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सब पाखंड घोर पाखंड मात्र पाखंड

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सब पाखंड  घोर पाखंड   मात्र पाखंड  भाईसाहब नमस्कार  कह रही थी मैडम , हाथ जोड़कर  और भाईसाहब  सिर घमंड से उठाकर  स्वीकार कर रहे थे .   पंडित जी ! प्रणाम  कह रहा था भक्त , और पंडित जी  गर्दन हिलाकर  हाथ उठाकर  भगवान बन रहे थे . मम्मी जी पाय लागूं , कह बहु झुकी  सास के पैर छूने , पर घुटनों को ही  हाथ लगाकर  अपने कमरे में  चली गयी . दोनों हाथ मिलाकर  सिर झुकाकर  खद्दरधारी नेता  मुख पर मुस्कान  बिखेर एक दूसरे का  अभिवादन कर रहे थे . और झलक रहा था  सभी तरफ से  वो पाखंड  जो छिपाए नहीं छिपता . भाईसाहब जिन्हें        नमस्कार किया  जा रहा था बढ़-चढ़कर    घर आने पर  चाय बनाने से इंकार कर .  पंडित जी को प्रणाम  पर दान के समय   सस्ते से सस्ते खरीदकर  और पंडित जी का  पैसे वाले को बड़ा  आशीर्वाद...

माँ को शीश नवाना है.

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होगा जब भगवान् से मिलना हमें यही तब कहना है, नमन तुम्हे करने से पहले माँ को शीश नवाना है. माँ ने ही सिखलाया हमको प्रभु को हर पल याद करो, मानव जीवन दिया है तुमको इसका धन्यवाद् करो. माँ से ही जाना है हमने क्या क्या तुमसे कहना है, नमन तुम्हे करने से पहले माँ को शीश नवाना है. जीवन की कठिनाइयों को गर तुम्हे पार कर जाना है , प्रभु के आगे काम के पहले बाद में सर ये झुकाना है. शिक्षा माँ की है ये हमको तुमको ही अपनाना है, नमन तुम्हे करने से पहले माँ को शीश नवाना है. माँ कहती है एक बार गर प्रभु के प्रिय बन जाओगे, इस धरती पर चहुँ दिशा में बेटा नाम कमाओगे. तुमसे मिलवाया है माँ ने इसीलिए ये कहना है, नमन तुम्हे करने से पहले माँ को शीश नवाना है.                शालिनी कौशिक  http://shalinikaushik2.blogspot.com

हमें खबर है ख़ुशी के घर है पूरी पहरेदारी.

दुःख सहने की जीवन में अब कर ली है तैयारी  हमें खबर है ख़ुशी के घर है पूरी पहरेदारी. ऐसे कर्म किये जीवन में दुःख ही दुःख अब सहना है, मन ही मन घुटते रहना है किसी से कुछ न कहना है. सबकी आती है अपनी भी आ गयी अब तो बारी, हमें खबर है ख़ुशी के घर है पूरी पहरेदारी. भला किसी का किया नहीं सोच में भी न लाये, इसीलिए अब दिन हमारे सब ऐसे कटते जाएँ. किसी से हट जाये भले दुःख अपना रहेगा जारी, हमें खबर है ख़ुशी के घर है पूरी पहरेदारी. मिलना जुलना बंद किया है जीवन अपना कोसेंगे, अब तक नादानी भोगी है अब बेचैनी भोगेंगे. जीती हो भले ही सबसे दुःख से ''शालिनी''हारी, हमें खबर है ख़ुशी के घर है पूरी पहरेदारी.                    शालिनी कौशिक  http://shalinikaushik2.blogspot.com

माँ-मेरी माँ

माँ,मेरी माँ,    खुद को क्यों न देखती हो? बच्चे कुछ बन जाये मेरे,    हरदम ये ही  सोचती हो. बच्चे खेलें तो तुम खुश हो,     पढ़ते देखके व्यस्त काम में, बच्चे सोते तब भी जगकर,     खोयी हो बस इस ख्याल में, चैन से बच्चे सोये मेरे इसीलिए तुम जगती हो! बच्चे कुछ बन जाये मेरे हरदम ये ही सोचती हो. बच्चे जो फरमाइश करते,               आगे बढ़ पूरी करती. अपने खाने से पहले तुम ,             बच्चों का हो पेट भरती . बच्चे पर कोई आंच जो आये,आगे बढ़कर झेलती हो! बच्चे कुछ बन जाएँ मेरे हरदम ये ही सोचती हो. बच्चे केवल खुद की सोचें,         तुम बस उनको देखती हो. तुम्हारे लिए कुछ करें न करें,        तुम उनका सब करती हो. अच्छे  जीवन के सपने तुम,बच्चों के लिए बुनती हो! बच्चे कुछ बन जाये मेरे,हरदम ये ही सोचती हो.