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वाह रे भाजपा और भाजपाइयों

न्यायिक क्षेत्राधिकार मिले लखनऊ को : भाजपा ,आज के समाचारपत्रों में भाजपा के उत्तर प्रदेश में विधान मंडल दल के नेता सुरेश कुमार खन्ना तथा विधान परिषद में पार्टी के नेता ह्रदय नारायण दीक्षित के कथन को स्थान दिया गया और यह स्थान देना ही भाजपा की मतलब परस्त व् अवसरवादी राजनीति का चेहरा सामने लाने को पर्याप्त था .उत्तर प्रदेश में भाजपा स्वयं सत्ता में नहीं है और इसलिए यहाँ अपनी जनता के हितों के बारे में सोच व् प्रतिबद्धता दिखाने को लखनऊ जनपद के जो जिले नजदीक होने के कारण क्षेत्राधिकार में इलाहाबाद के अंतर्गत आते हैं और उस कारण वादकारियों को जो समय व् पैसे के अपव्यय की असुविधा होती है उसे लेकर भाजपा के ये नेता ,क्योंकि यहाँ सपा की सरकार है इसलिए बढ़-चढ़कर उन जिलो का क्षेत्राधिकार लखनऊ को दिलाने की बात करते हैं और जहाँ के लिए वे स्वयं कुछ कर सकते हैं वहां अपना न तो सकारात्मक रवैया रखते हैं और न ही उस सम्बन्ध में कोई कदम उठाते हैं सिर्फ और सिर्फ इसलिए कि इससे उनके पूर्वी उत्तर प्रदेश के वोट बैंक पर प्रभाव पड़ने की सम्भावना है और इसलिए तो रविशंकर प्रसाद जी पत्र भेजकर बेंच के संबंध में विचार ...

''बेंच दो या हटो सरकारों ''

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  बेंच को लेकर वकीलों की तालाबंदी,कचहरी गेट पर दिया धरना ,इलाहाबाद बार का पुतला फूंका ,वकीलों से झड़पें ऐसी सुर्खियां समाचारपत्रों की १९७९ से बनती रही हैं और अभी आगे भी बनते रहने की सम्भावना स्वयं हमारी अच्छे दिन लाने वाली सरकार ने स्पष्ट कर दी है क्योंकि केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद के पत्र पर बेंच गठन के लिए बनी कमेटी को ही भंग कर दिया गया है .    पश्चिमी यूपी में हाईकोर्ट बेंच हमेशा से राजनैतिक कुचक्र का शिकार बनती रही है और किसी भी दल की सरकार आ जाये इस मुद्दे पर अपने वोट बैंक को बनाये रखने के लिए इसे ठन्डे बस्ते में डालती रही है और इसका शिकार बनती रही है यहाँ की जनता ,जिसे या तो अपने मुक़दमे को लड़ने के लिए अपने सारे कामकाज छोड़कर अपने घर से इतनी दूर कई दिनों के लिए जाना पड़ता है या फिर अपना मुकदमा लड़ने के विचार ही छोड़ देना पड़ता है .   वकील इस मुद्दे को लेकर जनता की लड़ाई लड़ रहे हैं और जनता इस बात से अभी तक या तो अनभिज्ञ है या कहें कि वह अपनी अनभिज्ञता  को छोड़ना ही नहीं चाहती जबकि यह हड़ताल उन्हें हर तरह से नुकसान पहुंचा रही है और वे रोज़ न्याय...

अधिवक्ताओं से डरो सरकारों .

पिछले 1 महीने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अधिवक्तागण हाईकोर्ट बेंच की स्थापना की मांग को लेकर एक बार फिर से संघर्षरत हैं और ऐसा लगता है कि हड़ताल दिनों-दिन बढ़ती जा रही है और सरकार की तरफ से अधिवक्ताओं की हड़ताल को लेकर कोई भी ऐसा कदम नहीं उठाया जा रहा है जिसे देखते हुए कहा जा सके कि सरकार जनता के हित  को लेकर संजीदा है .बार बार इस तरह की हड़ताल और लगातार शनिवार को चली आ रही इसी मांग को लेकर हड़ताल का औचित्य ही अब समझ से बाहर हो गया है क्योंकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश जिस स्थिति में है उसे एक स्वतंत्र राज्य के रूप में होना चाहिए और उसका सभी कुछ अपना होना चाहिए .  पश्चिमी यू.पी.उत्तर प्रदेश का सबसे समृद्ध क्षेत्र है .चीनी उद्योग ,सूती वस्त्र उद्योग ,वनस्पति घी उद्योग ,चमड़ा उद्योग आदि आदि में अपनी पूरी धाक रखते हुए कृषि क्षेत्र में यह उत्तर प्रदेश सरकार को सर्वाधिक राजस्व प्रदान करता है .इसके साथ ही अपराध के क्षेत्र में भी यह विश्व में अपना दबदबा रखता है .यहाँ का जिला मुजफ्फरनगर तो बीबीसी पर भी अपराध के क्षेत्र में ऊँचा नाम किये है और जिला गाजियाबाद के नाम से तो अभी हाल ही में...