शाईस्तगी को भूल ये सत्ता मद में चूर हैं ,
तानेज़नी पुरजोर है सियासत की गलियों में यहाँ , ताना -रीरी कर रहे हैं सियासतदां बैठे यहाँ . .................................................... इख़्तियार मिला इन्हें राज़ करें मुल्क पर , ये सदन में बैठकर कर रहे सियाहत ही यहाँ . ..................................... तल्खियाँ इनके दिलों की तलफ्फुज में शामिल हो रही , तायफा बन गयी है देखो नेतागर्दी अब यहाँ . .............................................. बना रसूम ये शबाहत रब की करने चल दिए , इज़्तिराब फैला रहे ये बदजुबानी से यहाँ . ..................................................... शाईस्तगी को भूल ये सत्ता मद में चूर हैं , रफ्ता-रफ्ता नीलाम हशमत मुल्क की करते यहाँ . ............................................................. जिम्मेवारी ताक पर रख फिरकेबंदी में खेलते , इनकी फितरती ख़लिश से ज़ाया फ़राखी यहाँ . ............................................