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झुका दूँ शीश...... पितृ दिवस के अवसर पर

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झुका दूं शीश अपना ये बिना सोचे जिन चरणों में , ऐसे पावन चरण मेरे पिता के कहलाते हैं . ...................................................................................  बेटे-बेटियों में फर्क जो करते यहाँ , ऐसे कम अक्लों को वे आईना दिखलाते हैं . ............................................................................... शिक्षा दिलाई हमें बढाया साथ दे आगे , मुसीबतों से हमें लड़ना सिखलाते हैं . ......................................................................... मिथ्या अभिमान से दूर रखकर हमें , सादगी सभ्यता का पाठ वे पढ़ाते हैं . ................................................................................... कर्मवीरों की महत्ता जग में है चहुँ ओर, सही काम करने में वे आगे बढ़ाते हैं . .............................................................................. जैसे पिता मिले मुझे ऐसे सभी को मिलें , अनायास दिल से ये शब्द निकल आते हैं . .................................... ...

झुका दूं शीश अपना ये बिना सोचे जिन चरणों में ,[पितृ दिवस पर विशेष]

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झुका दूं शीश अपना ये बिना सोचे जिन चरणों में , ऐसे पावन चरण मेरे पिता के कहलाते हैं . ...................................................................................  बेटे-बेटियों में फर्क जो करते यहाँ , ऐसे कम अक्लों को वे आईना दिखलाते हैं . ............................................................................... शिक्षा दिलाई हमें बढाया साथ दे आगे , मुसीबतों से हमें लड़ना सिखलाते हैं . ......................................................................... मिथ्या अभिमान से दूर रखकर हमें , सादगी सभ्यता का पाठ वे पढ़ाते हैं . ................................................................................... कर्मवीरों की महत्ता जग में है चहुँ ओर, सही काम करने में वे आगे बढ़ाते हैं . .............................................................................. जैसे पिता मिले मुझे ऐसे सभी को मिलें , अनायास दिल से ये शब्द निकल आते हैं . .................................... ...