मैया तेरे आशीषों से खुशियाँ खुलकर पायेंगें .जय माता दी !
शीश नवायेंगें मैया को ; दर पर चलकर जायेंगे , मैया तेरे आशीषों से खुशियाँ खुलकर पायेंगें . ................................................................................................... लाल चुनरिया ओढ़ के मैया भक्तों पर मुस्काएंगी , हलवा पूरी भोग मिलेगा तो मेरे घर आएँगी , अपने घर पर रोज़ बुला मैया का दर्शन पाएंगे , मैया तेरे आशीषों से खुशियाँ खुलकर पायेंगें . .................................................................................................... सिंह सवारी करने वाली माँ की बात निराली है , कभी वो दुर्गा कभी भवानी कभी शारदा काली है , इन रूपों का ध्यान धरेंगे भय को दूर भगाएंगे , मैया तेरे आशीषों से खुशियाँ खुलकर पायेंगें . ..................................................................................................... माँ की महिमा गा -गाकर हम संकट दूर भगाते हैं , माँ की मूरत मन में धरकर सफल यहाँ हो पाते हैं , माँ को ही अपने जीवन में प्रेरक तत्व बनायेंगें , मैया तेरे आशीषों से खुशियाँ खुलकर...