कमज़र्फ़ के एहसान से अल्लाह बचाये...
"डिग्री, मेहनत और योग्यता, रखी रही बेकार गयी, उनकी हर तिकड़म रंग लाई, हमें शराफत मार गई." सत्ताधारी दल के सामने विपक्ष की यह बेबसी जग जाहिर है. विपक्ष सत्ताधारी दल को हमेशा देश के कानून की पेचीदगियां बता-बताकर उसे बार-बार चेताकर इस कोशिश में लगा रहता है कि किसी तरह उसे सत्ता का नाजायज फायदा उठाने से रोक दिया जाये किन्तु एेसा संभव नहीं हो पाता, सत्ता की ताकत से सत्ताधारी दल मदमस्त हाथी की तरह सबको कुचलता चलता है और अपनी हर हार को जीत में तब्दील करने के लिए मौजूदा कानून के और पूर्व स्थापित आदर्शों के उल्लंघन से भी गुरेज नहीं करता. आज देश में पांच राज्यों में चुनावी आहट शुरू हो चुकी है और भारतीय संविधान में भारत को 'राज्यों का संघ' कहा गया है. डी. डी. बसु के अनुसार - "भारत का संविधान एकातमक तथा संघातमक का सम्मिश्रण है." और के. सी. विहयर के अनुसार - "भारत का संविधान संघीय कम और एकातमक अधिक है." व इसकी मुख्य बात यह है कि इसमें इकाईयों को अर्थात राज्यों को संघ से पृथक होने की स्वतंत्रता नहीं है...