इंडिया वर्सेस एडवेंचर्स मोदी


नई दिल्ली: डिस्कवरी चैनल के एडवेंचर शो 'मैन वर्सेज वाइल्ड (Man VS Wild)' के स्पेशल एपिसोड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi), बेयर ग्रिल्स (Bear Grylls) के साथ जंगल में खतरों से खेलते नजर आएंगे. पीएम नरेंद्र मोदी और बेयर ग्रिल्स (Bear Grylls) का ये स्पेशल एपिसोड उत्तराखंड के जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क (Jim Corbett National Park) में शूट हुआ है. इस शो के जरिए पीएम नरेंद्र मोदी के जीवन का कुछ अलग ही अंदाज देखने को मिलेगा. डिस्कवरी चैनल पर नरेंद्र मोदी का ये स्पेशल एपिसोड 12 अगस्त यानी आज टेलीकॉस्ट होगा. कहा ये जा रहा है कि एपिसोड को लेकर पाकिस्तान के लोगों का दर्द भी छलक रहा है जबकि अगर हम देश के ताज़ा हालात पर गौर फरमाएं तो हमें भी प्रधानमंत्री जैसे प्रमुख पद पर बैठे हुए नरेंद्र मोदी जी का यह सब करना गैर ज़रूरी और देश की आवाम के साथ धोखा नज़र आ रहा है.
         आज के हालात कहें या तब के हालात जब प्रधानमंत्री जी ने मैन वर्सेस वाइल्ड की शूटिंग की, दोनों ही समय में जब इन्हें सेना के, आम जनता के साथ खड़े होना चाहिए था, ये शूटिंग कर रहे थे. मैन वर्सेस वाइल्ड की जब शूटिंग हो रही थी तभी पुलवामा आतंकी हमला हुआ सेना के 42 जवान शहीद हो गए, पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसकी शूटिंग नहीं रोकी, आज जब यह टेलीकास्ट हो रहा है तब देश के हालात क्या हैं ये सभी जानते हैं फिर भी सबूत के बगैर कुछ भी साबित नहीं किया जा सकता इसी मद्देनजर कुछ आज के समाचार अमर उजाला व दैनिक भास्कर से उद्भृत हैं -
देश के कई राज्यों में इस वक्त बाढ़ से बुरा हाल है। कर्नाटक में भी लोग बाढ़ के कारण परेशान हैं। यहां इंसान तो क्या जानवर तक की जान पर खतरा मंडरा रहा है। इसी बीच एक वीडियो सामने आया है। जिसमें दिख रहा है कि बेलगाम की रायबाग तहसील में विशाल मगरमच्छ एक घर की छत पर चढ़ गया है। लोगों ने इस घटना को कैमरे में कैद कर लिया है।

        विशाखापत्तनम में अपतटीय आपूर्ति जहाज (ऑफशोर सप्लाई वेसल) कोस्टल जगुआर जहाज में सोमवार सुबह भीषण आग लग गई। जिसके बाद जहाज में सवार 29 लोगों ने पानी में कूद गए। घटना की जानकारी होने के बाद मौके पर पहुंची भारतीय तटरक्षक बल की टीम ने 28 क्रू मेंबर्स को बचा लिया। इस घटना में एक आदमी का पता नहीं चल सका है जिसकी खोज जारी है।
            उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में रातभर से हो रही बारिश से जलप्रलय जैसी स्थिति पैदा हो गई है। यहां पहाड़ी नदियां और बरसाती नाले उफान पर हैं।
         बड़वानी. नर्मदा का जलस्तर बढ़ने से टापू बने राजघाट में बिजली के खुले तारों की चपेट में आने से सोमवार सुबहदो डूब प्रभावितों की मौत हो गई, वहीं तीन की हालतगंभीर होने पर अस्पताल में भर्ती करवाया गया। लापरवाही के चलते हुए हादसे से गुस्साए लोगों ने शव को नाव में रखकर विरोध प्रदर्शन किया गया। उधर, आंदोलन प्रमुख मेघा पाटकरने इसे बेकसूरों की हत्या बताते हुएआंदोलन तेज करने की सरकार को चेतावनी दी है।
        जानकारी के अनुसार सोमवार सुबह राजधाट के 5 डूब प्रभावित नाव से खाना लेकर जा रहे थे, तभी उनकी नावबिजली के खुले तारोंकी चपेट में आ गई। बिजली का झटका लगने से नाव में सवारराजघाट निवासी चिमन पिता नटवर दरबार और संतोष पिता लालसिंह की मौत हो गई। हादसे में तीन लाेग झुलस कर घायल हो गए।हादसे की सूचना के बाद पुलिस और प्रशासन के अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे, जहां उन्हें जनता के रोष का सामना करना पड़ा। लोगों का आरोप है कि प्रशासन की लापरवाहीं के चलते यह हादसा हुआ है।
         देश के ऐसे हालात में क्या कोई इस तरह के एडवेंचर की सोच सकता है जिस तरह के एडवेंचर दिखा कर मोदी अपनी विशिष्ट पहचान बनाना चाहते हैं. बॉलीवुड सितारों से मिलना हो तो मोदी जी के पास समय है देश के किसानों व सेवानिवृत्त जवानों को समय की कमी कह लौटा दिया जाता है, इंटरव्यू देना हो तो करण थापर को दोस्ती बनी रहे कहकर इंटरव्यू रोक अक्षय कुमार जिनका पत्रकारिता से दूर दूर का कोई रिश्ता नहीं को इंटरव्यू दिया जाता है, ट्विटर पर अपनी सक्रियता दिखानी हो तो ट्विंकल खन्ना के ट्वीट पढ़कर दिखाई जाती है और भी बहुत कुछ ऐसा है जो मोदी जी की विशिष्टता ज़ाहिर करता है पहले के सभी प्रधानमंत्रियों से क्योंकि पहले के जितने भी प्रधानमंत्री हुए हैं वे मोदी जी के अनुसार उस विशिष्ट प्रतिभा के धनी नहीं थे जिससे मोदी जी सराबोर हैं.
            ये भारत देश का गौरव है कि यहां नेहरू, इंदिरा, राजीव सभी को भुला दिया जाएगा क्योंकि ये एक वंश परंपरा से जुड़े हुए हैं और इनके वंशजों के पास आज वह वाक चातुर्य नहीं है जिसके धनी मोदी जी हैं और रही वह जनता जिसके लिए ये लोग अपना बलिदान दे गए उस जनता में वह कृतज्ञता नहीं और कुछ जनता का स्वार्थ जिसकी पूर्ति वह वर्तमान सरकार में देखती है और पुराने किए को भुला देती है, वैसे भी ये तो सर्वविदित है कि नीव का पत्थर कोई नहीं देखता सभी को कंगूरे की ईंट ही नज़र आती है.
           आज तो स्थिति ये है कि मोदी जी जो करते हैं वहीं विशेषण बन जाता है, जो आजतक किसी प्रधानमंत्री की हिम्मत नहीं हुई वह हिम्मत मोदी जी ने दिखाई, अनुच्छेद 370 व 35 A को हटाकर कश्मीर की जनता को स्वयं मोदी जी के अनुसार, आज़ादी दिलाई, पर सवाल ये है कि ये कैसी आज़ादी है जो कश्मीर की जनता को अनुच्छेद 370 से निकाल कर धारा 144 व सेना की छाया में खड़ा कर देती है, अगर मोदी जी वास्तव में एडवेंचर पसंद करते हैं तो एक बार वहां से धारा 144 हटाएं, सेना हटाएं व कर्फ्यू से कश्मीर को मुक्त कर जनता के बीच जाएं, अब साहसी प्रधानमंत्री मोदी जी का कश्मीर की जनता के प्रति इतना फर्ज़ तो बनता है.
शालिनी कौशिक एडवोकेट
(कौशल)

टिप्पणियाँ

आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (14-08-2019) को "पढ़े-लिखे मजबूर" (चर्चा अंक- 3427) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
Ravindra Singh Yadav ने कहा…
आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" में मंगलवार 13 अगस्त 2019 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!



सूचना में देरी के लिये क्षमा करें।

सधन्यवाद।
India Support ने कहा…
Ration Card
आपने बहुत अच्छा लेखा लिखा है, जिसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद।

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