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सनातनी नहीं हैँ कुत्तों से नफरत करने वाले

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 आरम्भ से इंसान की सेवा में लगा हुआ कुत्ता आज खतरे में है. इंसान/मालिक के ऊपर मंडराते हुए खतरे को भांपकर उसकी रक्षा में प्राणों को न्योछावर तक कर देने वाला कुत्ता अपनी सुरक्षा के लिए आज इंसान की ओर देख रहा है.देश की राजधानी दिल्ली में जनता उतर आई है आज save dog campaign के साथ और ये जरुरी भी है क्योंकि कुत्ता न केवल एक जीव है बल्कि सनातन धर्म व्यवस्था में अपना एक महत्वपूर्ण स्थान भी रखता है. आजकल भाद्रपद मास चल रहा है. भाद्रपद मास की पूर्णिमा तिथि से लेकर अश्वनि की अमावस्या तक का समय श्राद्ध व पितृ पक्ष कहलाता है. इन 16 दिनों में पितरों को खुश कराने के लिए ब्राह्मणों को भोजन करवाया जाता है. इसके साथ ही पंचबलि यानी गाय, कुत्ते, कौए, देवता और चीटियों को भोजन सामग्री दी जाती है। पितृ पक्ष में कौवे, गाय और कुत्तों को भोजन कराना शुभ माना जाता है। कौवों को भोजन कराने का महत्व यह है कि वे पितरों का प्रतीक माने जाते हैं और उन्हें भोजन कराने से पितर संतुष्ट होते हैं। गाय को भोजन कराने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है और परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है। कुत्ते को भोजन कराने से पितरों की आ...