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दिखावा ही तो है ,,,,

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अरस्तू के अनुसार -''मनुष्य एक सामाजिक प्राणी  है समाज जिससे हम जुड़े हैं वहां रोज़ हमें नए तमाशों के दर्शन होते हैं .तमाशा ही कहूँगी मैं इन कार्यों को जिनकी आये दिन समाज में बढ़ोतरी हो रही है .एक शरीर ,जिसमे प्राण नहीं अर्थात जिसमे से आत्मा निकल कर अपने परमधाम को चली गयी ,को मृत कहा जाता है और यही शरीर जिसमे से आत्मा निकल कर चली गयी बड़ी संख्या में लोगों द्वारा उस आत्मा के ही कारण अंतिम प्रणाम किये जाने को अंतिम दर्शन हेतु रखा जाता है जबकि आत्मा के जाने के बाद शरीर मात्र एक त्यागा हुआ वस्त्र रह जाता है .आत्मा के शरीर त्यागने के बाद जल्दी से जल्दी अंतिम संस्कार की क्रिया को अंजाम दिया जाता है क्योंकि जैसे जैसे देरी होती है शरीर का खून पानी बनता है और वह फूलना  शुरू हो जाता है साथ ही उसमे से दुर्गन्ध निकालनी आरम्भ हो जाती है ..अंतिम संस्कार का अधिकार हमारे वेद पुराणों के अनुसार ज्येष्ठ पुत्र को दिया गया है जिसे कभी कभी संयोग या सुविधा की दृष्टि से कोई और भी अंजाम दे देता है और अंतिम संस्कार करने वाले की वहां उपस्थिति को ऐसी स्थिति को देखते हुए अनिवार्यता कह सकते हैं किन्तु परिवहन ...

वकील ज्यादा समझदार वेस्ट यूपी में

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मेरठ बार एसोसिएशन के शपथग्रहण समारोह में प्रदेश के विधायी एवं न्याय मंत्री बृजेश पाठक ने वेस्ट यूपी में हाईकोर्ट बेंच की मांग का समर्थन किया और कहा कि मुख्यमंत्री से वार्ता कर समाधान निकालेंगे .       बेंच को लेकर 1979 से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अधिवक्ता संघर्षरत हैं और इसके लिए वे अपने आर्थिक हितों को तो दरकिनार कर ही रहे हैं साथ ही जिस जनता के न्याय हित की खातिर वे ऐसा कर रहे हैं उससे ही अपने लिए अनाप-शनाप बातें सुन रहे हैं .       अब तक यह प्रतीत होता था कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अधिवक्ताओं को बेंच के लिए सरकार के समर्थन व् न्याय के लिए दर-दर भटक रही जनता के अपर सहयोग की आवश्यकता है और अगर ऐसा हो जाये तो वेस्ट यूपी में हाईकोर्ट बेंच बनते देर नहीं लगेगी ,लेकिन देर से ही सही परतें खुलने लगी हैं ,वास्तविकता नज़र आने लगी है .         वास्तव में बेंच के लिए आंदोलनरत अधिवक्ताओं में खंडपीठ की स्थापना की जहाँ बात है जैसे कि ''मेरठ '' ,वहां के अधिवक्ता तो जी-जान से जुटे हैं पर उनकी अधीनस्थ व् सहयोगी जिलों की कोर्ट्स के अधिवक्ता इस ...

राष्ट्रीय पुरस्कार :ड्रेस कोड बनाना ही होगा .

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शालीनता भारतीय नारी का सर्वश्रेष्ठ आभूषण रहा है और आजतक भारतीय नारी इस आभूषण को अपने वस्त्रों के चयन के माध्यम द्वारा पूरी दुनिया के समक्ष रख एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत  करती  रही है .देश के बहुत से समारोहों में इस परंपरा का पालन किया जाता रहा है विशेषकर राष्ट्रपति जी द्वारा प्रदत्त पुरस्कारों के अवसर पर .भले ही राष्ट्रपति स्वयं महिला हों वे भी इसी परंपरा को निभाने में ही स्वयं को गौरवान्वित महसूस करती रही हैं - भले ही खेल के मैदान में स्कर्ट पहनने के कारण विवादों से घिरी रही हो लेकिन राष्ट्रपति जी से पुरस्कार लेते समय अपने देश की परंपरा निभाना नहीं  भूलती खिलाडी वर्ग खेल के वक़्त बहुत सी ऐसी वेशभूषा धारण करती हैं जो हमारे देश की संस्कृति के अनुरूप नहीं हैं किन्तु वे वेशभूषाएं खेल के लिए ज़रूरी है तब भी वे पुरस्कार लेते वक़्त एक शालीन वेशभूषा में राष्ट्रपति जी से पुरस्कार लेने के लिए उपस्थित होती हैं - ऐसे ही फिल्मों में दृश्य की मांग पर अभिनेत्रियों को बहुत कुछ ऐसा पहनने की छूट मिली हुई है जो भारतीय संस्कृति के अनुरूप नहीं है लेकिन वहां ये छूट उन्हें देनी पड़ती है...

मीडियाई वेलेंटाइन / तेजाबी गुलाब

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मीडियाई वेलेंटाइन तेजाबी गुलाब                                  १४ फरवरी अधिकांशतया वसंत ऋतू के  आरम्भ का समय है .वसंत वह ऋतू जब प्रकृति  नव स्वरुप ग्रहण करती है ,पेड़ पौधों पर नव कोपल विकसित होती हैं ,विद्या की देवी माँ सरस्वती का जन्मदिन भी धरती वासी वसंत पंचमी को ही मनाते हैं .इस दिन विद्यार्थियों के लिए विद्या प्राप्ति के क्षेत्र में पदार्पण शुभ माना जाता  है.ये सब वसंत के आगमन से या फरवरी के महीने से सम्बन्ध ऐसे श्रृंगार हैं जिनसे हमारा हिंदुस्तान उसी प्रकार सुशोभित है जिस प्रकार विभिन्न धर्मों ,संस्कारों ,वीरों ,विद्वानों से अलंकृत है .यहाँ की शोभा के विषय में कवि लिखते हैं -     ''गूंजे कहीं शंख कहीं पे अजान है ,   बाइबिल है ,ग्रन्थ साहब है,गीता का ज्ञान है , दुनिया में कहीं और ये मंजर नहीं नसीब ,   दिखलाओ ज़माने को ये हिंदुस्तान है .''  ऐसे हिंदुस्तान में जहाँ आने वाली  पीढ़ी के लिए आदर्शों की स्थापना और प्रेरणा यहाँ के मीडिया का...

नारी और आदर :दूर की कौड़ी

 रामायण में लव-कुश रामायण देखी मन विह्वल हो गया और आंसू से भीग गए अपने नयन किन्तु नहीं झुठला सकता वह सत्य जो सीता माता माँ वसुंधरा की गोद में जाते हुए कहती हैं - ''माँ ! मुझे अपनी गोद में ले लो ,इस धरती पर परीक्षा देते देते मैं थक गयी हूँ ,यहाँ नारी का आदर नहीं हो सकता .'' एक सत्य जो न केवल माता सीता ने बल्कि यहाँ जन्म लेने वाली हर नारी ने भुगता है .एक परीक्षा जो नारी को कदम कदम पर देनी पड़ती है किन्तु कोई भी परीक्षा उसे खरा साबित नहीं करती बल्कि उसके लिए आगे का मार्ग और अधिक कठिन कर देती है . माता सीता ने जो अपराध नहीं किया उसका दंड उन्हें भुगतना पड़ा .लंकाधिपति रावन उनका हरण कर ले गया और उन्हें ढूँढने में भगवान राम को और रावन का वध करने में जो समय उन्हें लगा वे उस समय में वहां रहने के लिए बाध्य थी इसलिए ऐसे में उन्हें वहां रहने के लिए कलंकित करना पहले ही गलत कृत्य था और राजधर्म के नाम पर माता सीता का त्याग तो पूर्णतया गलत कृत्य ,क्योंकि यूँ तो माता सीता तो देवी थी इसलिए उनका त्याग तो वैसे भी असहनीय ही रहा किन्तु इस कार्य ने एक गलत परंपरा की नीव रखी क्योंकि इ...

मीडिया की तो राम ही भली करें

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मीडिया आजकल क्या कर रहा है किसी की भी समझ में नहीं आ रहा है किन्तु इतना साफ है कि मीडिया अपनी भूमिका का सही निर्वहन नहीं कर रहा है .सच्चाई को निष्पक्ष रूप से सबके सामने लाना मीडिया का सर्वप्रमुख कार्य है किन्तु मीडिया सच्चाई को सामने लाता है घुमा-फिरा कर .परिणाम यह होता है कि अर्थ का अनर्थ हो जाता है और समाचार जनता में भ्रम की स्थिति पैदा करता है .अभी २ दिन पहले की ही बात है लालू यादव ने राहुल गांधी की रैली में शामिल होने से इंकार किया तो समाचार प्रकाशित किया गया अमर उजाला दैनिक के मुख्य पृष्ठ ३ पर जो कि १ व् २ पेज पर विज्ञापन के कारण नंबर ३ ही था देखिये- {राहुल की रैली में नहीं जाएंगे लालू पटना। राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी के साथ मंच साझा करने में असमर्थता जाहिर की है। इसलिए वह अपनी जगह अपने छोटे बेटे तेजस्वी यादव को 19 सितंबर को चंपारण में आयोजित राहुल की रैली में भेजेंगे। विस्तृत पेज 14 पर} और वे राहुल गांधी के साथ मंच साझा क्यों नहीं करेंगे इसका कारण छिपाकर पेज १४ पर प्रकाशित किया गया जिसमे इसका मुख्य कारण बताया गया है और वह है लाल...

पुलिस को प्रतिबन्ध का अधिकार नहीं

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हिन्दू धर्मावलम्बी के लिए हर वर्ष कांवड़ यात्रा एक ऐसा धार्मिक समारोह है जिसे लेकर हर उम्र का हिन्दू धर्मावलम्बी उल्लास व् भक्ति से परिपूर्ण रहता है और पुलिस प्रशासन के लिए यह समय बहुत अधिक मुस्तैदी से कार्य करने का होता है क्योंकि ज़रा सी चूक बड़े बवाल को जन्म देती है और यही हुआ है मुरादाबाद मंडल में जहां कांवड़ के बेड़ों से डीजे उतारने पर कटघर में बवाल हो गया - कांवड़ के बेड़ों से डीजे उतारने पर कटघर में बवाल, लाठीचार्ज डीजे पर प्रतिबंध से सुलगा मुरादाबाद मंडल, फोर्स तैनात पुलिस चौकी पर पथराव, पुलिस ने लाठियां भांजकर खदेड़ा, देर रात तक हंगामा अमर उजाला ब्यूरो मुरादाबाद। कांवड़ बेड़ों में डीजे पर प्रतिबंध को लेकर विरोध की चिंगारी पूरे मंडल में फैल गई है। मंगलवार को रामपुर, संभल, अमरोहा और मुरादाबाद में कांवड़ियों व हिंदू संगठनों ने डीजे पर प्रतिबंध के खिलाफ पूरा दिन जगह-जगह जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किए और मुख्यमंत्री के पुतले फूंके। शाम होते-होते ये चिंगारी बवाल में तब्दील हो गई। संभल में पब्लिक ने हाईवे जाम करके हंगामा किया तो मुरादाबाद में कटघर थाने की दस सराय चौकी पर भीड़ ने पथर...

ललित मोदी तो मुझसे भी मिले थे तो क्या .....

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आईपीएल के पूर्व कमिश्नर ललित मोदी का नया खुलासा कांग्रेस आलाकमान की मुश्किलें बढ़ा सकता है। पिछले कई दिनों से अपने बयानों से भाजपा और कांग्रेस नेताओं को परेशान कर रहे मोदी ने शुक्रवार को किए ट्वीट में कहा है कि लंदन में गांधी परिवार से मिलकर उन्हें खुशी होगी। लंदन के एक रेस्‍टोरेंट में प्रियंका गांधी और रॉबर्ट वाड्रा से मैं अलग-अलग मिल चुका हूं। उधर प्रियंका का बयान ये है - कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की बेटी प्रियंका वाड्रा ने इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के पूर्व प्रमुख ललित मोदी से मुलाकात की बात से इनकार किया है। प्रियंका के दफ्तर ने शुक्रवार शाम को एक बयान जारी कर ललित मोदी के इस दावे को खारिज किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि वह प्रियंका और उनके पति रॉबर्ट वाड्रा से लंदन के एक रेस्तरां में मिले थे। सवाल ये उठता है कि ललित मोदी एक भारतीय हैं और ललित कुमार मोदी, (जन्म नवंबर 29, 1963) इंडियन प्रीमियर लीग के अध्यक्ष और कमीशनर, चैंपियंस लीग के अध्यक्ष,BCCI के उपाध्यक्ष और पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं। वह मोदी इंटरप्राइज़ेज़ के अध्यक्ष एवं प्रबंध निर्देशक और गॉडफ्रे फिलिप्...

आज इस दिल को जरा अश्कों से नहलाने दो .

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हरिश्चंद्र ''नाज़'' के ये शब्द आज के एक समाचार पर ध्यान जाते ही मेरे जहन में उभर आये ,शब्द कुछ यूँ थे - ''यूँ गुल खिले हैं बाग़ में ख़ारों के आस-पास , जैसे कि गर्दिशें हों सितारों के आस-पास . रौनक चमन में आ गयी लेकिन न भूलना शायद खिज़ा छुपी हो बहारों के आस-पास .'' और समाचार कुछ यूँ था - ''महंगाई पर काबू पाना सरकार की अहम उपलब्धि -जेटली '' और महंगाई पर काबू पाना ऐसा ही गुल है जो वर्तमान सरकार जैसी खार के पास खिलने की कोशिश में है किन्तु जैसे कि खार में गुल नहीं खिलते ऐसे ही वर्तमान सरकार द्वारा महंगाई पर काबू जैसे गुल खिलाने की आशा ही व्यर्थ है और अरुण जेटली जी को महंगाई काबू में दिख रही है वह महंगाई जो इस वक्त पिछली यू.पी.ए.सरकार की अपेक्षा भी दिनों दिन तरक्की की राहों पर जा रही है .अगर हम अपनी रोज़मर्रा की चीज़ों का ही आकलन करें तो हमें साफ नज़र आता है कि महंगाई की स्थिति क्या है -अरहर की दाल जो इस सरकार से पहले हमें ७२ रूपये किलो मिल रही थी वह अब १०० रूपये किलो से ऊपर जा रही है .सब्जियां जो पहले कम भाव पर मिलती दिख जाती थी अब...

इसीलिए है माँ बेटी की दुश्मन

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बेटी का जन्म पर चाहे आज से सदियों पुरानी बात हो या अभी हाल-फ़िलहाल की ,कोई ही चेहरा होता होगा जो ख़ुशी में सराबोर नज़र आता होगा ,लगभग जितने भी लोग बेटी के जन्म पर उपस्थित होते हैं सभी के चेहरे पर मुर्दनी सी ही छा जाती है.सबसे ज्यादा आश्चर्य की बात यह है कि बेटी का जन्म सुनकर उसे जन्म देने वाली माँ भी ख़ुशी के पल से दूर नज़र आती है और मर्दों के इस समाज द्वारा यह ठीकरा माता उर्फ़ नारी के सिर पर ही फोड़ दिया जाता है कि माँ स्वयं नारी होकर भी बेटी अर्थात नारी का जन्म नहीं चाहती इसी से यह साबित होता है कि नारी ही नारी की सबसे बड़ी दुश्मन है अब नारी नारी की दुश्मन कैसे है यह मुद्दा तो बहुत लम्बे विचार-विमर्श का है किन्तु माँ स्वयं नारी होकर बेटी अर्थात नारी का जन्म क्यों नहीं चाहती यह मुद्दा अभी की ही एक घटना प्रत्यक्ष रूप में साबित करने हेतु पर्याप्त है - [शर्मनाक: बेटी पैदा हुई तो पत्नी को निर्वस्त्र कर छत पर घुमाया-अमर उजाला से साभार ] एक तरफ केंद्र सरकार देश में बेटी बचाओ अभियान चला रही है, तो दूसरी तरफ एक मां के लिए बेटी पैदा करना अभिशाप बन गया। इसके लिए वह पिछले चार साल से पति की ...

नारी शक्ति का स्वरुप--कमजोरी केवल भावुकता/सहनशीलता

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 ये सर्वमान्य तथ्य है कि महिला शक्ति का स्वरुप है और वह अपनों के लिए जान की बाज़ी  लगा भी देती है और दुश्मन की जान ले भी लेती है.नारी को अबला कहा जाता है .कोई कोई तो इसे बला भी कहता है  किन्तु यदि सकारात्मक रूप से विचार करें तो नारी इस स्रष्टि की वह रचना है जो शक्ति का साक्षात् अवतार है.धेर्य ,सहनशीलता की प्रतिमा है.जिसने माँ दुर्गा के रूप में अवतार ले देवताओं को त्रास देने वाले राक्षसों का संहार किया तो माता सीता के रूप में अवतार ले भगवान राम के इस लोक में आगमन के उद्देश्य को  साकार किया और पग-पग पर बाधाओं से निबटने में छाया रूप  उनकी सहायता की.भगवान विष्णु को अमृत देवताओं को ही देने के लिए और भगवान् भोलेनाथ  को भस्मासुर से बचाने के लिए नारी के ही रूप में आना पड़ा और मोहिनी स्वरुप धारण कर उन्हें विपदा से छुड़ाना पड़ा.    हम...

एन.जी.टी.सुधारेगा लातों के भूतों को

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NGT announces Rs 5,000 fine for open burning of leaves, garbage in Delhi Zee Media Bureau/Salome Phelamei New Delhi: Stepping up its effort to curb pollution, the National Green Tribunal (NGT) on Tuesday announced a fine of Rs 5,000 on individuals spotted burning garbage, leaves, plastic, rubber etc in open areas in parts of Delhi and the National Capital Region (NCR). एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए मंगलवार २८ अप्रैल को राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने कचरा ,पत्तियां ,प्लास्टिक व् रबर इत्यादि को खुले में जलाये जाने पर दिल्ली व् एन.सी.आर.में  ५००० रूपये का जुर्माना लगाया है .एक स्वस्थ पर्यावरण के लिए यह एक सराहनीय व् समय के अनुसार उपयोगी कदम है क्योंकि आज स्थिति ये आ गयी है कि अगर कोई भी काम सफलतापूर्वक किया जाना है तो उसके लिए जनता व् सम्बंधित विभाग को जुर्माने की चपेट में लेना ही होगा क्योंकि यहाँ अब एक ही कहावत के अनुसार काम किया जा सकता है और वह है ''लातों के भूत बातों से नहीं मानते '' और ऐसे लातों के भूत हमें आज अपने आस पास बहुसंख्या में दिखाई देते हैं .जहाँ तहा...

नारी स्वयं मर्द से गर्दन कटवाने को तैयार

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जेसिका के हत्यारे मनु शर्मा ने रचाई शादी [अमर उजाला से साभार ]   जेसिका लाल मर्डर केस में उम्रकैद की सजा काट रहा हत्यारा मनु शर्मा (सिद्धार्थ वशिष्ठ) ने मुंबई की लड़की से शादी रचा ली। ये समाचार आज चर्चा का विषय है और कल को एक आम बात हो जायेगा .जब मैं इस विषय पर लिखने चली तो मेरे इस कदम पर खुद मैं ही अपने पक्ष में नहीं थी कि आखिर क्या एक हत्यारे को शादी का अधिकार नहीं है ? जब भारत का उच्चतम न्यायालय किसी के क़त्ल में सजा काट रहे अपराधी को यह हक़ देता है तब मैं इसका विरोध करने वाली भला कौन होती हूँ ? किन्तु मेरे दिमाग में तब मात्र मनु शर्मा नहीं था वरन ऐसे सब पुरुष थे जो कभी प्रेम में तो कभी दहेज़ के लिए पागल होकर अपनी प्रेमिका या पत्नी की हत्या कर देते हैं और इस सबके बावजूद उनके लिए रिश्तों की कोई कमी नहीं होती बल्कि उनके लिए लड़कियों की लाइन ही लगी रहती है और ऐसा तब है जब इस देश में लड़कियों का प्रतिशत लड़कों की तुलना में बहुत कम है .      हत्या बहुत खौफनाक वारदात होती है और इसीलिए इसकी सजा फांसी या आजीवन कारावास हमारे देश के कानून ने दी है और इससे भी ख...

गजेन्द्र की मौत के लिए पुलिस ,मीडिया ,मोदी सरकार और हम सब जिम्मेदार

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नेता और उनकी कार्यप्रणाली हमेशा से विवादास्पद रहे हैं और यही हो रहा है इस वक़्त आप की रैली के दौरान दौसा के किसान गजेन्द्र के द्वारा फांसी लगाने पर ,लेकिन क्या हम अक्ल के अंधे नहीं कहे जायेंगे अगर हम वास्तविक स्थितियों को नज़रअंदाज़ कर बेवजह का दोषारोपण आरम्भ कर देते हैं .दिल्ली में आप की किसान रैली के दौरान जितनी संख्या में नेता थे उससे कहीं अधिक संख्या में मीडिया कर्मी और पुलिस वाले थे और गजेन्द्र वहां जो कुछ भी कर रहा था उससे परिचित मीडिया वाले भी थे और पुलिस वाले भी इसका जीता जगता उदाहरण समाचारपत्रों में प्रकाशित ये समाचार और चित्र हैं - मरने दो साले को! गजेंद्र को पेड़ पर झूलते देख एक पुलिस अधिकारी के मुंह से ये शब्द निकले थे।[ [अमर उजाला से साभार]   [दैनिक जनवाणी से साभार] समाचार और चित्र वहां के परिदृश्य व सही घटनाक्रम को हम लोगों के दिमाग में सही रूप में प्रस्तुत करने के लिए काफी हैं और ये स्पष्ट कर रहे हैं कि कहीं से भी इस घटनाक्रम के जिम्मेदार आप पार्टी के कार्यकर्ता व नेता नहीं हैं.दैनिक जनवाणी अपनी रिपोर्ट में कहता है -''आप के नेताओं व् कार्यकर्ताओं ने उसे न...