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पेशेवर अगर है अपराधी है किशोर नहीं

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Supreme Court urges govt to make juvenile law more deterrent [The Supreme Court on Monday urged the government to bring about necessary changes in the juvenile law in order to have a deterrent effect and to send a message to the society that life of the victim was equally important under the rule of law ] उच्चतम न्यायालय ने हत्या ,बलात्कार जैसे गंभीर मामलों में किशोर कानून पर पुनर्विचार की ज़रुरत मानी है .सर्वोच्च अदालत का यह कदम सराहनीय है किन्तु अभी आधा -अधूरा विचारणीय प्रयास ही कहा जायेगा क्योंकि आज की परिस्थितियों में किशोर की परिभाषा में ही परिवर्तन समय की आवश्यकता बन गया है और वह इसलिए क्योंकि आज बहुत से किशोर किशोर रहे ही नहीं हैं वे युवा पेशेवर अपराधियों से भी तेज दिमाग रखकर अपराध के क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं . भारतीय दंड संहिता की धारा ८२ सात वर्ष से कम आयु के शिशु के कार्य को अपराध की श्रेणी से बाहर रखती है किन्तु धारा ८३ सात वर्ष से ऊपर और १२ वर्ष से कम आयु के शिशु के कार्य को परिपक्वता की श्रेणी में रख अपराध मानने या न मानने का प्रावधान करत...

६० फीसदी चेतावनी से कोई फर्क नहीं पड़ेगा प्रधानमंत्री जी

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  सिगरेट के पैकेट के 6o फीसदी हिस्से पर माननीय प्रधानमंत्री जी ने चेतावनी छापने के निर्देश दिए हैं शायद उनकी सोच से ऐसा करने से सिगरेट पीने वालों को पता चलेगा कि सिगरेट पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है जबकि न केवल हरेक देशवासी बल्कि स्वयं प्रधानमंत्री जी भी भली-भांति जानते हैं कि इन उत्पादों का सेवन करने वाला हर व्यक्ति इनकी हानियों से वाकिफ है और केवल अपनी आदत से मजबूर होकर और बहुत सी बार अपनी सम्पन्नता दिखाने को इन उत्पादों का सेवन करता है .ऐसे में ये चेतावनी अगर सिगरेट के पूरे पैकिट पर भी छपी हो तो इससे इनकी बिक्री व् जनता के स्वास्थ्य पर इससे पड़ने वाले दुष्प्रभाव को रोकना नामुमकिन नहीं तो कठिन अवश्य होगा ऐसे में मात्र एक ही उपाय इनके सम्बन्ध में प्रभावी रोक लगा सकता है और वह है इनकी कीमतों में लगभग चार गुना की वृद्धि क्योंकि जब ये पीने वालों की सेहत के साथ साथ उनकी जेब पर भी फर्क डालेगी तो उनकी अक्ल में इसके प्रयोग में कमी लाने की कोशिश जैसे उपाय आ सकते हैं पूर्णतया रोक जैसे नहीं और पूर्णतया रोक तो सरकार भी नहीं लगा सकती क्योंकि इसकी बिक्री से मिलने वाले राजस्व को व...

नारी व् सशक्तिकरण :छतीस का आंकड़ा

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  नारी सशक्त हो रही है ,आसमान छूती लड़कियां ,झंडे गाडती लड़कियां जैसी अनेक युक्तियाँ ,उपाधियाँ रोज़ हमें सुनने को मिलती हैं .किन्तु क्या इन पर वास्तव में खुश हुआ जा सकता है ?क्या इसे सशक्तिकरण कहा जा सकता है ? नहीं .................................कभी नहीं क्योंकि साथ में ये भी देखने व् सुनने को मिलता है . *आपति जनक स्थिति में पकडे गए तीरंदाज, *बेवफाई से निराश होकर जिया ने की आत्महत्या , *गीतिका ने , *फिजा ने और न जाने किस किस ने ऐसे कदम उठाये जो हमारी सामाजिक व्यवस्था पर कलंक है . गोपाल कांडा के कारण गीतिका ,चाँद के कारण फिजा के मामले सभी जानते हैं और ये वे मामले हैं जहाँ नारी किसी और के शोषण का शिकार नहीं हुई अपितु अपनी ही महत्वकांक्षाओं  का शिकार हुई .अपनी समर्पण की भावना के कारण ढेर हुई ये नारियां नारी के सशक्तिकरण की ध्वज की वाहक बनने जा रही थी किन्तु जिस भावना के वशीभूत हो ये इस मुकाम पर पहुंचना चाहती थी वही इनके पतन का या यूँ कहूं कि आत्महत्या का कारण बन गया .. ये समर्पण नारी को सशक्त नहीं होने देगा क्योंकि ये समर्पण जो सामाजिक मर्यादाओं...

दहेज़ के दानवों को सबक

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  मंडप भी सजा ,शहनाई बजी , आई वहां बारात भी , मेहँदी भी रची ,ढोलक भी बजी , फिर भी लुट गए अरमान सभी . समधी बात मेरी सुन लो ,अपने कानों को खोल के , होगी जयमाल ,होंगे फेरे ,जब दोगे तिजोरी खोल के . आंसू भी बहे ,पैर भी पकड़े , पर दिल पत्थर था समधी का , पगड़ी भी रख दी पैरों में , पर दिल न पिघला समधी का . सुन लो समधी ये भावुकता ,विचलित न मुझे कर पायेगी , बेटे पर खर्च जो मैंने किया ,ये मुझको न दे पायेगी . देख पिता की हालत को , बेटी का घूंघट उतर गया . सम्मान जिन्हें कल देना था , उनसे ही माथा ठन गया . सुन लो बाबूजी बात मेरी ,अब खुद की खैर मना लो तुम , पकड़ेगी पुलिस तुम्हें आकर ,खुद को खूब बचा लो तुम . सुनते ही नाम पुलिस का वे , कुछ घबराये ,कुछ सकुचाये , फिर माफ़ी मांग के जोड़े हाथ , बोले रस्मे पूरी की जाएँ . पर बेटी दिल की पक्की थी ,बाबूजी से अड़कर बोली , अब शादी न ये होगी कभी ,बोलो चाहे मीठी बोली . ए लड़की !बोलो मुँह संभाल , तू लड़की है ,कमज़ोर है , हम कर रहे बर्ताव शरीफ , समझी तू शायद और है . बेटी से ऐसी भाषा पर ,बाप का क्...

आजकल का प्यार तो ये है .

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  क्या यही प्यार है- ''न पीने का सलीका न पिलाने का शऊर , ऐसे ही लोग चले आये हैं मयखाने में.'' कवि गोपाल दास ''नीरज''की या पंक्तियाँ आजकल के कथित प्रेमी-प्रेमिकाओं पर शत-प्रतिशत खरी उतरती हैं जो कहने को करते तो प्यार हैं लेकिन प्यार के नाम पर वे कुछ और ही कर रहे हैं कहीं आजकल का कथित प्रेमी प्रेमिका का क़त्ल कर रहा है तो कहीं आजकल की कथित प्रेमिका अपने पति और ४ -४ बच्चों को छोड़कर उसके साथ भागी जा रही है। कहीं प्रेमी प्रेमिका को किसी और की होने से रोकने के लिए उसका चेहरा तेजाब से झुलसा रहा है और इस तरह उसका पूरा जीवन ही नर्क बना रहा है और एक तरफ प्रेमिका प्यार के नाम पर सौदे कर रही है कहीं प्रेमी से अपने फोन के बिल भरवा रही है तो कहीं महंगे महंगे उपहार खरीद  रही है जबकि प्यार का एक नाम त्याग भी कहा जाता है ये शायद आजकल के तथाकथित प्रेमी प्रेमिकाओं को मालूम ही नहीं है। क्या यही है आज का प्यार जो ऐसी स्थितियां अपने कथित प्यार के लिए उत्पन्न करता है .ये तो वही बात हुई - '' हम तो डूबेंगे सनम तुमको भी ले डूबे...

मानव आज भी पशु है

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''आदमी '' प्रकृति की सर्वोत्कृष्ट कृति है .आदमी को इंसान भी कहते हैं , मानव भी कहते हैं ,इसी कारण आदमी में इंसानियत , मानवता जैसे भाव प्रचुर मात्र में भरे हैं ,ऐसा कहा जाता है किन्तु आदमी का एक दूसरा पहलु भी है और वह है इसका अन्याय अत्याचार जैसी बुराइयों से गहरा नाता होना .कहते हैं सृष्टि के आरम्भ में आदमी वानर था , वानर अर्थात पशु , सभी ने ये फ़िल्मी गाना सुना ही होगा - '' आदमी है क्या बोलो आदमी है क्या -आदमी है बन्दर -जूते उठाके भागे कपडे चुराके भागे .....'' और धीरे धीरे सभ्यता विकसित हुई और वह पशु से आदमी बनता गया किन्तु जैसे कि एक पंजाबी कहावत है - '' वदादिया सुजादडिया जप शरीर नाल .'' अर्थात बचपन की लगी आदतें शरीर के साथ-साथ जाती हैं ,ठीक वैसे ही जो ये सभ्यता का आरम्भकाल मानव जीवन का आरम्भकाल है अर्थात बचपन के समान है ,उसमे पशु होने के कारण वह आज तक भी उस प्रवृति अर्थात पशु प्रवृति से मुक्त नहीं होने पाया है और पशु प्रवृति के लिए ही कहा गया है - ''यही पशु प्रवृति है कि आप आप ही चरे .'' और इसी प्रवृति के अधीन मनुष्य...

जय माता दी !

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शीश नवायेंगें मैया को  ; दर   पर चलकर जायेंगे , मैया तेरे आशीषों से खुशियाँ खुलकर पायेंगें  . ................................................................................................... लाल चुनरिया ओढ़ के मैया भक्तों पर मुस्काएंगी , हलवा पूरी भोग मिलेगा तो मेरे घर आएँगी , अपने घर पर रोज़ बुला मैया का दर्शन पाएंगे , मैया तेरे आशीषों से खुशियाँ खुलकर पायेंगें  . .................................................................................................... सिंह सवारी करने वाली माँ की बात निराली है , कभी वो दुर्गा कभी भवानी कभी शारदा काली है , इन रूपों का ध्यान धरेंगे भय को दूर भगाएंगे , मैया तेरे आशीषों से खुशियाँ खुलकर पायेंगें  . ..................................................................................................... माँ की महिमा गा -गाकर हम संकट दूर भगाते हैं , माँ की मूरत मन में धरकर सफल यहाँ हो पाते हैं , माँ को ही अपने जीवन में प्रेरक तत्व बनायेंगें , मैया तेरे आशीषों से खुशियाँ खुलकर...