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Allahabad high court Judgment Aalekh Shalini Kaushik Advocate लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

विवाह संस्था का स्थायित्व खत्म करते कोर्ट निर्णय - शालिनी कौशिक एडवोकेट

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  इलाहाबाद हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने एक बार फिर से बहस का मुद्दा छेड़ दिया है लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर एक अहम निर्णय देते हुए. जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की पीठ ने लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर कहा कि  " अदालत का काम कानून के अनुसार फैसला देना है, न कि सामाजिक या पारिवारिक नैतिकता के आधार पर। अगर कोई काम कानून के तहत अपराध नहीं है, तो सिर्फ समाज की सोच के कारण कोर्ट उसे गलत नहीं ठहरा सकता।" दैनिक जनवाणी की रिपोर्ट में कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि   "कोई शादीशुदा पुरुष यदि किसी वयस्क महिला के साथ उसकी सहमति से लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहा है, तो यह अपने आप में कोई आपराधिक कृत्य नहीं है। जब तक किसी कानून का उल्लंघन नहीं हो रहा, तब तक अदालत इस तरह के रिश्ते को अपराध नहीं मानेगी। "  न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने यह टिप्पणी उस याचिका पर सुनवाई के दौरान की, जिसमें एक लिव इन जोड़े ने महिला के परिवार से मिल रही धमकियों के खिलाफ सुरक्षा की मांग की थी. समाचार पत्रों की रिपोर्टिंग के अनुसार  महिला के परिवार ने प्राथमिकी दर्ज करात...