जनता अधिवक्ता जिंदाबाद का नारा बुलंद हो 🇮🇳
वेस्ट यू पी हाई कोर्ट बेंच एक ऐसा मुद्दा है जिसे लेकर अब वेस्ट यू पी के वकील भी यह विश्वास करने से बच रहे हैं कि यह कभी भी सफल होगा क्योंकि अगर देखा जाए तो इस आंदोलन को लेकर सरकार का रवैय्या तो भेदभावपूर्ण रहा ही है साथ ही, अधिवक्ता भी इसे लेकर बंटे हुए ही नजर आए हैं क्योंकि अधिवक्ताओं का एक वर्ग इसे अपने लिए और अपने क्षेत्र के निवासियों के लिए हितकारी मानता है मगर एक वर्ग ऐसा भी है जो देखता है कि अगर वेस्ट यू पी में हाई कोर्ट बेंच स्थापित हो गयी तो इससे उनके काम पर फर्क़ पड़ेगा और मुवक्किल हाई कोर्ट में कार्यरत वकीलों को उनसे ऊपर तरजीह देगा और अपनी इसी सोच को लेकर वह आंदोलन के लिए उपेक्षित रवैय्या रख असहयोगी मुद्रा को अपनाए हुए है किन्तु यह असहयोगी अधिवक्ता वर्ग आन्दोलन की अब तक की असफलता के लिए उतना जिम्मेदार नहीं है जितना जिम्मेदार आंदोलन में लगा हुआ अधिवक्ता वर्ग है क्योंकि उसके द्वारा आंदोलन के लिए बहुत से जरूरी कदम आज तक उठाए ही नहीं गए हैं जिनका उठाया जाना आंदोलन के लिए न केवल जरूरी बल्कि परमावश्यक भी है. ...