विभीषण अब भी हैं
देश में इस वक़्त चारों तरफ एक मुद्दा गर्म है और वह है लोकतंत्र में खतरे का और खतरा कैसा? वैसा ही जैसा हमारे माननीय चार न्याधीशों ने हमें बताया है ,चलिए मान लेते हैं कि लोकतंत्र खतरे में है और मानना सामान्यतः थोड़े ही है विशेष रूप से क्योंकि संविधान ने हमारे देश में सुप्रीम कोर्ट को लोकतंत्र के तीन प्रमुख स्तम्भों में से वरिष्ठ स्तम्भ का दर्जा दिया है और इसकी बागडोर सँभालने वाले चार न्यायाधीश ही जब यह कहने लगें कि लोकतंत्र खतरे में है तो न मानने लायक कुछ रह ही नहीं जाता .हमारे चारों ये न्यायाधीश सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश हैं और ऐसा ये केवल कल्पना से नहीं कह रहे वरन अपनी आत्मा की आवाज़ पर ही कह रहे हैं .उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ इन्होने मोर्चा खोला है और ऐसा करते वक्त इनकी जो बात सबसे ज्यादा ध्यान देने लायक है वह यह है कि ''हम नहीं चाहते कि 20 साल बाद कोई यह कहे कि हमने अपनी आत्मा बेच दी थी .''आज जब दुनिया में सब कुछ बिक रहा है ऐसे घोर कलियुग में न्यायाधीशों का अपनी आत्मा पर कलंक को लेकर सक्रिय होना प्राचीन बहुत कुछ याद दिला रहा है . ...