''तभी लेंगे शपथ ........''
''औरत ने जनम दिया मर्दों को मर्दों ने उसे बाजार दिया .'' कैसी विडम्बना है जन्म देने वाली की ,जन्म देने का सम्मान तो मिलना दूर की बात है ,अपने प्यार के बदले में प्यार भी नहीं मिलता ,मिलती है क्या एक औलाद जो केवल मर्द की हवस को शांत करने का एक जरिया मात्र है और कुदरत से उसे मिलने वाला कहने को उपहार पर आज की दुनिया को देखा जाये तो यह न तो वरदान है और न ही उपहार .बेटों ने तो अपनी सार्थकता बहुत पहले ही साबित कर दी थी और बाकी ऐसे मर्मान्तक फ़िल्मी गानों ने कर दी और रही बेटियां तो वे अब अपनी सार्थकता साबित कर रही हैं . बेटियां पराया धन होती हैं आरम्भ से ही बेटियों को यह कहकर पाला जाता है और इसीलिए बेटियों की माँ-बाप को लेकर कोई जिम्मेदारी नहीं होती पर फिर भी देखा गया है कि बेटियां अपने माँ-बाप का बहुत ध्यान रखती हैं और अपने माँ-बाप के साथ उनके दुःख की घड़ी में एक ढाल के समान खड़ी रहती हैं .बेटियां हमेशा से नरमदिल मानी जाती हैं और यह कोरी कल्पना ही नहीं है सच्चाई है .माँ-बाप...