सोमवार, 28 मई 2012

शीश नवायेंगें मैया को ;दर पर चलकर जायेंगे

Maa Durga
शीश नवायेंगें मैया को  ;दर  पर चलकर जायेंगे ,
मैया तेरे आशीषों से खुशियाँ खुलकर पायेंगें .

[मेरा भजन मेरे स्वर में ]



हर  बेटी में रूप है माँ का इसीलिए पूजे मिलकर ;
सफल सभ्यता तभी हमारी बेटी रहेगी जब खिलकर ;
हम बेटी को जीवन देकर माँ का क़र्ज़ चुकायेंगे .
मैया तेरे आशीषों से खुशियाँ खुलकर पायेंगें .
                                                     जय माता दी !
                                              शालिनी कौशिक 
                                          [कौशल ]

रविवार, 20 मई 2012

एक नमन राजीव जी को


एक  नमन  राजीव  जी  को  आज उनकी पुण्यतिथि के  अवसर पर.राजीव जी बचपन से हमारे प्रिय नेता रहे आज भी याद है कि इंदिरा जी के निधन के समय हम सभी कैसे चाह रहे थे कि राजीव जी आयें और प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठ जाएँ क्योंकि ये बच्चों की समझ थी कि जो जल्दी से आकर कुर्सी पर बैठ जायेगा वही प्रधानमंत्री हो जायेगा.तब हमारे दिमाग की क्या कहें वह तो उनके व्यक्तित्व पर ही मोहित था जो एक शायर के शब्दों में यूँ था-
''लताफत राजीव गाँधी,नफासत राजीव गाँधी ,
         थे सिर से कदम तक एक शराफत राजीव गाँधी ,
नज़र आते थे कितने खूबसूरत राजीव गाँधी.''
राजीव जी का  जन्म २० अगस्त १९४४ को हुआ था और राजनीति से कोसों दूर रहने वाले राजीव जी अपनी माता श्रीमती इंदिरा जी के  कारण राजनीति में  आये और देश को पंचायत राज और युवा मताधिकार जैसे उपहार उन्होंने दिए .आज  उनकी पुण्यतिथि के अवसर पर मैं उन्हें याद करने से स्वयं को नही रोक पाई किन्तु जानती हूँ कि राजीव जी भी राजनीति में आने के कारण बोफोर्स जैसे मुद्दे ी अपने माथे पर लगाये २१ मई १९९१  को एक आत्मघाती हमले का शिकार होकर हम सभी को छोड़ गए आज भी याद है वह रात जब १०.२० मिनट पर पापा कहीं बाहर से आकर खाना खा रहे थे और  हम कैरम खेल रहे थे कि विविध भारती  का  कार्यक्रम छाया गीत बीच में  बंद हुआ और जैसे ही एक उद्घोषक ने कहा ,''अखिल भारतीय कॉंग्रेस कमेटी के अध्यक्ष....''और इससे पहले कि वह कुछ बोलता कि पापा बोले कि राजीव गाँधी की हत्या हो गयी हम चीख कर पापा से क्या लड़ते क्योंकि अगले पल ही यह समाचार उद्घोषक बोल रहा था और हमारा राजनीति  से सम्बन्ध तोड़ रहा था राजीव जी के साथ हमने राजनीति में रूचि को भी खो दिया बस रह गयी उनकी यादें जो हम आज यहाँ आप सभी से शेयर  कर रहे हैं हालाँकि जानते हैं कि ब्लॉग जगत में अधिकांश उनके खिलाफ हैं किन्तु हम जिनसे आज तक  जुड़े हैं वे राजीव जी ही थे और वे ही रहेंगे.
श्रीमती मुमताज़ मिर्ज़ा के शब्दों में -
''रहबर गया,रफीक गया,हमसफ़र गया,
राजीव पूरी कौम को मगमून कर गया.
सदियाँ भुला सकेंगी न उसके कमाल को,
राजीव चंद सालों में वो काम कर गया.''


शालिनी कौशिक
                      

संभल जा रे नारी ....

''हैलो शालिनी '' बोल रही है क्या ,सुन किसी लड़की की आवाज़ मैंने बेधड़क कहा कि हाँ मैं ही बोल रही हूँ ,पर आप ,जैसे ही उसने अपन...