संदेश

woman empowerment /aalekh shalini kaushik लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

''तभी लेंगे शपथ ........''

चित्र
        ''औरत ने जनम दिया मर्दों को          मर्दों ने उसे बाजार दिया .''       कैसी विडम्बना है जन्म देने वाली की ,जन्म देने का सम्मान तो मिलना दूर की बात है ,अपने प्यार के बदले में प्यार भी नहीं मिलता ,मिलती है क्या एक औलाद जो केवल मर्द की हवस को शांत करने का एक जरिया मात्र है और कुदरत से उसे मिलने वाला कहने को उपहार पर आज की दुनिया को देखा जाये तो यह न तो वरदान है और न ही उपहार .बेटों ने तो अपनी सार्थकता बहुत पहले ही साबित कर दी थी और बाकी ऐसे मर्मान्तक फ़िल्मी गानों ने कर दी और रही बेटियां तो वे अब अपनी सार्थकता साबित कर रही हैं .           बेटियां पराया धन होती हैं आरम्भ से ही बेटियों को यह कहकर पाला जाता है और इसीलिए बेटियों की माँ-बाप को लेकर कोई जिम्मेदारी नहीं होती पर फिर भी देखा गया है कि बेटियां अपने माँ-बाप का बहुत ध्यान रखती हैं और अपने माँ-बाप के साथ उनके दुःख की घड़ी में एक ढाल के समान खड़ी रहती हैं .बेटियां हमेशा से नरमदिल मानी जाती हैं और यह कोरी कल्पना ही नहीं है सच्चाई है .माँ-बाप...

नारी व् सशक्तिकरण :छतीस का आंकड़ा

चित्र
  नारी सशक्त हो रही है ,आसमान छूती लड़कियां ,झंडे गाडती लड़कियां जैसी अनेक युक्तियाँ ,उपाधियाँ रोज़ हमें सुनने को मिलती हैं .किन्तु क्या इन पर वास्तव में खुश हुआ जा सकता है ?क्या इसे सशक्तिकरण कहा जा सकता है ? नहीं .................................कभी नहीं क्योंकि साथ में ये भी देखने व् सुनने को मिलता है . *आपति जनक स्थिति में पकडे गए तीरंदाज, *बेवफाई से निराश होकर जिया ने की आत्महत्या , *गीतिका ने , *फिजा ने और न जाने किस किस ने ऐसे कदम उठाये जो हमारी सामाजिक व्यवस्था पर कलंक है . गोपाल कांडा के कारण गीतिका ,चाँद के कारण फिजा के मामले सभी जानते हैं और ये वे मामले हैं जहाँ नारी किसी और के शोषण का शिकार नहीं हुई अपितु अपनी ही महत्वकांक्षाओं  का शिकार हुई .अपनी समर्पण की भावना के कारण ढेर हुई ये नारियां नारी के सशक्तिकरण की ध्वज की वाहक बनने जा रही थी किन्तु जिस भावना के वशीभूत हो ये इस मुकाम पर पहुंचना चाहती थी वही इनके पतन का या यूँ कहूं कि आत्महत्या का कारण बन गया .. ये समर्पण नारी को सशक्त नहीं होने देगा क्योंकि ये समर्पण जो सामाजिक मर्यादाओं...