कॉंग्रेस:संविधान सर्वोपरि
एक बार फिर कॉंग्रेस ने साबित कर दिया है कि उसके लिए भारतीय संविधान सर्वोपरि है कॉंग्रेस ने पी.एम्.पद के उम्मीदवार का नाम घोषित न करते हुए कहा कि यह कॉंग्रेस की परंपरा नहीं है ,ये बात ही ज़ाहिर करती है कि संविधान द्वारा निश्चित किये गए मानकों को अपनाना ही कॉंग्रेस की परंपरा है और संविधान ने यह अधिकार सांसदों को दिया है इसलिए किसी के भी अधिकारों को न छीनते हुए कॉंग्रेस ने एक बार फिर देश के सामने एक आदर्श पार्टी का अपना स्वरुप कायम रखा है क्योंकि संविधान का इस सम्बन्ध में कहना है - भारतीय संविधान के अनुच्छेद ७५[१] में कहा गया है - *अनुच्छेद ७५[१]-प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति करेगा और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर करेगा .'' यदि इस अनुच्छेद को सर्वमान्य माना जाये तो प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति के विवेक पर निर्भर करती है और राष्ट्रपति की स्थिति संविधान के अनुसार यह है - -अनुच्छेद ५२ कहता है कि भारत का एक राष्ट्रपति होगा . -अनुच्छेद ५३ [१] कहता है कि संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित होगी और वह उसका प्रयोग इस संविधान ...