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ऐसे ही सिर उठाएगा ये मुल्क शान से .

चित्र
फरमा रहा है फख्र से ,ये मुल्क शान से ,
कुर्बान तुझ पे खून की ,हर बूँद शान से।
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फराखी छाये देश में ,फरेब न पले ,
कटवा दिए शहीदों ने यूँ शीश शान से .
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 देने को साँस लेने के ,काबिल वो फिजायें ,
कुर्बानी की राहों पे चले ,मस्त शान से .
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आज़ादी रही माशूका जिन शूरवीरों की ,
साफ़े की जगह बाँध चले कफ़न शान से .
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कुर्बानी दे वतन को जो आज़ाद कर गए ,
शाकिर है शहादत की हर  नस्ल  शान से .
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इस मुल्क का गुरूर है वीरों की शहादत ,
फहरा रही पताका यूँ आज शान से .
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मकरूज़ ये हिन्दोस्तां शहीदों तुम्हारा ,
नवायेगा सदा ही सिर सरदर शान से .
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पैगाम आज दे रही कुर्बानियां इनकी ,
घुसने न देना फिर कभी…