मुस्लिम महिला का पाकिस्तान पर तंज -शालिनी कौशिक एडवोकेट

 


बस का सफर कभी कभी ऐसे अनुभव दे जाता है जो दिल को गहराई तक छू जाते हैं. आज का बस का सफर भारत देश के मान को एक बार फिर बढ़ा गया..

बस मे भीड़ चढ़ ही रही थी, मेरे बराबर मे मुझसे पूछकर एक बुजुर्ग मुस्लिम महिला बैठ गई. जो पहले से ही पान खाए जाने की रट लगा रही थी. तभी उसमें एक चूर्ण बेचने वाला मुस्लिम विक्रेता चढ़ा और अपना चूर्ण बेचने की आवाज लगाने लगा तभी बुजुर्ग महिला ने उसे टोकते हुए अपनी मुट्ठी खोलकर दो और एक रुपये का सिक्का दिखाते हुए कहा कि पान बेचता हो तो बोल..... तब वह विक्रेता भी तपाक से बोला कि अब कहाँ यहां पान बिकते हैं, पान तो बहुत महंगा हो गया,अब तो सुपारी, गुटखा ही ले रहे हैं सब.... ये सुनते ही बुजुर्ग मुस्लिम महिला बोली - "क्यूँ यहां भी पाकिस्तान हो गया क्या?"

ये सुनते ही मैंने एकदम पूछ लिया कि क्यूँ आपने ऐसा क्यूँ कहा तब वह चूर्ण विक्रेता बोला कि ये ठीक कह रही हैं पाकिस्तान मे पान नहीं मिलता, वहां भी पान भारत से ही जाता है ये सुनकर एक बार फिर अपने देश भारत की समृद्धि पर सर गर्व से ऊंचा हो गया किन्तु बुजुर्ग मुस्लिम महिला का पान का बिराग खत्म नहीं हुआ और जब कंडक्टर ने उससे टिकट के पैसे मांगे तो उसने कहा कि "पान दिलवाता हो तो दूँ" और यह ही पान राग बार बार मुट्ठी खोलकर दो और एक रुपये का सिक्का दिखाते हुए टिकट के पैसे पान दिलवाने की शर्त पर देने की बात पर धीरे धीरे सफर को आगे बढ़ाता ही रहा.

द्वारा 

शालिनी कौशिक 

एडवोकेट 

कैराना (शामली) 

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