बेटी को इस धरा पे ,क्यूँ जन्म है दिया ?
हे प्रभु तुमने ये क्या किया बेटी को इस धरा पे ,क्यूँ जन्म है दिया ? तू कुछ नहीं कर सकती कमज़ोर हूँ तेरे ही कारण कोई बेटी ही शायद ये न सुने अपने पिता से ! फिर जन्म दिया क्यूँ बेटी को हे प्रभु तुमने ? बेटी को बना तुमने दुःख दे दिए हज़ारों बेटी ही है इस धरा पर मारो कभी दुत्कारो सामर्थ्य दिखाने की यही राह क्यूँ चुनी हे प्रभु तुमने ? जब बैठे थे बनाने हाथों से अपने बेटी अपनों से भी लड़ने की ताकत से मलते मिटटी क्यूँ धैर्य ,सहनशीलता ,दुःख ही भरे थे उसमें हे प्रभु तुमने ? ....................... शालिनी कौशिक [कौशल ]