.............तभी कम्बख्त ससुराली ,
थी कातिल में कहाँ हिम्मत ,मुझे वो क़त्ल कर देता , अगर मैं अपने हाथों से ,न खंजर उसको दे देता . ............................................................................... वो बढ़ जाए भले आगे ,लिए तलवार हाथों में , मिले न जिस्म मेरा ये ,क़त्ल वो किसको कर लेता . ................................................................................. बढ़ाते हैं हमीं साहस ,जुर्म करने का मुजरिम में , क्या नटवर लाल सबके घर...