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महिला आरक्षण की आड़ में अधिवक्ता एकता पर कुठाराघात -शालिनी कौशिक एडवोकेट

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 माननीय उच्चतम न्यायालय ने पूरे देश के ज़िला जजों को अपने अधिकार क्षेत्र के तहत आने वाले बार एसोसिएशनों की एग्जीक्यूटिव कमेटियों/गवर्निंग बॉडीज़ में महिला सदस्यों को नॉमिनेट करने का अधिकार दिया, ताकि उनमें 30 प्रतिशत महिलाओं के प्रतिनिधित्व का मानदंड पूरा हो सके।     स्पष्ट तौर पर यदि सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय की तह में हम जाते हैँ तो यह निर्णय महिला अधिवक्ताओं के बार एसोसिएशन में प्रतिनिधित्व के मानदंड की पूर्ति करने से कहीं ज्यादा बेंच के अधिवक्ता संग़ठन में अनधिकृत हस्तक्षेप को साबित कर रहा है.      बार एसोसिएशन में आज तक जो भी अधिवक्ता पदाधिकारी या सदस्य होते आ रहे हैं वे चुनाव लड़कर ही आते हैँ, किसी तरह का कोई आरक्षण यहाँ लागू नहीं किया जाता है. महिला अधिवक्ताओं को कार्यकारिणी में आने से रोकने का तो कोई एजेंडा किसी एसोसिएशन में लाया ही नहीं जाता, जो भी महिला अधिवक्ता चुनाव लड़कर पदाधिकारी या सदस्य बनना चाहती है वह चुनाव लड़कर एसोसिएशन में पद धारण कर सकती है स्वयं मैंने ही 2018 में निर्विरोध रहकर और 2020 में 18 वोट से जीतकर बार एसोसिएशन कैराना में कन...

अब गैस भी साथ छोड़ गई -लघुकथा

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      और बाउजी कैसे हो.......... संजय के मुंह से ये सुनते ही नरेंद्र बाउजी के दिल का गुबार सा फूट पड़ा..... एकदम बोले  "अब तक ठीक थे." क्यूँ! अब क्या हुआ? संजय ने पूछा  कुछ नहीं भाई, खाने के लाले पड़ गए -लगभग रोते हुए बाउजी बोले. क्यूँ! बिजनेस में घाटा हो गया क्या -संजय ने चिंतित होते हुए पूछा. अरे नहीं! गैस खत्म हो गई -बाउजी ने बताया. तो इतना दुखी क्यूँ हो? ये चिंता तो भाभीजी की है ना. मैं मानता हूँ कि आप घर के आदमी हो इसलिए सामान लाना आपकी जिम्मेदारी है, पर गैस तो भोजन, चाय आदि बनाने के काम आती है और ये काम भाभीजी का होने के कारण ये उनकी समस्या है -संजय ने बाउजी को थोड़ी राहत की सांस दिलाने के लिए कहा. नहीं संजय भाई! शुरू से घर का खाने आदि का काम मैं ही देखता आया हूँ, तेरी भाभीजी को तो अपने क्लब, किटी पार्टी से ही कभी फुर्सत नहीं रही, बस राहत यह थी कि गैस पर आराम से काम कर लेता था..... पर अब गैस भी साथ छोड़ गई-माथा पकड़ते हुए बाउजी बोले. अब संजय के पास पिछली गली से खिसकने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था. द्वारा  शालिनी कौशिक  एडवोकेट  कैराना (शामली )...

........तब त्रेतायुग ही दिखता है.

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  एक समय था  जब हिन्दू  ब्राह्मण राजा  रावण से  अपनी पत्नी को छुड़ाने के लिए  वनवासी राम को  लंका पर चढ़ाई  करनी पड़ी  और एक  आज का समय है  हिन्दू ह्रदय  सम्राट से  गौमाता को राजमाता  का दर्जा दिलाने  के लिए  शंकराचार्य  अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को  धर्मयुद्ध की  घोषणा करनी पड़ी  कौन कहता है  हम नये समय में हैँ  जब हिन्दू ही हिन्दू से  लडता है  तब त्रेतायुग ही  दिखता है. जय श्री राम की 🚩 जय शंकराचार्य की.🚩 🌹🌹गौमाता को राजमाता का  दर्जा दिलाकर रहेगा 🌹🌹 ये ब्राह्मण का संकल्प है ,  किसी से नहीं डरेगा 🚩🚩 हर हर महादेव 🚩 जय जय श्री राम 🚩 शालिनी कौशिक  एडवोकेट  कांधला (शामली )

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज जी को कांधला शामली से मिला समर्थन

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  उत्तर प्रदेश के शामली जिले का प्रमुख कस्बा कांधला, जो कि आरम्भ से धर्मनगरी के रूप में विख्यात रहा है, महाभारत काल में महाराज कर्ण के दल के ठहरने के स्थल होने के कारण इसका नाम कर्णदला  पड़ा जो कि कालांतर में कांधला के नाम से विश्व विख्यात हुआ. कांधला कस्बे की विशेषता यह है कि इसके चारों कोनों पर शिवालय स्थापित हैँ. जहाँ इसके उत्तर में वर्ष 1800 ईस्वी से पुरसी वाड़ा पंजाब से आये पंडित रामचंद्र के तीन पुत्रों हकीम शिवनाथ, पंडित शिवप्रसाद और पंडित शिवसिंह जी ने सिद्धपीठ पुश्तैनी शिवालय अंदोसर मंदिर कांधला की स्थापना की, वहीं इसके दक्षिण और पश्चिम में मराठो द्वारा मराठा वाला मंदिर और नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर की स्थापना की गई और पूर्व में प्राचीन सूरजकुण्ड मंदिर भी शिव के पवित्र शिवालय के रूप में विख्यात है. आरम्भ से साधु संतों का कांधला नगरी में आगमन होता रहा और कांधला के सनातन धर्मावलंबियों द्वारा रात दिन उनकी आवभगत सेवा सत्कार में एक कर दिया गया.शिवाला हकीम शिवनाथ अंदोसर मंदिर कांधला की तो पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में प्रसिद्धि ही साधु संतों के स्वागत हेतु स्थापित मुसाफिरखानों औ...