब गृहलक्ष्मी को हम सम्मान दिलायेंगें .
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आतिशबाजी छोड़-छोड़कर बुरी शक्तियां नहीं मरें ,
करें प्रण अब बुरे भाव को दिल से दूर भगायेंगे .
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चौदह बरस के बिछड़े भाई आज के दिन ही गले मिले ,
गले लगाकर आज अयोध्या भारत देश बनायेंगे .
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सफल दीवाली तभी हमारी शिक्षित हो हर एक बच्चा ,
छाप अंगूठे का दिलद्दर घर घर से दूर हटायेंगे .
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भ्रष्टाचार ने मारा धक्का मुहं खोले महंगाई खड़ी ,
स्वार्थ को तजकर मितव्ययिता से इसको धूल चटाएंगे .
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उल्लू पर बैठी लक्ष्मी से अंधी दौलत हमें मिले ,
अंधी भक्ति मिटाके अपनी गरुड़ पे माँ को लायेंगे .
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बेरोजगारी निर्धनता ने युवा पीढ़ी भटकाई है ,
स्वदेशी को सही भाव दे इन्हें इधर ले आयेंगे .
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मंगलमय है तभी दीवाली खुशियाँ बिखरें चारों ओर ,
''शालिनी''के दीप हजारों काम यही कर जायेंगे .
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शालिनी कौशिक
[कौशल ]

मंगलवार, 3 नवंबर 2015

बेटी के भाग्य में प्रभु कांटे ही भर गया .



 

पैदा हुई है बेटी खबर माँ-बाप ने सुनी ,
खुशियों का बवंडर पल भर में थम गया .

चाहत थी बेटा आकर इस वंश को बढ़ाये ,
रखवाई का ही काम उल्टा सिर पे पड़ गया .

बेटा जने जो माता ये है पिता का पौरुष ,
बेटी जनम का पत्थर माँ के सिर पे बंध गया .

गर्मी चढ़ी थी आकर घर में सभी सिरों पर ,
बेडा गर्क ही जैसे उनके कुल का हो गया .

गर्दिश के दिन थे आये ऐसे उमड़-घुमड़ कर ,
बेटी का गर्द माँ को गर्दाबाद कर गया .

बेठी है मायके में ले बेटी को है रोटी ,
झेला जो माँ ने मुझको भी वो सहना पड़ गया .

न मायका है अपना ससुराल भी न अपनी ,
बेटी के भाग्य में प्रभु कांटे ही भर गया .

न करता कदर कोई ,न इच्छा है किसी की ,
बेटी का आना माँ को ही लो महंगा पड़ गया .

सदियाँ गुजर गयी हैं ज़माना बदल गया ,
बेटी का सुख रुढियों की बलि चढ़ गया .

 सच्चाई ये जहाँ की देखे है ''शालिनी ''
बेटी न जन्म ले यहाँ कहना ही पड़ गया .
      शालिनी कौशिक
           [कौशल]

शब्दार्थ-गर्दाबाद-उजाड़ ,विनाश 

रविवार, 1 नवंबर 2015

बॉलीवुड के एकमात्र खान शहंशाह-[शाहरुख़ खान ]-HAPPY BIRTHDAY TO SHAHRUKH KHAN

 बॉलीवुड एक ऐसा संसार जहाँ सब कुछ मनमोहक नज़र आता है ,जहाँ रोज नए शहंशाह बनते हैं और रोज ख़त्म होते हैं .अमिताभ बच्चन को बॉलीवुड के शहंशाह की उपाधि प्राप्त है किन्तु वे एकमात्र ही इस सिंहासन पर आसीन नहीं हैं इस सिंहासन को उन्हें एक और अभिनेता के साथ साझा करना पड़ेगा और वह अभिनेता हैं ''शाहरुख़ खान '' जिन्होंने अपनी फिल्मों के माध्यम से बॉलीवुड पर राज किया है .न केवल शाहरुख फ़िल्मी जीवन व्यतीत करते हैं बल्कि वे पारिवारिक रूप से भी अमिताभ बच्चन जी की बराबरी करते नज़र आते हैं जैसे अमिताभ जी का पारिवारिक जीवन फ़िल्मी जीवन की तरह सफल है ठीक वैसे ही शाहरुख़ खान का पारिवारिक जीवन भी फ़िल्मी जीवन की तरह सफल है .
      बहुत पहले दूरदर्शन पर एक धारावाहिक आया था ''फौजी '' उसमे जो सबका प्रिय कलाकार था वह अपनी चुलबुली हरकतों के कारण सबकी नज़रों में चढ़ा हुआ था .धारावाहिक में वह जब अपनी प्रेमिका का इंतज़ार करता था और दस तक की गिनती गिनते हुए दस पास  आने पर ''सवा नौ , साढ़े नौ ,पौने नौ '' का उच्चारण करता था तो सबके दिलों की धड़कन उसकी प्रेमिका के आने की दुआएं मांगते थे किसे पता था कि ये हमारा घर का हीरो [ यही कहना होगा क्योंकि दूरदर्शन को घर के सदस्य का दर्जा तब के समय में प्राप्त था ]अब फिल्मों में आ गया है ,एक दिन जब दूरदर्शन पर दीवाना फिल्म का '' ऐसी दीवानगी देखी नहीं कहीं '' गाना  देखा और उसमे शाहरुख़ को देखा तो दिल खुश हो गया और चिल्लाया ''अरे ये तो अपना फौजी है बस फिर क्या था अपनी रूचि उसकी फिल्मों में भी बढ़ गयी और वह वास्तव में शहंशाह निकला,एक के बाद एक फिल्म ने सफलता की बुलंदी को छुआ और यहाँ वे अमिताभ जी से भी आगे निकल गए क्योंकि अमिताभ जी को आरम्भ में असफलताओं का काफी सामना करना पड़ा था जबकि शाहरुख़ खान को आजतक भी असफलता अपना चेहरा नहीं दिखा पायी .
  उनके जीवन के बारे में कुछ जानकारी विकिपीडिया हमें देता है जो यूँ है -
शाहरुख़ ख़ान
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शाहरुख़ ख़ान चेन्नई एक्सप्रेस के संगीत उद्घाटन पर
जन्म2 नवम्बर 1965 (आयु 49 वर्ष)
नई दिल्ली, भारत
रहवासमुंबईमहाराष्ट्र, भारत[1]
व्यवसायअभिनेता, निर्माता, टेलिविज़न मेज़बान
सक्रिय वर्ष1988—अबतक
जीवनसंगीगौरी खान (1991—अबतक)
संतान3
शाहरुख़ ख़ान (उच्चारण [‘ʃaːɦrəx ˈxaːn]; जन्म 2 नवम्बर 1965), जिन्हें अक्सर शाहरुख खान के रूप में श्रेय दिया जाता है और अनौपचारिक रूप में एसआरके नाम से सन्दर्भित किया जाता, एक भारतीय फ़िल्म अभिनेता है। अक्सर मीडिया में इन्हें "बॉलीवुड का बादशाह", "किंग खान", "रोमांस किंग" और किंग ऑफ़ बॉलीवुड नामों से पुकारा जाता है। खान ने रोमैंटिक नाटकों से लेकर ऐक्शन थ्रिलर जैसी शैलियों में 75 हिन्दी फ़िल्मों में अभिनय किया है।[2][3][4][5] फिल्म उद्योग में उनके योगदान के लिये उन्होंने तीस नामांकनों में से चौदह फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार जीते हैं। वे और दिलीप कुमार ही ऐसे दो अभिनेता हैं जिन्होंने साथ फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार आठ बार जीता है। 2005 में भारत सरकार ने उन्हें भारतीय सिनेमा के प्रति उनके योगदान के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया।
अर्थशास्त्र में उपाधी ग्रहण करने के बाद इन्होने अपने करियर की शुरुआत १९८० में रंगमंचों व कई टेलिविज़न धारावाहिकों से की और १९९२ में व्यापारिक दृष्टी से सफल फ़िल्म दीवाना से फ़िल्म क्षेत्र में कदम रखा। इस फ़िल्म के लिए उन्हें फ़िल्मफ़ेयर प्रथम अभिनय पुरस्कार प्रदान किया गया। इसके पश्च्यात उन्होंने कई फ़िल्मों में नकारात्मक भूमिकाएं अदा की जिनमे डर(१९९३), बाज़ीगर (१९९३) और अंजाम (१९९४) शामिल है। वे कई प्रकार की भूमिकाओं में दिखे व भिन्न-भिन्न प्रकार की फ़िल्मों में कार्य किया जिनमे रोमांस फ़िल्में, हास्य फ़िल्में, खेल फ़िल्में व ऐतिहासिक ड्रामा शामिल है।
उनके द्वारा अभिनीत ग्यारह फ़िल्मों ने विश्वभर में Indian Rupee symbol.svg १ बिलियन का व्यवसाय किया है। खान की कुछ फ़िल्में जैसे दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे (१९९५), कुछ कुछ होता है (१९९८), देवदास(२००२), चक दे! इंडिया (२००७), ओम शांति ओम (२००७), रब ने बना दी जोड़ी (२००८) औररा.वन (२०११) अबतक की सबसे बड़ी हीट फ़िल्मों में रही है और कभी खुशी कभी ग़म (२००१),कल हो ना हो (२००३), वीर ज़ारा (२००६)।
वेल्थ रिसर्च फर्म वैल्थ एक्स के मुताबिक किंग खान पहले सबसे आमिर भारतीय अभिनेता बन गए हैं। फर्म ने अभिनेता की कुल संपत्ति 3660 करोड़ रूपए आंकी है।[6][विकिपीडिया से साभार ]
उनकी फैमिली लाइफ को बर्बाद करने की मीडिया ने बहुत कोशिश की किन्तु सफल नहीं हो पायी ,उनके नाम
 को खत्म करने की आमिर खान ने अपने कुत्ते का नाम शाहरुख़ रख कर एक असफल कोशिश की किन्तु न
 शाहरुख़ के नाम पर कोई बुरा प्रभाव पड़ना था न पड़ा .बॉलीवुड में बहुत से खान आये और चले गए किन्तु
 शाहरुख़ खान ने अपने व्यक्तित्व से वहां वही स्थान बनाया है जो स्थान क्रिकेट में सचिन तेंदुलकर ने बनाया
 है और इस स्थान को शाहरुख़ खान से कोई नहीं छीन सकता .शाहरुख़ खान के जन्मदिन पर हम सभी की
ओर से शुभकामनायें इन्हीं शब्दों में प्रेषित हैं -
''ज़िंदगी की बहार देखो आप ,
  ऐश-ए-लैलो नहार देखो आप ,
  एक ही साल की दुआ कैसी 
  साल ऐसे हज़ार देखो आप .''
शालिनी कौशिक 
    [कौशल ]    

संभल जा रे नारी ....

''हैलो शालिनी '' बोल रही है क्या ,सुन किसी लड़की की आवाज़ मैंने बेधड़क कहा कि हाँ मैं ही बोल रही हूँ ,पर आप ,जैसे ही उसने अपन...