ये ''कामवालियां''


Woman in depression - stock photo
लड़ती हैं
खूब झगड़ती हैं
चाहे जितना भी
दो उनको
संतुष्ट कभी नहीं
दिखती हैं
खुद खाओ
या तुम न खाओ
अपने लिए
भले रसोईघर
बंद रहे
पर वे आ जाएँगी
लेने
दिन का खाना
और रात का भी
मेहमानों के बर्तन
झूठे धोने से
हम सब बचते हैं
मैला घर के ही लोगों का
देख के नाक सिकोड़ते हैं
वे करती हैं
ये सारे काम
सफाई भेंट में हमको दें
और हम उन्हीं को 'गन्दी 'कह
अभिमान करें हैं अपने पे
माता का दर्जा है इनका
लक्ष्मी से इनके काम-काज
ये ''कामवालियां'' ही हमको
रानी की तरह करवाएं राज़ .

.....................
शालिनी कौशिक
[कौशल ]

टिप्पणियाँ

सहमत आपकी बात से ... आजकल तो अगर ये न हों तो काम ही न चले ...
Rajendra kumar ने कहा…


आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (07.03.2014) को "साधना का उत्तंग शिखर (चर्चा अंक-१५४४)" पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें, वहाँ आपका स्वागत है, धन्यबाद।
Tamasha-E-Zindagi ने कहा…
आपकी यह पोस्ट आज के (०६ मार्च, २०१४) ब्लॉग बुलेटिन -ईश्वरीय ध्यान और मानव पर प्रस्तुत की जा रही है | बधाई
Parul kanani ने कहा…
बात तो सही है ! :)
कौशल लाल ने कहा…
सुन्दर एवं सत्य ....
ये'कामवालियां'ही हमको
रानी की तरह करवाएं राज़...

वाह ! बहुत सुंदर !

RECENT POST - पुरानी होली.
सहमत आपकी बात से...!!

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