राज्यपाल को नितीश को बिहार सौंपने की पूरी शक्ति .
नीतीश ने पेश किया दावा, मांझी ने मांगा वक्त संविधान की अनुसूची ६ के अनुच्छेद ९ [२] तथा अनुच्छेद ३७१ अ [१] [बी] और [डी] और २ [बी] और [ऍफ़] अनुच्छेद २३९ के अधीन राज्यपाल को अपने स्वविवेक का प्रयोग करने का स्पष्ट उल्लेख है .सामान्यतया वह एक संविधानिक प्रधान की हैसियत से मंत्रिपरिषद के परामर्शनुसार कार्य करेगा किन्तु ऐसी परिस्थितियों में वह संविधानिक एवं प्रभावी रूप से अपने विवेक का प्रयोग कर सकता है जहाँ पर मंत्रिपरिषद तथा उसके बीच किसी मामले पर मतभेद उठ खड़ा हुआ हो .इसबात में उसका निर्णय अंतिम होना इस बात का द्द्योतक है कि राज्यपाल उन विषयों पर मंत्रिपरिषद की राय के बिना परिस्थितियों के अनुसार अपना विवेक से कार्य कर सकता है , भले ही उनका संविधान में स्पष्ट रूप से उल्लेख न किया गया हो .ऐसी परिस्थितियां जिनमे राज्यपाल अपनी वैवेकिक शक्ति का प्रयोग कर सकता है , निम्नलिखित हैं - [१] मुख्यमंत्री की नियुक्ति [२] मंत्री को अपदस्थ करना [३] विधान सभा को भंग करना [४] अनुच्छेद ३५६ के अंतर्गत राष्ट्रपति को संकटकालीन स्थिति की घोषणा की सिफारिश करना . ...