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वैलेनटाइन /मीडिया /आलेख शालिनी कौशिक लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

तेजाबी गुलाब है मीडिया का वैलेनटाइन

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  ''गूंजे कहीं शंख कहीं पे अजान है ,                                 बाइबिल है ,ग्रन्थ साहब है,गीता का ज्ञान है , दुनिया में कहीं और ये मंजर नहीं नसीब ,   दिखलाओ ज़माने को ये हिंदुस्तान है .''  ऐसे हिंदुस्तान में जहाँ आने वाली  पीढ़ी के लिए आदर्शों की स्थापना और प्रेरणा यहाँ के मीडिया का पुनीत उद्देश्य हुआ करता था .स्वतंत्रता संग्राम के समय मीडिया के माध्यम से ही हमारे क्रांतिकारियों ने देश की जनता में क्रांति का बिगुल फूंका था .आज जिस दिशा में कार्य कर रहा  हैं वह कहीं से भी हमारी युवा पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक व् प्रेरक नहीं कहा जा सकता .आज १४ फरवरी वेलेंटाइन डे के नाम से विख्यात है .एक तरफ जहाँ इस दिन को लेकर युवाओं के दिलों की धडकनें तेज़ हो रही हैं वहीँ दूसरी ओर लाठियां और गोलियां भी चल रही हैं और इस काम में बढ़ावा दे  रहा है हमारा मीडिया -आज का मीडिया .      जहाँ एक ओर मीडिया की सुर्खियाँ हुआ करती थी - ''जो भरा नहीं है भावों से बहती जिसमे रसधार नहीं ...