मैं किसी से कम थोड़े ही हूँ.
दिखावा और औरतें आज के समय में एक दूसरे के पर्याय बने हुए हैं. थे तो पहले से ही, पर आज कुछ ज्यादा ही हो गए हैं और ऐसा नहीं है कि ऐसा मैं किसी व्यक्तिगत चिढ़ की वजह से कह रही हूँ बल्कि मैंने आज की औरतों को देखा है और महसूस किया है कि महज दिखावे के लिए ये अपनी सारी जिंदगी तबाह कर लेती हैं. अभी कल ही करवा चौथ का त्यौहार मनाया गया, त्यौहार कल था पर तैयारियां पिछले 10 दिनों से शुरू थी, ठीक मुसलमान औरतों की तरह, जैसे मुसलमान औरतें ईद के मौके पर घर के काम के समान, पहनने ओढ़ने के कपड़े, चप्पल, श्रंगार के समान आदि सभी कुछ खरीदने में पैसा जाया करती फिरती हैं जैसे घर में सब कुछ खत्म ही हो गया हो ठीक वैसे ही अब हिन्दू औरतें भी करवा चौथ पर चूड़ी श्रंगार की दुकानों पर ऐसे खड़ी रहती हैं जैसे अब तक तो इन चीजों के बगैर रह रही थी और इस सब का कारण केवल इतना है कि पडोस वाली ले रही है तो हम ही पीछे क्यूँ रहें भले ही पति की मेहनत की कमाई को ही लुटाना पड़ जाए. ऐसा ही करवा चौथ के व्रत के अनुष्ठान में हो रहा है, मम्मी जब करवा चौथ का व्रत करती थी तब वे बाजार से एक करवा मंगाती थी और करवा पानी...