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अब गैस भी साथ छोड़ गई -लघुकथा

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      और बाउजी कैसे हो.......... संजय के मुंह से ये सुनते ही नरेंद्र बाउजी के दिल का गुबार सा फूट पड़ा..... एकदम बोले  "अब तक ठीक थे." क्यूँ! अब क्या हुआ? संजय ने पूछा  कुछ नहीं भाई, खाने के लाले पड़ गए -लगभग रोते हुए बाउजी बोले. क्यूँ! बिजनेस में घाटा हो गया क्या -संजय ने चिंतित होते हुए पूछा. अरे नहीं! गैस खत्म हो गई -बाउजी ने बताया. तो इतना दुखी क्यूँ हो? ये चिंता तो भाभीजी की है ना. मैं मानता हूँ कि आप घर के आदमी हो इसलिए सामान लाना आपकी जिम्मेदारी है, पर गैस तो भोजन, चाय आदि बनाने के काम आती है और ये काम भाभीजी का होने के कारण ये उनकी समस्या है -संजय ने बाउजी को थोड़ी राहत की सांस दिलाने के लिए कहा. नहीं संजय भाई! शुरू से घर का खाने आदि का काम मैं ही देखता आया हूँ, तेरी भाभीजी को तो अपने क्लब, किटी पार्टी से ही कभी फुर्सत नहीं रही, बस राहत यह थी कि गैस पर आराम से काम कर लेता था..... पर अब गैस भी साथ छोड़ गई-माथा पकड़ते हुए बाउजी बोले. अब संजय के पास पिछली गली से खिसकने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था. द्वारा  शालिनी कौशिक  एडवोकेट  कैराना (शामली )...

........तब त्रेतायुग ही दिखता है.

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  एक समय था  जब हिन्दू  ब्राह्मण राजा  रावण से  अपनी पत्नी को छुड़ाने के लिए  वनवासी राम को  लंका पर चढ़ाई  करनी पड़ी  और एक  आज का समय है  हिन्दू ह्रदय  सम्राट से  गौमाता को राजमाता  का दर्जा दिलाने  के लिए  शंकराचार्य  अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को  धर्मयुद्ध की  घोषणा करनी पड़ी  कौन कहता है  हम नये समय में हैँ  जब हिन्दू ही हिन्दू से  लडता है  तब त्रेतायुग ही  दिखता है. जय श्री राम की 🚩 जय शंकराचार्य की.🚩 🌹🌹गौमाता को राजमाता का  दर्जा दिलाकर रहेगा 🌹🌹 ये ब्राह्मण का संकल्प है ,  किसी से नहीं डरेगा 🚩🚩 हर हर महादेव 🚩 जय जय श्री राम 🚩 शालिनी कौशिक  एडवोकेट  कांधला (शामली )

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज जी को कांधला शामली से मिला समर्थन

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  उत्तर प्रदेश के शामली जिले का प्रमुख कस्बा कांधला, जो कि आरम्भ से धर्मनगरी के रूप में विख्यात रहा है, महाभारत काल में महाराज कर्ण के दल के ठहरने के स्थल होने के कारण इसका नाम कर्णदला  पड़ा जो कि कालांतर में कांधला के नाम से विश्व विख्यात हुआ. कांधला कस्बे की विशेषता यह है कि इसके चारों कोनों पर शिवालय स्थापित हैँ. जहाँ इसके उत्तर में वर्ष 1800 ईस्वी से पुरसी वाड़ा पंजाब से आये पंडित रामचंद्र के तीन पुत्रों हकीम शिवनाथ, पंडित शिवप्रसाद और पंडित शिवसिंह जी ने सिद्धपीठ पुश्तैनी शिवालय अंदोसर मंदिर कांधला की स्थापना की, वहीं इसके दक्षिण और पश्चिम में मराठो द्वारा मराठा वाला मंदिर और नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर की स्थापना की गई और पूर्व में प्राचीन सूरजकुण्ड मंदिर भी शिव के पवित्र शिवालय के रूप में विख्यात है. आरम्भ से साधु संतों का कांधला नगरी में आगमन होता रहा और कांधला के सनातन धर्मावलंबियों द्वारा रात दिन उनकी आवभगत सेवा सत्कार में एक कर दिया गया.शिवाला हकीम शिवनाथ अंदोसर मंदिर कांधला की तो पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में प्रसिद्धि ही साधु संतों के स्वागत हेतु स्थापित मुसाफिरखानों औ...

AI जिंदगी नहीं हो सकती.

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  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 28 दिसंबर को पुलिस को निर्देश दिए कि विदेश से फंडिंग पाने वाले धर्मांतरण गिरोहों को खत्म करने के लिए AI तकनीक, साइबर निगरानी और आधुनिक संसाधनों का इस्तेमाल किया जाए। सोशल मीडिया दुरुपयोग, दुष्प्रचार और अराजकता फैलाने वालों पर त्वरित और कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए. मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि  "धर्मांतरण एक गंभीर समस्या बन चुका है। उन्होंने कहा कि बलरामपुर जैसी घटनाएं बताती हैं कि धर्मांतरण के प्रयास संगठित तरीके से किए जा रहे हैं।" ➡️ बलरामपुर की धर्मान्तरण की घटना विस्तार- बलरामपुर में धर्मांतरण की घटना अवैध धार्मिक रूपांतरण रैकेट से संबंधित है, जिसका कथित मास्टरमाइंड जलालुद्दीन उर्फ 'छंगुर बाबा' है। इस मामले में कई गंभीर आरोप सामने आए हैं और उत्तर प्रदेश एटीएस (ATS), प्रवर्तन निदेशालय (ED), और अन्य केंद्रीय एजेंसियां जांच कर रही हैं।  🌑 मुख्य विवरण: ✒️ मुख्य आरोपी: जलालुद्दीन, जिसे 'छंगुर बाबा' या 'पीर बाबा' भी कहा जाता है, को इस रैकेट का मुख्य सरगना बताया गया है। ✒️ कार्यप्रणाली: आरो...

बन्दर कर रहे नुकसान-जवाबदेही किसकी?

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✒️  सरकार -पेड़ लगाओ देश बचाओ ✒️ पुलिस - सीसीटीवी लगाओ सुरक्षा बढ़ाओ  ✒️ वन विभाग -वन क्षेत्र से बाहर हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं. ✒️ नगरपालिका -बंदर पकड़ना हमें नहीं आता. ✒️ बंदर -हमारे घर छीन लिए गए. ✒️ जनता क्या करे, जब बंदर सब उजाड़ दें. 🌑 रोज घर की दीवारें ठीक करने के लिए राज मिस्त्री बुलाओ. 🌑 रोज बिजली के तार जुड़वाने को बिजली वाले को बुलाओ. 🌑 रोज सीसीटीवी के तार बदलवाओ. 🌑 घर की बड़ी छत खाली होते हुए भी गीले कपड़े नीचे कमरे में फैलाओ, जहाँ गीले कपड़ों का सूखना नामुमकिन है आजकल. 🌑 छत पर सुखाओ तो बंदरों से फड़वाओ. 🌑 या फिर बंदरों से खुद को कटवाकर रेबीज के इंजेक्शन लगवाओ. 🌑 या फिर कैराना की सुषमा चौहान की तरह अपनी जान गँवाओं. 🌑 और भी बहुत कुछ.......के लिए इतना पैसा कहाँ से लाओ? सवाल-  शालिनी कौशिक एडवोकेट,  कैराना (शामली)

शौक से रहिये लिव-इन-रिलेशनशिप में

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  एक महत्वपूर्ण आदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट (सिंगल जज) ने  17 दिसंबर 2025 को कहा कि हालांकि लिव-इन रिलेशनशिप का कॉन्सेप्ट सभी को स्वीकार्य नहीं हो सकता है, लेकिन यह नहीं कहा जा सकता कि ऐसा रिश्ता 'गैर-कानूनी' है या शादी की पवित्रता के बिना साथ रहना कोई अपराध है।  कोर्ट लिव इन रिलेशन को लेकर ऐसे निर्णय आये दिन दे रही हैँ, परिणाम आज ही क्या पुराने समय से लड़कियां भुगत रही हैं  1️⃣ लड़का लड़की बालिग़ होते ही लिव इन रिलेशनशिप में रहना शुरू करते हैँ, कुछ समय तक यह आधुनिकता का नशा, मॉडर्न कहलाने का खुमार लड़का लड़की पर चढ़ा रहता है. 2️⃣ इधर लड़की प्रेग्नेंट होती है, लडके पर से उस लड़की का खुमार उतरता है. 3️⃣ लड़का अपने परिवार के कहने पर रीति रिवाज़ से शादी करता है. 4️⃣ और लड़की अपने बच्चे के साथ कोर्ट के चक्कर काटती है.      ये है आज का आधुनिक समाज और उसकी खौफनाक सच्चाई, सहमत हों तो वीडियो को लाइक और शेयर करना न भूलें. धन्यवाद 🙏🙏 द्वारा  शालिनी कौशिक  एडवोकेट  कैराना (शामली )

पूंजीवादी पंजे में कैद बार कौंसिल ऑफ़ उत्तर प्रदेश की चुनाव प्रकिया

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         बार कौंसिल ऑफ़ उत्तर प्रदेश के 2025-26 के चुनावों के लिए नामांकन का कार्य आरम्भ हो चुका है. बड़े स्तर पर लगभग 3 महीने से सदस्य पद के प्रत्याशी प्रचार कार्य का श्री गणेश कर चुके हैँ. जगह जगह कचहरी में लगे हुए प्रत्याशियों के पोस्टर इसकी गवाही दे रहे हैँ. उत्तर प्रदेश बार काउंसिल का चुनाव वकीलों के सबसे बड़े लोकतांत्रिक चुनावों में से एक माना जाता है. इस चुनाव में अधिवक्ता केवल एक ही श्रेणी के पद के लिए मतदान करते हैं. ये पद बार काउंसिल के सदस्य होते हैं. प्रदेश में कुल 25 सदस्यों का चुनाव किया जाता है.       मतदाता अधिवक्ताओं का सीधा वोट सिर्फ बार काउंसिल के सदस्यों के लिए ही डाला जाता है. अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के लिए अलग से चुनाव नहीं होता.प्रदेश भर के वकीलों को अपनी सर्वोच्च संस्था के लिए अध्यक्ष या उपाध्यक्ष प्रत्यक्ष रूप से चुनने का अधिकार नहीं होता. चुने गए 25 सदस्य ही अपने बीच वोटिंग कर दोनों पदों का चयन करते हैं. बार काउंसिल में चेयरमैन, वाइस चेयरमैन, अनुशासन समितियों के चेयरपर्सन, वित्त, चुनाव, नामांकन और कल्याण जैसी स्थायी समिति...