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रेप के आगे बदजुबानी की औकात क्या ?

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''हम आह भी भरते हैं तो हो जाते हैं बदनाम, वो क़त्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होती .'' हमेशा के लिए ये शेर शायद महिलाओं की स्थिति को देखते हुए ही सही कहा जा सकता है क्योंकि कुछ भी गलत अगर महिला के साथ होता है तो लौट-फेर कर उसकी जिम्मेदारी उसी के कंधे पर डाली जाती है .पति अगर किसी और औरत के चक्कर में पड़ गया तो कहा जाता है कि-''पत्नी की ही तरफ से उदासीनता नज़र आई होगी ,वर्ना वह कहीं और क्यों मुंह मारता?'' बेटा अगर बिगड़ जाये तो माँ ने ध्यान ही नहीं रखा होगा ,बेटी के साथ छेड़छाड़ ,रेप हो जाये तो भी माँ की ही जिम्मेदारी कि उसने लड़की के लच्छन ही नहीं देखे कि लड़की कहाँ फिरती है किसके साथ फिरती है ?कहने का तात्पर्य यह है कि हर गलत स्थिति की जिम्मेदार माँ अर्थात महिला ही है और हमारे यहाँ के नेता वही जो पुरुष हैं अपनी और कोई जिम्मेदारी समझें न समझें औरत की सभी जिम्मेदारियों को बखूबी समझते हैं और उनका बखान करने से भी नहीं हिचकते .इसी योग्यता के बलबूते पर आये दिन नेता गण अपनी पुरुष बुद्धि का बहुत ही समझदारी से परिचय देते नज़र आते हैं यही योग्यता आज के जनवाणी ...