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dear daughter /kavita shalini kaushik लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

...क़त्ल कर देता .

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अगर बिन दर्द के अपने मुझे तू क़त्ल कर देता , खुदा अपने ही हाथों से ये तेरी सांसें ले लेता , जन्म मेरा ज़मीं पर चाहा कब कभी किसने जुनूनी कोई भी बढ़कर कलम ये सर ही कर देता . ................................................................ दिलाओ मुझको हर तालीम हवाले फिर कहीं कर दो , भला अपने जिगर का टुकड़ा कोई ऐसे दे देता , तड़प जाती हैं रूहें भी हकीकत सोच कर ऐसी मोहब्बत तेरी बेटी को कोई तुझसी नहीं देता . ............................................................ लुटाकर के जहाँ अपना हैं तुमने बेटियां पाली , लुटे वो और घर जाकर ये कैसे देख तू लेता , जमाना कितना ज़ालिम है ये जाने हैं जहाँ वाले नहीं ऐसे में बेटी को जनम का दर्द है देता . ......................................................... खिलाया अपने आँगन में जिसे नन्हीं चिरैया सी , उसे वो बाज़ के हाथों परोसकर नहीं देता , तेरी आँखों का जो तारा ,तेरी जो गोद की गुड़िया वो तड़पे एक-एक दाने को सहन तू कैसे कर लेता . ............................................................... ज़माने ने भरे हैं दर्द गहरे जिसके जीवन में , उसे...