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मेरी माँ - मेरा सर्वस्व

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  वो चेहरा जो         शक्ति था मेरी , वो आवाज़ जो       थी भरती ऊर्जा मुझमें , वो ऊँगली जो      बढ़ी थी थाम आगे मैं , वो कदम जो     साथ रहते थे हरदम, वो आँखें जो    दिखाती रोशनी मुझको , वो चेहरा    ख़ुशी में मेरी हँसता था , वो चेहरा    दुखों में मेरे रोता था , वो आवाज़    सही बातें  ही बतलाती , वो आवाज़    गलत करने पर धमकाती , वो ऊँगली    बढाती कर्तव्य-पथ पर , वो ऊँगली   भटकने से थी बचाती , वो कदम    निष्कंटक राह बनाते , वो कदम    साथ मेरे बढ़ते जाते , वो आँखें    सदा थी नेह बरसाती , वो आँखें    सदा हित ही मेरा चाहती , मेरे जीवन के हर पहलू    संवारें जिसने बढ़ चढ़कर , चुनौती झेलने का गुर      सिखाया उससे खुद लड़कर , संभलना जीवन में हरदम      उन्होंने मुझको सिखलाया , सभी के काम तुम आना     मदद कर खुद था दिखलाया , वो मेरे सुख थे जो सारे    सभी से नाता गया है छूट , वो मेरी बगिया की माली    जननी गयी हैं मुझसे रूठ , गुणों की खान माँ को मैं     भला कैसे दूं श्रद्धांजली , ह्रदय की वेदना में बंध     कलम आगे न अब चली .            शालिनी कौशिक                 [कौशल ]

सत्ता और बर्बादी

 ध्यान से पढ़ें और समझें बहुत समय पहले स्वर्ग में बर्बादी आने वाली थी, उसने इन्द्र देव से रात को सोते से जगाकर कहा कि मैं कल को स्वर्ग में आ रही हूँ, तुम मेरा साथ देना अन्यथा तेरा राज पाट सब नष्ट भ्रष्ट कर डालूंगी, इन्द्र देव स्वर्ग की सत्ता को लेकर बहुत ही चिंतनीय रहते थे ऐसे में उन्होंने बर्बादी से पूछा कि क्या करना होगा, तब बर्बादी ने कहा कि तुम स्वर्ग के निवासियों को बचाने का दिखावा करते रहना, पर करना कुछ भी मत, उनकी भगवान में आस्था को भुनाना और उनसे ताली थाली बजवाना मतलब कि उनका ध्यान कहीं और भटकाने में लगे रहना, जिस समय उन्हें घर की, धन की सबसे ज्यादा जरूरत हो उसी समय तुम स्वर्ग को देवस्थान बनाने के दुखडे रोकर उनका समस्त धन उनसे पल्ला पसार कर मांग लेना. इन्द्र देव द्वारा ऐसा ही करने पर स्वर्ग में बर्बादी ही बर्बादी छा गई, चारों ओर दुर्दशा का गरीबी का माहौल हो गया. जब बर्बादी जाने लगी तो इंद्र देव ने बर्बादी से कहा कि तुमने तो केवल बर्बादी के लिए कहा था, पर यह क्या किया कि स्वर्ग वासियों की तो सारी जिंदगी ही उजाड़ दी तो बर्बादी ने कहा कि मैंने तो केवल बर्बादी को ही कहा था यह थोड़े

#बीसीआई_भेदभाव_बंद_करो

बहुत ही असंतोषजनक बात है कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा पश्चिमी उत्तर प्रदेश से चयनित बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के चैयरमैन श्री रोहिताश्व अग्रवाल जी को बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के पूर्वी उत्तर प्रदेश के खेमे के प्रभाव में कार्य नहीं करने दिया जा रहा है. बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा एक वर्ष के लिए दो अध्यक्ष निर्वाचित होने पर अगर एतराज था तो यह रोक तभी लगाई जानी चाहिए थी जब श्री जानकी शरण पांडेय एडवोकेट जी ने अध्यक्ष पद का कार्यभार संभाला था,  लेकिन उनके कार्यकाल में ऐसी कोई रोक नहीं लगाई गई, उनका कार्यकाल बिना किसी रुकावट के सम्पन्न करा दिया गया, जैसे ही श्री रोहिताश्व कुमार अग्रवाल एडवोकेट जी ने 6.1.2021 को कार्यभार संभाला तभी बार काउंसिल ऑफ इंडिया जागरूक हो गई और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एडवोकेट द्वारा बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष पद सम्भालने पर अपने अनाधिकार एतराज उठाने आरंभ कर दिए, जबकि अगर एक वर्ष में बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के दो अध्यक्ष होना गलत है तो यह एतराज तो 2019 मे ही उठ जाना चाहिए था जब स्व दरवेश यादव एडवोकेट जी और श्री हरिशंकर सिंह जी संयुक्त रूप से बा

प्रियंका - राहुल की मजबूती ही राजीव जी को सच्ची श्रद्धांजलि

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बहुत दुखद है आज का दिन, 21 मई 1991 रात 10.20, एक तरह से खत्म हो गया हमारा राजनीतिक रुझान, राजीव गांधी जी की हत्या कोई साधारण बात नहीं थी, जहां एक तरफ राजीव जी के परिवार का दुख था वहीं दूसरी तरफ ग़म के सागर में डुबो रहा था ऐसा अमानवीय अत्याचार जो राजीव गांधी जैसी शानदार देशभक्त शख्सियत के साथ किया गया था, वर्णन करना बहुत मुश्किल है, राजीव गांधी जी के बारे में कुछ अमूल्य बातेँ जो कि पता चली हैं अमर उजाला से, वही आज यहाँ  प्रकाशित कर रही हूं -  प्रधानमंत्री के तौर पर देश की सेवा करने वाले राजीव गांधी, नेहरू-गांधी परिवार के अब तक के सबसे बाद के सदस्य थे जो राजनीति में इतने शीर्ष तक पहुंचे। राजनीति में आने से पहले वे पेशे से पायलट थे। राजीव को अपने नाना और मां की तरह राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं थी। उन्होंने पायलट बनने से पहले इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने की भी बहुत कोशिश की थी, लेकिन किताबी ज्ञान में सीमित हो जाना उन्हें रास नहीं आया। लंदन में पढ़ाई करने के बाद वे कैंब्रिज के ट्रिनिटी कॉलेज गए। वहां तीन साल पढ़ने के बाद भी उन्हें डिग्री नहीं मिली, फिर उन्होंने लंदन के ही इंपीरियल कॉलेज में म

राजीव गांधी अमर रहें, जय हिंद 🇮🇳

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एक  नमन  राजीव  जी  को  आज उनकी  पुण्यतिथि के  अवसर पर.राजीव जी बचपन से हमारे प्रिय नेता रहे आज भी याद है कि इंदिरा जी के निधन के समय हम सभी कैसे चाह रहे थे कि राजीव जी आयें और प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठ जाएँ क्योंकि ये बच्चों की समझ थी कि जो जल्दी से आकर कुर्सी पर बैठ जायेगा वही प्रधानमंत्री हो जायेगा.तब हमारे दिमाग की क्या कहें वह तो उनके व्यक्तित्व पर ही मोहित था जो एक शायर के शब्दों में यूँ था- लताफत राजीव गाँधी,नफासत राजीव गाँधी , थे सिर से कदम तक एक शराफत राजीव गांधी नज़र आते थे कितने खूबसूरत राजीव गांधी .'' राजीव जी का  जन्म २० अगस्त १९४४ को हुआ था और राजनीति से कोसों दूर रहने वाले राजीव जी अपनी माता श्रीमती इंदिरा जी के  कारण राजनीति में  आये और देश को पंचायत राज और युवा मताधिकार जैसे उपहार उन्होंने दिए .आज  उनकी  पुण्यतिथि के अवसर पर मैं उन्हें याद करने से स्वयं को नही रोक पाई किन्तु जानती हूँ कि राजीव जी भी राजनीति में आने के कारण बोफोर्स जैसे मुद्दे  अपने माथे पर लगाये २१ मई १९९१  को एक आत्मघाती हमले का शिकार होकर हम सभी को छोड़ गए आज भी याद है वह रात जब १०.२० मिन

गांधी परिवार चलाता भाजपा सरकार

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पालघर मॉब लिंचिंग में गिरफ्तार 101 आरोपियों में से कोई भी मुस्लिम नहीं: महाराष्ट्र गृहमंत्री http:// thewirehindi.com/118548/palghar -mob-lynching-none-of-the-accused-arrested-is-muslim-anil-deshmukh/ … via @thewirehindi मुस्लिम समाज भाजपा के हमेशा निशाने पर रहा है और जब जब भाजपा सत्ता में आई है तब तब मुस्लिम समाज का सहमा सहमा रहना ही दिखाई देता है. भारत हिन्दू बहुल देश है किन्तु यहां की संस्कृति हमेशा से वसुधैव कुटुम्बकम की रही है और सत्ता में 70 सालों से रही कॉंग्रेस ने इसी संस्कृति को संजोया है. कॉंग्रेस की बागडोर सम्भालने वाले नेहरू गांधी परिवार के लिए सर्व साधारण के मन में यह विश्वास कायम रहा है कि हमारे हित इस परिवार के रहते हमेशा सुरक्षित हैं और यही बात भाजपा को हमेशा चुभती रही है. भारत हिन्दू धर्म प्रधान देश है और इसी तथ्य को पकड़कर भाजपा ने भारत में अपनी जड़ें ज़माने के लिए हिन्दुओं को लुभाना शुरू किया और अंग्रेजों के डिवाइड एंड रूल सिद्धांत को अपनाया और तोड़ना आरंभ किया इस देश की संस्कृति को, किन्तु जानती थी भाजपा की इस देश को तोड़ना कॉं

सोनिया - राहुल ही भाजपाईयों के निशाने पर

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जगमगाते अपने तारे गगन पर गैर मुल्कों के , तब घमंड से भारतीय सीने फुलाते हैं . टिमटिमायें दीप यहाँ आकर विदेशों से , धिक्कार जैसे शब्द मुहं से निकल आते हैं . .....  नौकरी करें हैं जाकर हिन्दुस्तानी और कहीं , तब उसे भारतीयों की काबिलियत बताते हैं . करे सेवा बाहर से आकर गर कोई यहाँ , हमारी संस्कृति की विशेषता बताते हैं . राजनीति में विराजें ऊँचे पदों पे अगर , हिन्दवासियों के यशोगान गाये जाते हैं . लोकप्रिय विदेशी को आगे बढ़ देख यहाँ , खून-खराबे और बबाल किये जाते हैं. ..........  क़त्ल होता अपनों का गैर मुल्कों में अगर , आन्दोलन करके विरोध किये जाते हैं . अतिथि देवो भवः गाने वाले भारतीय , इनके प्रति अशोभनीय आचरण दिखाते हैं . .......  विश्व व्यापी रूप अपनी संस्था को देने वाले , संघी मानसिकता से उबार नहीं पाते हैं . भारतीय कहकर गर्दन उठाने वाले , वसुधैव कुटुंबकम कहाँ अपनाते हैं भारत का छोरा जब गाड़े झंडे इटली में , भारतीयों की तब बांछें खिल जाती हैं . इटली की बेटी अगर भारत में बहु बने , जिंदादिल हिंद की जान निकल जाती है .