इस तरह से नहीं बचेगी दुनिया
आग बरस रही है पिछले डेढ़ महीने से पूरे उत्तर भारत में और आगे भी जो समाचार आ रहे हैं उनमे भी गर्मी से राहत की कोई खबर नहीं आ रही है. दिल्ली में लू का ओरेंज एलर्ट जारी किया गया है, आम जनता से घरों के अंदर रहने के लिए कहा जा रहा है, ज्यादा से ज्यादा पानी पीते रहें - फलां फलां निवेदन किए जा रहे हैं जो कि धरातल पर पूरे किए जाने मे लगभग असंभव है. तेज झुलसाने वाली धूप से, गर्मी से सब परेशान हैं किन्तु एक भी आवाज इसके मूल कारण को सामने लाने के लिए नहीं उभर रही है और न ही किसी के द्वारा भी सूर्य देव के इस तरह से फट पड़ने की जिम्मेदारी उठाई जा रही है. बस इतना है कि कहीं हाईवे निर्माण के नाम पर तो कहीं कांवड़ मार्ग बनाए जाने के लिए करोड़ों पेड़ों की अन्धाधुन्ध कटाई जारी है. नेचर जर्नल के अध्ययन में वृक्ष आवरण हानि की वर्तमान और ऐतिहासिक दरों का अनुमान लगाया गया है। इसमें कहा गया है कि 12,000 साल पहले कृषि की शुरुआत के बाद से दुनिया भर में पेड़ों की संख्या में 46 प्रतिशत की गिरावट आई है और हर साल 15 अरब से अधिक पेड़ काटे जाते हैं। प्रतिदिन लगभग 42,000,0...