बैंकों व् डाकघरों को कबाड़घर बनाया इंटरनेट ने
बैंक और डाकघर भारतीय नागरिक के लिए आज एक आवश्यकता बन चुके हैं और भारतीय सरकार ने इनके सञ्चालन में पूरी ईमानदारी बरतते हुए अपनी जिम्मेदारी को निभाया है .आइये पहले नज़र डालें भारत में अब तक की बैंकिंग व् डाकघरों की व्यवस्था पर संक्षेप में - भारत में बैंकिंग https://hi.wikipedia.org/s/xxn मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से भारत की बैंकिंग-संरचना भारत में आधुनिक बैंकिंग सेवाओं का इतिहास दो सौ वर्ष पुराना है। भारत के आधुनिक बैंकिंग की शुरुआत ब्रिटिश राज में में हुई। १९वीं शताब्दी के आरंभ में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने ३ बैंकों की शुरुआत की - बैंक आफ बंगाल १८०९ में, बैंक ओफ़ बॉम्बे १८४० में और बैंक ओफ़ मद्रास १८४३ में। लेकिन बाद में इन तीनों बैंको का विलय एक नये बैंक 'इंपीरियल बैंक' में कर दिया गया जिसे सन १९५५ में ' भारतीय स्टेट बैंक ' में विलय कर दिया गया। इलाहबाद बैंक भारत का पहला निजी बैंक था। भारतीय रिजर्व बैंक सन १९३५ में स्थापित किया गया था और बाद में पंजाब नेशनल बैंक , ...