आखिर सुषमा क्यों पीछे हटी ?
आतंकवाद के खिलाफ नई दिल्ली में भारत ,रूस और चीन के विदेश मंत्रियों के १५वें सम्मलेन में तीनों देशों ने इसके खात्मे का ऐलान किया है .साथ ही टेरर फंडिंग रोकने और आतंकी ढांचे को ख़त्म करने पर भी जोर दिया है .यह कदम स्वागत योग्य है और ऐसे वक्त पर और भी ज्यादा जब देश की संसद पर आतंकी हमले के 16 साल पूरे होने जा रहे हों संसद पर आतंकी हमले के 16 साल पूरे हो गए हैं. 13 दिसंबर 2001 को आतंकियों ने भारतीय संसद पर हमला किया था. उस आतंकी हमले में दिल्ली पुलिस के छह सदस्य, दो पार्लियामेंट सेक्योरिटी सर्विस के सदस्य शहीद हुए थे. संसद परिसर का एक कर्मचारी भी मारा गया. जवाबी कार्रवाई में पांचों आतंकी ढेर कर दिए गए. उस हमले के बाद भारत-पाकिस्तान तनाव चरम पर पहुंच गया था और भारत ने पश्चिमी मोर्चे पर सैन्य गतिविधियों को बढ़ा दिया था. पर सबसे ज्यादा आश्चर्य इस बात का है कि तीनो देशो की ओर से इस सम्मलेन के बाद जारी संयुक्त बयान में पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठनों का जिक्र नहीं है जबकि सितम्बर में चीन के शियामेन में हुई ब्रिक्स [ब्राज़ील,रूस ,भारत...