शुक्रवार, 14 अक्तूबर 2016

परिकर जी के लिए तालियां

सर्जिकल स्ट्राइक भारतीय  सेना का एक एेसा कार्य जिस  पर हर भारतीय को गर्व होना चाहिए और जो कि है भी और जिस कार्य के लिए विपक्ष तक ने प्रधानमंत्री तक की तारीफ करने में कोई कोताही नहीं बरती लेकिन सत्ता पक्ष सेना के इस कदम को पूरी तरह अपना कदम साबित करने में जुटा है घमंड रक्षा मंत्री के सिर चढ़कर बोल रहा है वे लगातार ये कहने में लगे हैं कि एेसी सर्जिकल स्ट्राइक पहली बार हुई, जबकि इतिहास गवाह है कि यूपीए के शासन में भी ऐसी सर्जिकल स्ट्राइक होती रही है. भाजपा के सीनियर लीडर अरुण शौरी का ही दावा है कि मनमोहन सिंह ने ६ सर्जिकल स्ट्राइक करके भी लाभ लेने की कोशिश नहीं की थी क्योंकि वह खामोशी से अपना काम करते थे, ढिंढोरा नहीं पीटते थे. 2007,2009,2011,2013,2014और कई बार पहले भी सर्जिकल स्ट्राइक हुई पर मनमोहन सिंह जी ने कभी भी उसका राजनीतिक फायदा लेने की कोशिश नहीं की और वैसे भी ये सेना की वाहवाही है न कि सत्ता पक्ष की ये बात रक्षा मंत्री को समझ लेनी चाहिए और अगर अब भी नहीं समझ पाते तो अपने कार्यकाल की एक शोहरत और स्वीकार लेनी चाहिए जिसमें नागरिकों को ढाल बना फरार हुए आतंकवादी, बारामुला हमले में आतंकियों ने पहली बार किया बोट का इस्तेमाल, क्यूं परिकर जी अब तो पहली बार आपके कार्यकाल के लिए पहली बार तालियां बज ही जानी चाहिए.                                          
  शालिनी कौशिक एडवोकेट 

बुधवार, 12 अक्तूबर 2016

जशोदा बेन भी किसी की बेटी है मोदी जी

लखनऊ में मोदी का संदेश - आतंक की मदद करने और पनाह देने वालों को बख्शा नहीं जाएगा. और एक बार पहले भी बाबा साहब भीम राव अंबेडकर की जयंती पर मोदी जी ने कहा था - कि अत्याचार की कोई भी घटना समाज पर कलंक है. सवाल ये है कि क्या ये बातें मात्र सभाओं में वाहवाही बटोरने तक ही सीमित रहेंगी, क्या ये मात्र वोट जुटाने का साधन ही रहेंगी?                                                                          
  सभा में  मोदी जी जोर शोर से कहते हैं कि जटायु एक स्त्री के सम्मान के लिए एक आताताई से भिड़ गए......... हम राम नही बन सकते तो हम जटायु तो बन ही सकते हैं जबकि अगर हम मोदी जी के जीवन चरित्र पर गौर करें तो उन्हें एेसा कुछ भी करने की आवश्यकता नहीं है उन्हें केवल अपनी पतिव्रता पत्नी जशोदा बेन को एक पत्नी का सम्मान देना है लेकिन हम सब जानते हैं मंच पर खड़े होकर बोलना आसान है, भीड़ में पैसे बांटकर तालियां बजवाना आसान है, सारी दुनिया को जो पता है कि ये एक मां की सन्तान हैं उस माँ से जन्मदिन पर आकर आशीर्वाद लेने का दिखावा करना आसान है लेकिन दुनिया से छिपा हुआ, अपनी जीवन शैली से विपरीत एक साधारण नारी को स्वीकार करना बेहद कठिन, वो तो कांग्रेस के दिग्विजय सिंह जी ने सबके सामने ये सच ला दिया अन्यथा मोदी जी अटल बिहारी वाजपेयी जी से पूरी बराबरी पर आ जाते. अब तो केवल उस दिन का इंतजार है जब ये अपने भीतर के राम को जागृत कर जशोदा बेन को सीता माता की पदवी दें.                                                
  शालिनी कौशिक एडवोकेट

क्या आदमी सच में आदमी है ?

''आदमी '' प्रकृति की सर्वोत्कृष्ट कृति है .आदमी को इंसान भी कहते हैं , मानव भी कहते हैं ,इसी कारण आदमी में इंसानियत ,...