औरत को जूती पैर की ही माने आदमी
औरत पे ज़ुल्म हो रहे कर रहा आदमी सच्चाई को कुबूलना ये चाहते नहीं , गैरों के कंधे थामकर बन्दूक चलना ये कर रहे हैं काम मगर मानते नहीं ! ......................................................... औरत को जूती पैर की ही माने आदमी सम्मान देने रोग मान पालते नहीं , ये चाहें इसपे बस हुक्म चलाना करना भला इसका कभी विचारते नहीं ! .......................................................... औरत लुटा दे मर्द पर भले ही ज़िंदगी वे रहते हैं कभी किसी मुगालते नहीं , खिदमत हमारी करना औरत की है किस्मत करना है कुछ उसके लिए ये जानते नहीं ! .............................................................. जनम-जनम का साथ है पत्नी पति का मांगती ये पत्नी को दिल में कभी उतारते नहीं , चाह रखके बेटों की ये बेटियां हैं मारती ये बुराई तक माँ के लिए हैं मारते नहीं ! ............................................................. ''शालिनी ''की तड़प का है ना सबूत कोई अपने किये को ये कभी धिक्कारते नहीं , बेटी हो या बहन हो ,ये पत्नी हो या माँ हो अपने को किसी हाल ये सुधारते नहीं ! .............