अब तो आर. एस. एस. की ही लाठी
बयान / भागवत ने कहा- भारत हिंदुओं का देश, इसीलिए दुनिया में सबसे सुखी मुसलमान यहां मिलेंगे. देश पर जान कुर्बान करने वाले, देश का संविधान बनाने वाले, देश का नव निर्माण करने वाले जिस भावना के लिए अपनी सारी ऊर्जा लगा गए उसे मिटाने के लिए आरंभ से प्रयत्नशील आर. एस. एस. को आखिर अपने इरादों में सफल होने का अवसर भारतीय जनता ने दे ही दिया और आर. एस. एस. प्रमुख मोहन भागवत को उस देश को एक धर्म विशेष का कहने का मौका मिल गया जिसके लिए वसुधैव कुटुम्बकम की भावना को मद्देनजर रखते हुए देश के संविधान निर्माताओं द्वारा संविधान की उद्देशिका में ही निम्न व्यवस्था की गई थी - "हम भारत के लोग, भारत को एक ( सम्पूर्ण प्रभुत्व - संपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य) बनाने के लिए, तथा उसके समस्त नागरिकों को : सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय: विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता : प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त कराने के लिए, तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और (राष्ट्र की एकता और अखंडता) सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए दृढ़ संकल...