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लाला जी की समझौता एक्सप्रेस-एक लघु कथा

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  नेवी ब्लू सफारी सूट वाले लाला जी एक मामले में पायजामा कुर्ता पहनने वाले लाला जी का समझौता कराने चले, रास्ते में सूट वाले लाला जी पायजामा कुर्ते वाले लाला जी से थोड़ी देर जाकर उनके विपक्षी को फोन कर बोले - "बेटे! मैं उसके साथ आ जरूर रहा हूं, पर तुम करना वही जो तुम्हें करना है।” द्वारा शालिनी कौशिक एडवोकेट कैराना (शामली) 

अवसरवादी-एक लघु कथा

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  "वकील झूठ बोलते हैं" कहने वाले लाला जी को जब एक सिविल केस में कोर्ट में जाना पड़ा तो अपने वकील की दलीलों पर अपने वकील से हाथ मिलाते हुए बोले "NICE" द्वारा  शालिनी कौशिक  एडवोकेट कैराना (शामली) 

ये है नेपाली परिवार के बचने का असली कारण

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  नेपाल में आए भीषण जलीय प्रलय और फ्लैश फ्लड (अचानक आई बाढ़) के दौरान बिदुर (Bidur) या त्रिशूली/भोटेकोशी नदी घाटी क्षेत्र का एक हल्के हरे (Mint-green) रंग का दो मंजिला कंक्रीट का मकान इंटरनेट पर 'चमत्कारी घर' के रूप में वायरल हुआ है। ⚫ मुख्य विवरण   घटना:  26 अगस्त 2026 को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर टूटने (Glacial Avalanche) के कारण भोटेकोशी और त्रिशूली नदी प्रणालियों में भयंकर सैलाब आया था। ⚫ तबाही का मंज़र:  इस पानी के तेज़ बहाव और मलबे ने आसपास की कई इमारतों, पुलों और वाहनों को ताश के पत्तों की तरह बहा दिया था। ⚫ चमत्कार :  इन सबके बीच हरे रंग का यह मजबूत पक्का मकान अपनी जगह पर पूरी तरह सुरक्षित खड़ा रहा। घर की बालकनी और छत पर फंसे परिवार के सदस्यों का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिन्हें बाद में सुरक्षित बचा लिया गया। ⚫ बचने का कारण:  विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों के अनुसार, इस इमारत का मजबूत आरसीसी (RCC) ढांचा, गहरी और ठोस नींव (Foundation) तथा सही दिशा में बना होना इसके टिके रहने का मुख्य कारण माना जा रहा है। हालांकि किसी आधिकारिक इंजीनियर...

मिठास ही खत्म हो गई

  चींटी बोली आंसू बहाकर  चीनी महँगी हो गई  मतलब  जिंदगी से  मिठास ही  खत्म  हो गई  .........  शालिनी कौशिक  एडवोकेट 

माननीय जस्टिस भंवर सिंह जी ने निभाई स्व. बाबू कौशल प्रसाद एडवोकेट जी से सच्ची मित्रता

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 माननीय जस्टिस भंवर सिंह जी बाबू कौशल प्रसाद एडवोकेट जी से मेरठ कॉलेज मेरठ में एक साल जूनियर थे और कौशल प्रसाद एडवोकेट जी से उनके आधिकारिक सम्बन्ध ही थे, परिवार से उनका कोई जुड़ाव नहीं था. बाबू कौशल प्रसाद एडवोकेट जी की मृत्यु उपरांत उन पर लिखी जाने वालीं पुस्तक के लिए जस्टिस भंवर सिंह जी का मोबाइल नंबर उनकी बेटियों द्वारा वेबसाइट से प्राप्त कर उनसे सम्पर्क किया गया और जब उन्हें पुस्तक के बारे में बताते हुए शुभकामना संदेश हेतु अनुरोध किया गया तो माननीय जस्टिस महोदय द्वारा बाबू कौशल प्रसाद एडवोकेट जी के साथ स्मृति ताजा करने के लिए कुछ जानकारी मांगी गई, तब उनकी बेटियों द्वारा उन्हें निम्न पत्र प्रेषित किये गये, पहले वह जो बाबू कौशल प्रसाद एडवोकेट जी द्वारा उन्हें भेजा गया था - इसके बाद माननीय जस्टिस महोदय द्वारा दिए गए जवाब का पत्र उन्हें भेजा  जिसके बाद माननीय जस्टिस भंवर सिंह जी द्वारा बाबू कौशल प्रसाद एडवोकेट जी की पुत्रियों को धन्यवाद देते हुए शुभकामना संदेश हेतु समय मांगते हुए आशीर्वाद दिया गया -  और उसके बाद माननीय जस्टिस महोदय द्वारा अपना शुभकामना संदेश प्रेषित किया ...

कौशल प्रसाद एडवोकेट

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  बहुत आश्चर्य होता है जब समाचार पत्रों में स्व बाबू कौशल प्रसाद एडवोकेट जी के अधिवक्ता हित और सम्मान में लगाए गए जीवन का महत्व घटाने के लिए बड़प्पन वाले और सीनियर मोस्ट अधिवक्ताओं द्वारा बाबू कौशल प्रसाद एडवोकेट जी की सर्व स्वीकार्यता को घटाने वाले तथ्य प्रस्तुत किए जाते हैं. बाबू कौशल प्रसाद एडवोकेट जी यह सब नहीं जानते थे कि उनके देहावसान के बाद भी उनकी प्रसिद्धि का इतना मलाल रहेगा उनके कथित भाइयों को कि समाचार पत्रों के माध्यम से असत्य फैलाने का कार्य करेंगे, अगर आज के अखबारी तथ्य सही हैं तो बाबू कौशल प्रसाद एडवोकेट जी के समय के इन समाचारों पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए 1-बार संघ कैराना का चुनाव सम्पन्न कैराना, २३ अप्रैल (प्र)। कल दिनांक २१-४-८६ को पूर्व घोषित चुनाव कार्यक्रम के अनुसार बार संघ कैराना के पदाधिकारियों ने कार्य-कारिणी के सदस्यों के चुनाव हेतु नामांकन पत्र दाखिल होने थे । कल सुबह करीब १० बजे पूर्व घोषित - मुख्य चुनाव अधिकारी बाबू श्रीपाल जैन एडवोकेट के अस्वस्थ होने के कारण वीरेंद्र सिंह वर्मा एडवोकेट को मुख्य चुनाव अधिकारी नियुक्त किया गया । नामांकन दाखिल करने से पूर्...

संस्कार मर गए-बेटियों पर भी कैसे करें गर्व?

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  ( संस्कार मर गए-बेटियों पर भी कैसे करें गर्व)  ⚫ सोनीपत (हरियाणा)  ⚫ वृद्धाश्रम में रह रहे बुजुर्ग कपड़ा व्यापारी शिवचरण रतन गुप्ता का निधन.  ⚫ 20 दिनों से बीमार थे.  ⚫ पत्नी थी मीना गुप्ता ⚫ तीन बेटियाँ - अनीता, निशा, प्रिया ⚫ अनीता (नेपाल) निशा (आजमगढ) प्रिया (मुंबई)  ⚫ दो अध्यापिका ⚫ माँ के मरने मे भी नहीं आई थी. ⚫ पिता का अंतिम संस्कार भी वीडियो कॉल से देखा. ⚫ अस्थियों के लिए कहा - जब पिता ही नहीं रहे तो अस्थियां लेकर क्या करेंगे? द्वारा शालिनी कौशिक एडवोकेट कैराना (शामली)