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महात्मा गांधी को दबाने में जुटी संघी फौज

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       भारतीय लोकतंत्र आज जिस बुरे दौर से गुजर रहा है उसकी कल्पना करना भी एक आम भारतीय के लिए कठिन है. ऊपर से लेकर नीचे तक देश आज वह कार्य कर रहा है जिसके लिए इस देश को अंग्रेजों से आजाद कराकर लाने वाले स्वतंत्रता सेनानी कभी भी इजाज़त नहीं देते. पूरा विश्व जानता है कि 150 वर्षों तक चले भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अनेकों वीर भारतीयों ने अपनी शहादत दी और अफ्रीका में रंगभेद नीति के खिलाफ सफल आंदोलन से विश्व प्रसिद्ध हुए महात्मा गांधी ने सत्य अहिंसा के दम पर अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर विवश किया और स्वामी श्रद्धानंद जी द्वारा महात्मा गांधी और महान सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वारा राष्ट्रपिता की उपाधि से सम्मानित किये गये. देश के लिए अपना उज्जवल भविष्य अपने पूरे परिवार सहित पूरा जीवन लगाने वाले महात्मा गांधी को अंग्रेजों की भारत को बांटने की साजिश देखनी पड़ी, उनका हृदय भारत पाक बँटवारे के कारण छलनी छलनी हो गया. देश के बँटवारे के लिए उनके शब्द थे - भारत का बँटवारा मेरी लाश पर होगा. देश के स्वतंत्र होने के बाद संघीय सोच के नाथूराम गोडसे की गोली और सावरकर की साजिश का श...

"नौतपा" आ रहा है.

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      आजकल पूरे उत्तर भारत में भीषण गर्मी पड़ रही है. ऐसे में एक शब्द जो गूगल पर छाया हुआ है वह है "नौतपा". मानव मन जिज्ञासु प्रवृत्ति का होता है. इसलिए जब "नौतपा" शब्द सामने आया तो उसके बारे में जानने की इच्छा भी हुई. जिसके बारे में पता चला है कि - "गर्मी के मौसम में भीषण गर्मी के शुरू के 9 दिन सबसे अध‍िक गर्म होते हैं. इन 9 द‍िनों को ही 'नौतपा' कहते हैं. वैज्ञानिक दृष्टिकोण के अनुसार मई के आखिरी सप्‍ताह में सूर्य और पृथ्‍वी के बीच की दूरी सबसे कम हो जाती है. सूर्य की किरणें इन दिनों सीधे धरती पर पड़ती हैं."       इस साल सूर्य 24 मई की मध्यरात्रि के बाद 3 बजकर 16 मिनट पर रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेगा. इसलिए नौतपा 25 तारीख से माना जाएगा. नौतपा का आरंभ 25 मई से होगा और 2 जून तक रहेगा. इन 9 दिनों में भीषण गर्मी होती है. आसमान से आग बरसने लगती है. इसका असर न केवल मनुष्यों पर होता है बल्कि पेड़-पौधे नदी तालाब पर भी देखने को मिलता है.(गूगल से साभार)             बढ़ती गर्मी मनुष्यों के लिए तो असहनीय होती ही है. इसी क...

सभी सनातन धर्मावलंबी 10 मई को मनाएं अक्षय तृतीया - परशुराम जयंती

 अक्षय तृतीया या आखा तीज वैशाख मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को कहते हैं। पौराणिक ग्रन्थों के अनुसार इस दिन जो भी शुभ कार्य किये जाते हैं, उनका अक्षय फल मिलता है। इसी कारण इसे अक्षय तृतीया कहा जाता है।वैसे तो सभी बारह महीनों की शुक्ल पक्षीय तृतीया शुभ होती है, किन्तु वैशाख माह की यह तिथि स्वयंसिद्ध मुहूर्तो में मानी गई है। बचपन से ही अक्षय तृतीया के बारे में घर के बड़े बुजुर्गों से सुनते आए हैं, आज तक इस पवित्र दिवस की सबसे विशेष पहचान हिन्दू विवाह के अबूझ मुहूर्त के रूप में होती रही है. कहते हैं कि जिसकी शादी का कोई मुहूर्त नहीं मिल पा रहा हो, उसके विवाह के लिए अक्षय तृतीया का दिन पंडितों द्वारा सुझा दिया जाता है किन्तु इस बार अक्षय तृतीया के दिन विवाह नहीं हो रहे हैं क्योंकि विवाह के प्रमुख कारक ग्रह गुरु एवं शुक्र दोनों ही अस्त हो गए हैं और जब ये दोनों ग्रह जाग्रत अवस्था में न हों तो शादी विवाह नहीं होते हैं, किन्तु ऐसा नहीं है कि अक्षय तृतीया की महत्ता केवल विवाह शादी को लेकर ही हो, अक्षय तृतीया का हमारे धर्म शास्त्रों में, शुभ कार्यों में, दान पुण्यों के कार्य में बहुत महत...

प्रियंका गांधी से क्षमा मांगे यदि सच्चे रामभक्त है भाजपा और उसके अनुयायी

     भाजपा और अंधभक्त आज सत्ता के नशे में चूर नजर आ रहे हैं और इसका जीता जागता प्रमाण वे स्वयं प्रस्तुत कर रहे हैं. विपक्ष के नेताओं को लेकर भाजपा के बड़े बड़े नेताओं से लेकर छुटभैये कार्यकर्ताओं द्वारा भी भारतीय संस्कृति और सभ्यता की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं. अभी तक भाजपाइयों द्वारा राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को लेकर मात्र पप्पू और पिंकी शब्दावली का ही प्रयोग किया जा रहा था, किन्तु अपने बड़े नेताओं द्वारा इनके लिए असभ्य शब्दों का धड़ल्ले से इस्तेमाल किए जाने पर छुटभैये भाजपाइयों की भी ढीठ खुलती हुई नजर आ रही है. राहुल गांधी जी को लेकर तो अपशब्द भाजपा के शीर्ष से पहले ही जारी थे किंतु अब प्रियंका गांधी जी के भी चुनाव प्रचार में उतरने पर देश की सभ्यता संस्कृति की ठेकेदार बनने वाली भाजपा के कार्यकर्ताओं द्वारा प्रियंका गांधी जी के लिए जिन अपशब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा है उसका लिया जाना भी एक सभ्य भारतीय अपने सपने में भी सोच नहीं सकता.      भारतीय संस्कृति में नारी का जो स्थान है उसे इतना भ्रष्ट स्वरुप कभी भी प्राप्त नहीं हुआ होगा, जितना बीजेपी के मौजूद...

बेटी का जीवन बचाने में सरकार और कानून दोनों असफल

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आजकल रोज समाचारपत्रों में महिलाओं की मौत के समाचार सुर्खियों में हैं जिनमे से 90 प्रतिशत समाचार दहेज हत्याओं के हैं. जहां एक ओर सरकार द्वारा महिला सशक्तिकरण के लिए गाँव और तहसील स्तर पर "मिशन शक्ति" कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा महिलाओं को उनके कानूनी अधिकारों की जानकारी न्यायाधीशों और अधिवक्ताओं द्वारा मुफ्त में उपलब्ध करायी जा रही है, सरकारी आदेशों के मुताबिक परिवार न्यायालयों में महिला के पक्ष को ही ज्यादा मह्त्व दिया जाता है वहीं सामाजिक रूप से महिला अभी भी कमजोर ही कही जाएगी क्योंकि बेटी के विवाह में दिए जाने वाली "दहेज की कुरीति" पर नियंत्रण लगाने में सरकार और कानून दोनों ही अक्षम रहे हैं.           एक ऐसा जीवन जिसमे निरंतर कंटीले पथ पर चलना और वो भी नंगे पैर सोचिये कितना कठिन होगा पर बेटी ऐसे ही जीवन के साथ इस धरती पर आती है .बहुत कम ही माँ-बाप के मुख ऐसे होते होंगे जो ''बेटी पैदा हुई है ,या लक्ष्मी घर आई है ''सुनकर खिल उठते हों .                  '...

हरियाली तीज -झूला झूलने की परंपरा पुनर्जीवित हो.

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            श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तीज तिथि 18 अगस्त से आरंभ होकर 19 अगस्त को रहने वाली है ऐसे में हरियाली तीज को लेकर अपना बचपन याद आना स्वाभाविक है. बचपन में विद्यालय का इस दिन अवकाश रहता था और हम सभी सहपाठी छात्राएं नए नए वस्त्र पहनकर और अपनी तरफ से पूरा श्रंगार कर एक टोली बनाकर निकल एक दूसरे के घर जाती थी, झूला झूलती थी, घेवर खाती थी और तीज का त्योहार हँस खेलकर मनाती थी.         हर‌ियाली तीज का उत्सव श्रावण मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है। यह उत्सव महिलाओं का उत्सव है। सावन में जब सम्पूर्ण प्रकृति हरी ओढ़नी से आच्छादित होती है उस अवसर पर महिलाओं के मन मयूर नृत्य करने लगते हैं। वृक्ष की शाखाओं में झूले पड़ जाते हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश में इसे कजली तीज के रूप में मनाते हैं। सुहागन स्त्रियों के लिए यह व्रत बहुत महत्व रखता है। आस्था, उमंग, सौंदर्य और प्रेम का यह उत्सव शिव-पार्वती के पुनर्मिलन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। चारों ओर हरियाली होने के कारण इसे हरियाली तीज कहते हैं। इस अवसर पर महिलाएं झूला झूलती ...

योगी आदित्यनाथ जी कैराना में स्थापित करें जनपद न्यायालय शामली

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         2011 में 28 सितंबर को शामली जिले का सृजन किया गया. तब उसमें केवल शामली और कैराना तहसील शामिल थी. इससे पहले शामली और कैराना तहसील मुजफ्फरनगर जनपद के अंतर्गत आती थी. कुछ समय बाद शामली जिले में ऊन तहसील बनने के बाद अब शामली जिले के अंतर्गत तीन तहसील कार्यरत हैं. 2018 के अगस्त तक शामली जिले का कानूनी कार्य मुजफ्फरनगर जिले के अंतर्गत ही कार्यान्वित रहा किन्तु अगस्त 2018 में शामली जिले की कोर्ट शामली जिले में जगह का चयन न हो पाने के कारण कैराना में आ गई और इसे नाम दिया गया -" जिला एवं सत्र न्यायालय शामली स्थित कैराना. "         2018 से अब तक मतलब अगस्त 2023 तक शामली जिले के मुख्यालय से लगभग 12 किलोमीटर दूर जिला जज की कोर्ट के लिए जगह का चयन हो जाने के बाद शासन द्वारा 51 एकड़ भूमि जिला न्यायालय कार्यालय और आवासीय भवनों के लिए आवंटित की गयी थी, जिसमें चाहरदीवारी के निर्माण के लिए 4 करोड़ की धन राशि अवमुक्त की गई थी जिससे अब तक केवल बाउंड्रीवाल का ही निर्माण हो पाया है. उच्च न्यायालय इलाहाबाद द्वारा जिला न्यायालय कार्यालय और आवासीय भवनों के न...