सब पाखंड घोर पाखंड मात्र पाखंड
सब पाखंड घोर पाखंड मात्र पाखंड भाईसाहब नमस्कार कह रही थी मैडम , हाथ जोड़कर और भाईसाहब सिर घमंड से उठाकर स्वीकार कर रहे थे . पंडित जी ! प्रणाम कह रहा था भक्त , और पंडित जी गर्दन हिलाकर हाथ उठाकर भगवान बन रहे थे . मम्मी जी पाय लागूं , कह बहु झुकी सास के पैर छूने , पर घुटनों को ही हाथ लगाकर अपने कमरे में चली गयी . दोनों हाथ मिलाकर सिर झुकाकर खद्दरधारी नेता मुख पर मुस्कान बिखेर एक दूसरे का अभिवादन कर रहे थे . और झलक रहा था सभी तरफ से वो पाखंड जो छिपाए नहीं छिपता . भाईसाहब जिन्हें नमस्कार किया जा रहा था बढ़-चढ़कर घर आने पर चाय बनाने से इंकार कर . पंडित जी को प्रणाम पर दान के समय सस्ते से सस्ते खरीदकर और पंडित जी का पैसे वाले को बड़ा आशीर्वाद...