''पता है ६ दिसंबर करीब है ''
''पानी की तरह बहता है सड़कों पे रात-दिन , इंसां के खून की कोई कीमत नहीं रही .'' 'इरफ़ान कामिल 'का लिखा यह शेर साध्वी निरंजन ज्योति के दिल्ली में जनसभा के दौरान किये गए कथन में समाये उनके आशय को साबित करने हेतु पर्याप्त है .खाद्य एवं प्रसंस्करण राज्य मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति के अमर्यादित बोल संसद के दोनों सदनों में कोहराम मचाते हैं और राजनीतिक कार्यप्रणाली के रूप में विपक्ष् उन पर कार्यवाही चाहता है ,उनका इस्तीफा चाहता है और उन पर एफ.आई.आर. दर्ज़ करने की अपेक्षा रखता है और सत्ता वही पुराने ढंग में घुटने टेके खड़ी रहती है . अपने मंत्री के माफ़ी मांगने को आधार बना उनका बचाव करती है जबकि साध्वी निरंजन ज्योति ने जो कुछ कहा वह सामान्य नहीं था .भारतीय कानून की दृष्टि में अपराध था .वे दिल्ली की एक जनसभा के दौरान लोगों को ''रामजादे-हरामजादे में से एक को चुनने को कहती हैं '' वे कहती हैं -''कि दिल्ली विधानसभा चुनावों में मतदाताओं को तय करना है कि वह रामजादों की सरकार बनायेंगें या हरामजादों की .''राम के नाम पर ६ दिसंबर १९९२ क...