मेरा बचपन
आज बैठे बैठे बचपन की याद आ गयी.शायद मानव जीवन का सबसे खूबसूरत समय यही होता है .मनुष्य जीवन के तनावों से परे यह समय मेरी नज़रों में स्वर्णिम कहा जा सकता है .हरदम रोमांच से भरा बचपन रहा है हमारा बिलकुल वैसे ही जैसे सीमा पर जवानों का रहता है उनको सामना करना होता है पडोसी देश की सेनाओं का तो हमें हरदम सामना करना पड़ता खतरनाक वानर सेनाओं का .होश सँभालते ही बंदरों की फ़ौज मैंने घर में देखी और घर हमारा इतने पुराने समय का बना है कि कहीं कोई रास्ता बंद नहीं था कहीं से भी बन्दर आ जा सकते थे जहाँ चलो ये देखकर चलो कहीं यहीं पर बन्दर बैठा हो . एक बार की बात तो ये है कि जब मैं बहुत छोटी थी तो अपनी बुआजी के साथ छज्जे पर लेटी थी तो एक बन्दर मेरे ऊपर से कूद कर गया था .एक बार जब मैं कहीं बाहर से आकर केले खा रही थी तो बन्दर मेरे हाथ से केले छीन कर भाग गया था .यूँ तो हमारा एक प्यारा सा कुत्ता भी था जो बंदरों की परछाई देखकर ही भौंक पड़ता था पर हाल ये था कि एक बार जब वह बन्दर को आगे बढ़ने से रोक रहा था तो बन्दर ने उसके मुहं पर थप्पड़ तक मार दिया था सन १९८७ में २९ ...