#बीसीआई_भेदभाव_बंद_करो


बहुत ही असंतोषजनक बात है कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा पश्चिमी उत्तर प्रदेश से चयनित बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के चैयरमैन श्री रोहिताश्व अग्रवाल जी को बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के पूर्वी उत्तर प्रदेश के खेमे के प्रभाव में कार्य नहीं करने दिया जा रहा है. बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा एक वर्ष के लिए दो अध्यक्ष निर्वाचित होने पर अगर एतराज था तो यह रोक तभी लगाई जानी चाहिए थी जब श्री जानकी शरण पांडेय एडवोकेट जी ने अध्यक्ष पद का कार्यभार संभाला था, 
लेकिन उनके कार्यकाल में ऐसी कोई रोक नहीं लगाई गई, उनका कार्यकाल बिना किसी रुकावट के सम्पन्न करा दिया गया, जैसे ही श्री रोहिताश्व कुमार अग्रवाल एडवोकेट जी ने 6.1.2021 को कार्यभार संभाला तभी बार काउंसिल ऑफ इंडिया जागरूक हो गई और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एडवोकेट द्वारा बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष पद सम्भालने पर अपने अनाधिकार एतराज उठाने आरंभ कर दिए, जबकि अगर एक वर्ष में बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के दो अध्यक्ष होना गलत है तो यह एतराज तो 2019 मे ही उठ जाना चाहिए था जब स्व दरवेश यादव एडवोकेट जी और श्री हरिशंकर सिंह जी संयुक्त रूप से बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के संयुक्त रूप से अध्यक्ष निर्वाचित हुए थे. 

मैं बार काउंसिल ऑफ इंडिया के इस भेदभाव का विरोध करती हूं और अपने बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष श्री रोहिताश्व कुमार अग्रवाल एडवोकेट जी का समर्थन करती हूं.
    शालिनी कौशिक एडवोकेट
     चैम्बर नंबर 29
     जिला कोर्ट शामली स्थित कैराना

टिप्पणियां

बहुत सही।
भेद-भाव तो कहीं भी नहीं होना चाहिए।

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