सत्ता और बर्बादी


 ध्यान से पढ़ें और समझें

बहुत समय पहले स्वर्ग में बर्बादी आने वाली थी, उसने इन्द्र देव से रात को सोते से जगाकर कहा कि मैं कल को स्वर्ग में आ रही हूँ, तुम मेरा साथ देना अन्यथा तेरा राज पाट सब नष्ट भ्रष्ट कर डालूंगी, इन्द्र देव स्वर्ग की सत्ता को लेकर बहुत ही चिंतनीय रहते थे ऐसे में उन्होंने बर्बादी से पूछा कि क्या करना होगा, तब बर्बादी ने कहा कि तुम स्वर्ग के निवासियों को बचाने का दिखावा करते रहना, पर करना कुछ भी मत, उनकी भगवान में आस्था को भुनाना और उनसे ताली थाली बजवाना मतलब कि उनका ध्यान कहीं और भटकाने में लगे रहना, जिस समय उन्हें घर की, धन की सबसे ज्यादा जरूरत हो उसी समय तुम स्वर्ग को देवस्थान बनाने के दुखडे रोकर उनका समस्त धन उनसे पल्ला पसार कर मांग लेना. इन्द्र देव द्वारा ऐसा ही करने पर स्वर्ग में बर्बादी ही बर्बादी छा गई, चारों ओर दुर्दशा का गरीबी का माहौल हो गया. जब बर्बादी जाने लगी तो इंद्र देव ने बर्बादी से कहा कि तुमने तो केवल बर्बादी के लिए कहा था, पर यह क्या किया कि स्वर्ग वासियों की तो सारी जिंदगी ही उजाड़ दी तो बर्बादी ने कहा कि मैंने तो केवल बर्बादी को ही कहा था यह थोड़े ही कहा था तुम उनका सब कुछ हड़पकर अपने खास मित्र देवताओं को दे दो, ऐसे में मैंने तो केवल स्वर्ग वासियों को थोड़ा बहुत दुख देकर बर्बाद किया पर तुमने तो अपनी सत्ता लोलुपता के कारण उन्हें बिल्कुल नेस्तनाबूद ही कर दिया जिससे उबरने में शायद उनकी जिंदगियां ही बीत जाएंगी.

संयम रखें क्योंकि वैसे भी इन्द्र देव के आगे अन्य देव कर भी क्या सकते हैं.

शालिनी कौशिक

( कौशल) 

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