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ये तो नेहरू से भी बड़े सिरदर्द

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महात्मा गांधी एक वह नाम जो एक पार्टी के लिए तारणहार तो एक पार्टी के लिए मारणहार की भूमिका में रहा है और यही कारण रहा कि एक पार्टी उन्हें बचाने में लगी रही तो एक पार्टी ने उन्हें निबटाने में अपनी अहम भूमिका निभाई किन्तु समय बीतते बीतते ऐसा समय आ गया कि मारणहार की लोकप्रियता और जन समुदाय का उनके प्रति प्यार दूसरी पार्टी की समझ में आ गया और यह भी समझ में आ गया कि वह भले ही इस धरती पर करोडों बार जन्म ले ले पर उनके प्रति जन भावना को पलट नहीं पाएगी. इसलिये दूसरी पार्टी ने उनके प्रति नरम रुख अख्तियार किया और इसके लिए दूसरी पार्टी को महात्मा गांधी के खिलाफ अंदरुनी हालत के मामले में भी काफी विरोध का सामना करना पड़ा, पार्टी की ही एक नेत्री मालेगांव ब्लास्ट की आरोपी साध्वी प्रज्ञा ने एक बयान में कहा था कि नाथूराम गोडसे देशभक्त थे, हैं और रहेंगे. जिसपर भारतीय जनता पार्टी की किरकिरी हुई थी और पूरे विपक्ष ने भाजपा को आड़े हाथों ले लिया था. किरकिरी के बाद साध्वी प्रज्ञा ने माफी मांग ली थी, लेकिन तबतक विवाद गहरा चुका था. पहले अमित शाह का बयान आया और फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बयान दिया .इतना...