नारी से भी वही मिलेगा जो तुम दोगे साथ निभाकर .
आज करूँ आगाज़ नया ये अपने ज़िक्र को चलो छुपाकर , कदर तुम्हारी नारी मन में कितनी है ये तुम्हें बताकर . ................................................................................................................ जिम्मेदारी समझे अपनी सहयोगी बन काम करे , साथ खड़ी है नारी उसके उससे आगे कदम बढाकर . ............................................................................... बीच राह में साथ छोड़कर नहीं निभाता है रिश्तों को , अपने दम पर खड़ी वो होती ऐसे सारे गम भुलाकर . ................................................................................................................. कैद में रखना ,पीड़ित करना ये न केवल तुम जानो , जैसे को तैसा दिखलाया है नारी ने हुक्म चलाकर . ............................................................................................................ धीर-वीर-गंभीर पुरुष का हर नारी सम्मान करे , आदर पाओ इन्हीं गुणों को अपने जीवन में अपनाकर . ..............................................................................