काश ऐसी हो जाए भारतीय नारी
चली है लाठी डंडे लेकर भारतीय नारी , तोड़ेगी सारी बोतलें अब भारतीय नारी . ................................................ बहुत दिनों से सहते सहते बेदम हुई पड़ी थी , तोड़ेगी उनकी हड्डियां आज भारतीय नारी . .......................................................... लाता नहीं है एक भी तू पैसा कमाकर , करता नहीं है काम घर का एक भी आकर , मुखिया तू होगा घर का मेरे कान खोल सुन जब जिम्मेदारी मानेगा खुद शीश उठाकर , गर ऐसा करने को यहाँ तैयार नहीं है , मारेगी धक्के आज तेरे भारतीय नारी . .......................................................... उठती सुबह को तुझसे पहले घर को सँवारुं, खाना बनाके देके तेरी आरती उतारूँ, फिर लाऊँ कमाई करके सिरपे ईंट उठाकर तब घर पे आके देख तुझे भाग्य सँवारुं . मेरे ही नोट से पी मदिरा मुझको तू मारे, अब मारेगी तुझको यहाँ की भारतीय नारी . ............................................................. पिटना किसी भी नारी का ही भाग्य नहीं है , अब पीट भी सकती है तुझे भारतीय नारी . ........................................................... जीवन लिखा है स...