संदेश

.....पर मोदी घबराये ,

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  राजनीति की भांग से भाजपाई मदहोश , मोदी चाय पीने को खो रहे अपने होश . ............................... अटल पड़े एकांत में मांगें सबकी खैर , शुकर करें भगवान् का बने जो अबके गैर . ................................................ लाल कृष्ण की आँख से नित्य बहता नीर , मोदी लहर के अंधों को दिखे न उनकी पीर . ....................................... जोशी सुरीली बांसुरी हो गयी अब बेसुर , आर.एस.एस.ने छीन ली वो आवाज़ मधुर . ...................................... टंडन बिलखत फिर रहे बातें करें उखड , अध्यक्ष जी ने आगे बढ़ काटी उनकी जड़ . .......................................... जेटली ए.सी.कमरे से खुली धूप में आये , शायद मोदी डोर से लोकसभा मिल जाये . .................................................. अपनी लहर है बह रही पर मोदी घबराये , काशी सुकून होगी दल की उन्हें तो घर ही भाये . ................... शालिनी कौशिक     [कौशल ]

मंज़िल मिलेगी अवश्य .

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  प्रतीक्षा  धैर्य  विश्वास   मंज़िल मिलेगी अवश्य ! भगवान     के कर्म  मनुष्य की भलाई  हर काम  हर बात  का समय निश्चित  फिर कर्म की  पुण्य की  क्या महत्ता ? जीवन की  दशा  दिशा  भाग्य पर निर्भर, भाग्य  प्रारब्ध का फल ! इस जन्म के कर्म  अगले जन्म का  भाग्य ! मोक्ष  उस आत्मा को  जो  पाप-पुण्य से परे ! मोक्ष की आकांक्षा  की  गयी  आत्मा फिर  घिरी  पाप-पुण्य के जाल में , फिर  चाहत से  कुछ नहीं  अनचाहा मन  रहे नहीं , रहे मात्र  प्रतीक्षा  धैर्य  विश्वास  मंज़िल मिलेगी अवश्य . शालिनी कौशिक      [कौशल ]

बाज़ार बन चुका मीडिया

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मीडिया लोकतंत्र की पहचान जनता का हथियार सत्य सर्वत्र प्रसारित हो सब हर सच से परिचित हों कर्त्तव्य परम किन्तु पथभ्रष्ट हुआ भटका ये स्तम्भ समाचारों का प्रकाशन प्रचार  प्रसार मात्र चंद रुपयों में संविदा आधारित व्यापार बनी आज सत्य पथ पर चलने की प्रतिज्ञा प्राप्त जहाँ से ठेका,विज्ञापन बढ़ा रहा उसे आगे बता रहा उसे सही फिर कहाँ गया विश्वास सत्य ला रहा ये किस पर करें भरोसा जब असत्य कह रहा ये फिर कैसी ये पहचान लोकतंत्र की कैसा ये हथियार जनता का आज मात्र बाज़ार बन चुका मीडिया जहाँ बिक रहा है प्रचार ,प्रसार,समाचार। शालिनी कौशिक     [कौशल ] 

मोदी की सरकार-भाजपा दरकिनार

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वाराणसी व् लखनऊ दो ऐसी सीट जिनकी महत्ता भारतीय लोकतंत्र की १६ वीं लोकसभा के चुनावों में जनता के सामने आ रही है और इसलिए भारतीय जनता पार्टी ने अपने प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार श्री मोदी और भाजपा अध्यक्ष श्री राजनाथ को लखनऊ सीट से उतारा है .पार्टी इन दोनों सीटों को बहुत महत्व दे रही है और यह हालत तब हैं जब वर्त्तमान में भी दोनों सीटें भाजपा के ही पास हैं इसलिए सवाल ये उठता है कि अपने दमदार व् पार्टी को पूर्ण रूप से समर्पित इन नेताओं से ये सीटें छीनने की नौबत क्यूँ आ गयी जबकि ये दोनों ही अपनी सीट छोड़ने के मूड में नहीं थे ऐसे में तो साफ़ तौर पर अपनी ऐसी कार्यवाही से भाजपा के ये धुरंधर अपना उल्लू सीधा करने की कोशिश करने में लगे ही कहे जायेंगे और वह भी तब जब चारों तरफ देश में मीडिया मोदी की लहर कह रहा है और इस लहर में बहने को दूसरे दलों से बड़े बड़े नेता भागे चले आ रहे हैं .लहर जिसके बारे में भाजपा वाले और स्वयं ये मीडिया वाले भी नहीं जानते कि वह क्या होती है उसके लिए किसी से कुछ छीनने की आवश्यकता नहीं पड़ती, उसके लिए अपनी सीट छोड़कर कहीं और से लड़ने की ज़रुरत नहीं होती ,उसके लिए अपने बड़े -ब...

होली की शुभकामनायें तभी जब होली ऐसे मनाएं

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  ·              कल  जब मैं बाज़ार से घर लौट रही थी तो देखा   कि स्कूलों से बच्चे रंगे हुए   लौट रहे हैं और वे खुश भी थे जबकि मैं उनकी   यूनीफ़ॉर्म के रंग जाने के   कारण   ये सोच रही थी कि जब ये घर पहुंचेंगे तो इनकी मम्मी ज़रूर इन पर गुस्सा   होंगी .बड़े होने पर हमारे मन में ऐसे ही भाव आ जाते हैं जबकि किसी भी   त्यौहार का पूरा   आनंद     बच्चे ही लेते हैं क्योंकि वे बिलकुल निश्छल भाव से   भरे होते हैं और हमारे मन चिंताओं से ग्रसित हो जाते हैं किन्तु ये बड़ों   का ही   काम है कि वे बच्चों में ऐसी भावनाएं भरें जिससे बच्चे अच्छे ढंग से   होली मनाएं.हमें चाहिए कि हम उनसे कहें कि होली आत्मीयता का त्यौहार है   इसमें हम सभी को मिलजुल कर आपस में ही त्यौहार मानना चाहिए और कोशिश करनी   चाहिए की हमारे काम से किसी के दिल को चोट न पहुंचे.ये कह कर   कि "बुरा न   मानो    होली है "कहने से गलत काम को सही नहीं किया जा सकता इसलिए कोशि...

सरज़मीन नीलाम करा रहे हैं ये

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  सरज़मीन नीलाम करा रहे हैं ये  सरफ़रोश बन दिखा रहे हैं ये , सरसब्ज़ मुल्क के बनने को सरबराह  सरगोशी खुले आम किये जा रहे हैं ये . .......................................... मैकश हैं गफलती में जिए जा रहे हैं ये  तसल्ली तमाशाइयों से पा रहे हैं ये , अवाम के जज़्बात की मज़हब से नज़दीकी  जरिया सियासी राह का बना रहे हैं ये . .......................................... ईमान में लेकर फरेब आ रहे हैं ये  मज़हब को सियासत में रँगे जा रहे हैं ये , वक़्त इंतखाब का अब आ रहा करीब  वोटें बनाने हमको चले आ रहे हैं ये . ..................................................... बेइंतहां आज़ादी यहाँ पा रहे हैं ये  इज़हार-ए-ख्यालात किये जा रहे हैं ये , ज़मीन अपने पैरों के नीचे खिसक रही  फिकरे मुख़ालिफ़ों पे कैसे जा रहे हैं ये . ................................................. फिरका-परस्त ताकतें उकसा रहे हैं ये  फिरंगी दुश्मनों से मिले जा रहे हैं ये , कुर्बानियां जो दे रहे हैं मुल्क की खातिर  उन्हीं को दाग-ए-मुल्क कहे जा रहे हैं ये . ................

लो फिर आ गया

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लो फिर आ गया धोती -कुर्ता पहन बेंत से कर ठक-ठक आवाज़ आज फिर उसका कोई अपना पुलिस ने पकड़ा शायद ! रो रहा है हाथ जोड़ रहा है आज़ादी अपने की चाहे वह हर घडी परिवार जो है बहुत बड़ा पालनकर्ता उस अपने के पीछे न जाने वो क्यूँ है पड़ी ? दालों में कंकड़ भर करके चर्बी से घी बना करके खुद का पेट ही नहीं भरा वो पाले है परिवार मेरा , जग थोड़े ही पालेगा घर को मेरे फिर क्यूँ परवाह वो किसी की करे ? ये कहने वाला आज यहाँ रो-रोकर पैर है पकड़ रहा बरसों से घर के सामने से बिन दुआ सलाम था गुज़र रहा पर आज पड़ा जब से मतलब दिन-रात यहाँ बैठे टिककर कानून से पिंड छुड़ाने को दीवाली मनायी थी मिलकर काम हुआ फिर हमें भूल गया और आज हमारा घर हमारा चेहरा उसे फिर याद आ गया और नयी मुसीबत से बचने लो फिर आ गया वो धोती-कुर्ता पहन बेंत से कर ठक-ठक आवाज़ . शालिनी कौशिक [कौशल ]