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जनवरी, 2018 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

हीरालाल कश्यप भी दोषी

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        भारत वर्ष में दहेज़ को रोकने के लिए भारतीय दंड संहिता में भी प्रावधान हैं और इसके लिए अलग से दहेज़ प्रतिषेध अधिनियम भी बनाया गया है जिसकी जानकारी आप मेरे ब्लॉग कानूनी ज्ञान की इस पोस्ट ''कानून है तब भी "  से ले सकते हैं किन्तु इस सबके बावजूद दहेज़ हत्याओं में कमी नहीं आयी है और एक बार को गरीब तबके को छोड़ भी दें वो इसलिए कि पहले तो उनमे इसका इतना प्रचलन नहीं है क्योंकि इसके लिए बड़े तबकों के लोग यह कह देते हैं कि ''इन्हें लड़की मिलती ही कहाँ है ये तो लड़की को खरीदते हैं ''किन्तु अपने गिरेबान में अगर ये बड़े तबके झांक लें तो इनमे लड़की को खरीदने जैसी कुप्रथा तो नहीं अपितु लड़कों को बेचने जैसी माखन लपेट सुप्रथा का प्रचलन है और इसी तबके में आज भी लड़कियां दहेज़ के लिए मारी जा रही हैं ,जलाई जा रही हैं।      और इसका जीता जागता प्रमाण है कल देश के ६९ वें गणतंत्र दिवस पर समाचारों की सुर्ख़ियों में रही यह खबर -'' पिता मिनिस्टर तो ससुर सांसद रहे, फिर भी इतनी टॉर्चर हुई थी ये लड़की''      कल इस मामले में कोर्ट का फैसला आया जिसमे  पूर्व सांसद और बीजेपी

गणतंत्र फ़साना बना हे ! हिन्दवासियों ,

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फ़िरदौस इस वतन में फ़रहत नहीं रही , पुरवाई मुहब्बत की यहाँ अब नहीं रही . ...................................................................................... नारी का जिस्म रौंद रहे जानवर बनकर , हैवानियत में कोई कमी अब नहीं रही .  .............................................................  फरियाद करे औरत जीने दो मुझे भी , इलहाम रुनुमाई को हासिल नहीं रही . ............................................................................ अंग्रेज गए बाँट इन्हें जात-धरम में , इनमे भी अब मज़हबी मिल्लत नहीं रही .  ..........................................................  फरेब ओढ़ बैठा नाजिम ही इस ज़मीं पर , फुलवारी भी इतबार के काबिल नहीं रही .  ........................................................  लाये थे इन्कलाब कर गणतंत्र यहाँ पर , हाथों में जनता के कभी सत्ता नहीं रही .  .......................................................   वोटों में बैठे आंक रहे आदमी को वे , खुदगर्जी में कुछ करने की हिम्मत नहीं रही .  ..........................................................   इल्ज़ाम

पुनर्विवाह के बाद विधवा विधवा कहाँ ?

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  आज सुबह के समाचार पत्र में एक समाचार था कि ''पुनर्विवाह के बाद भी विधवा पूर्व पति की कानूनी वारिस '' ये निर्णय महिला अधिकारों पर पंजाब व् हरियाणा हाईकोर्ट का था ,अहम् फैसला है किन्तु क्या सही है ? क्या एक महिला जो कि दुर्भाग्य से विधवा हो गयी थी और समाज के प्रगतिशील रुख के कारण दोबारा सुहागन हो गयी है उसका कोई हक़ उस पति की संपत्ति में रहना जिससे विधि के विधान ने उसे अलग कर एक नए पति के बंधन में बांध दिया है ,जिस परिवार के प्रति अब उसका कोई दायित्व नहीं रह गया है और जिसकी उसे अब कोई ज़रुरत भी नहीं है उस परिवार की संपत्ति में उसका ये दखल क्या उसकी सशक्तता के लिए आवश्यक कहा जा सकता है ?        महिला अधिकारों की बातें करना सही है ,उसकी सशक्तता के लिए आवाज़ बुलंद करना सही है ,उसकी सुरक्षा के लिए कानूनी प्रावधान किया जाना उचित है किन्तु पुनर्विवाह के बाद भी पूर्व पति की संपत्ति में उसका हक़ किसी भी दृष्टि से उचित नहीं कहा जा सकता है क्योंकि जो पति होता है वह किसी का बेटा और भाई भी होता है किन्तु इस तरह से उनके साथ हो रहे अन्याय को रोकना तो रोकना उसके सम्बन्ध में सोचना भी गु

बीजेपी में आदिकाल से होती रही हैं रेप की घटनाएं

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हरियाणा में पिछले दिनों हुई  रेप  की घटनाओं ने राज्य के साथ पूरे देश को हिला कर रख दिया है, वहीं कुरुक्षेत्र के बीजेपी सांसद  राजकुमार सैनी  ने रेप को लेकर विवादित बयान दिया है। राज्य में बलात्कार की बढ़ती घटनाओं पर सैनी ने कहा की रेप की घटनाएं आदिकाल से होती आ रही हैं और यह सरकार से पूछकर नहीं होती। देश की जनसंख्या बढ़ना भी रेप की घटनाओं को बढ़ावा देता है। गौरतलब है कि हरियाणा में बेटियों के खिलाफ अपराध रुक नहीं रहे हैं। गुड़गांव में गैंगरेप का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि एक नाबालिग का शुक्रवार को अपहरण कर लिया गया। पिछले दस दिनों में गैंगरेप की करीब आठ-दस घटनाएं हुई हैं लेकिन ज्यादातर मामलों को पुलिस सुलझा नहीं सकी है।  पिछले दिनों भी एडीजी आरसी मिश्रा ने शर्मनाक तरीके से रेप को 'समाज का हिस्सा' बताते हुए कह दिया था कि 'इस तरह की घटनाएं अनंतकाल से होती चली आ रही हैं।'  इसी तरह   बादशाहपुर थाना एरिया के गांव बेगमपुर खटौला में 12 व 7 साल की दो बच्चियां नजदीक की फैक्ट्री में काम करने वाले अपने पिता को सुबह खाना देने गई थीं। करीब साढ़े 8 बजे दोनों

विभीषण अब भी हैं

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   देश में इस वक़्त चारों तरफ एक मुद्दा गर्म है और वह है लोकतंत्र में खतरे का और खतरा कैसा? वैसा ही जैसा हमारे माननीय चार न्याधीशों ने हमें बताया है ,चलिए मान लेते हैं कि लोकतंत्र खतरे में है और मानना सामान्यतः थोड़े ही है विशेष रूप से क्योंकि संविधान ने हमारे देश में सुप्रीम कोर्ट को लोकतंत्र के तीन प्रमुख स्तम्भों में से वरिष्ठ स्तम्भ का दर्जा दिया है और इसकी बागडोर सँभालने वाले चार न्यायाधीश ही जब यह कहने लगें कि लोकतंत्र खतरे में है तो न मानने लायक कुछ रह ही नहीं जाता .हमारे चारों ये न्यायाधीश सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश हैं और ऐसा ये केवल कल्पना से नहीं कह रहे वरन अपनी आत्मा की आवाज़ पर ही कह रहे हैं .उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ इन्होने मोर्चा खोला है और ऐसा करते वक्त इनकी जो बात सबसे ज्यादा ध्यान देने लायक है वह यह है कि ''हम नहीं चाहते कि 20  साल बाद कोई यह कहे कि हमने अपनी आत्मा बेच दी थी .''आज जब दुनिया में सब कुछ बिक रहा है ऐसे घोर कलियुग में न्यायाधीशों का अपनी आत्मा पर कलंक को लेकर सक्रिय होना प्राचीन बहुत कुछ याद दिला रहा है .         

राष्ट्रगान पर भारी सेल्फी

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   राष्ट्रगान एक ऐसा गान जो देशभक्ति की भावना हर एक भारतीय में भर देता है .जब भी कहीं राष्ट्रगान की धुन सुनाई देती है हर भारतीय का मस्तक गर्व से तन जाता है और वह अनायास ही सावधान की मुद्रा में खड़ा हो जाता है और तब तक खड़ा रहता है जब तक राष्ट्रगान बजता रहता है .30  नवम्बर 2016  को सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय ''कि देशभर के सिनेमाघरों में फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान बजाना अनिवार्य हो , ने सारे देश में राष्ट्रगान के इस तरह से सम्मान पर एक बहस सी छेड़ दी थी और लगभग आये जनमत के अनुसार इस तरह के सम्मान को देशभक्ति के दिखावे में सम्मिलित कर दिया था ,जबकि हमारे संविधान ने ही कई कर्तव्यों के साथ इसे भी एक कर्तव्य के रूप में ही सम्मिलित किया है पर किसी के प्रति भी जबरदस्ती की कोई भी भावना संविधान में ही व्यक्त नहीं की गयी है .भारत का संविधान अपने अनुच्छेद 51 -क में कहता है  - 51क. मूल कर्तव्य--भारत के प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य होगा कि वह-- (क) संविधान का पालन करे और उसके आदर्शों, संस्थाओं, राष्ट्र ध्वज और राष्ट्रगान का आदर करे; (ख) स्वतंत्रता के लिए हमारे राष्ट्रीय आंदोलन को

तीन तलाक केवल बक-बक

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राज्‍यसभा शुक्रवार को अनिश्चितकाल तक के लिए स्‍थगित हो गई है. इसके चलते  तीन तलाक बिल लटक गया है .सभापति ने गतिरोध खत्‍म करने के लिए सरकार और विपक्ष की बैठक बुलाई थी जो बेनतीजा रही.लोकसभा में 28 दिसंबर 2017  को एक साथ तीन तलाक पर रोक लगाने वाला ऐतिहासिक मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक-2017 बिना किसी संशोधन के पास हो गया। सदन में विधेयक के खिलाफ सभी संशोधन खारिज हो गए थे  .सुप्रीम कोर्ट द्वारा तीन तलाक को असंवैधानिक करार  दिए जाने पर यह तो साफ हो गया था कि सरकार को इसे लेकर अब कोई कानून जल्द ही बनाना होगा किन्तु सरकार ने जो इस सम्बद्ध में कानून बनाया उसे लेकर विपक्ष और मुस्लिम संगठनों में रोष है .      सरकार द्वारा लाये गए इस बिल की दस विशेष बातें निम्नलिखित हैं -  1-यह एक महत्वपूर्ण बिल है जिससे एक साथ तीन तलाक देने के खिलाफ सज़ा का प्रावधान होगा जो मुस्लिम पुरुषों को एक साथ तीन तलाक कहने से रोकता है। ऐसे बहुत से मामले हैं जिनमें मुस्लिम महिलाओं को फोन या सिर्फ एसएमएस के जरिए तीन तलाक दे दिया गया है। 2-इस बिल में तीन तलाक को दंडनीय अपराध का प्रस्ताव है। ये बिल तीन तलाक

इस्लाम इतना कमजोर नहीं ?

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   मशहूर शायर अनवर जलालपुरी का आज लखनऊ में निधन हो गया. वह करीब 70 वर्ष के थे. जलालपुरी के बेटे शाहकार के मुताबिक, उनके पिता ने आज सुबह लखनऊ स्थित ट्रॉमा सेंटर में आखिरी सांस ली. उनके परिवार में पत्नी और तीन बेटे हैं. उन्होंने बताया कि जलालपुरी को गत 28 दिसंबर को उनके घर में मस्तिष्क आघात के बाद किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया था, जहां सुबह करीब सवा नौ बजे उन्होंने अंतिम सांस ली. जलालपुरी को कल दोपहर में जोहर की नमाज के बाद अम्बेडकर नगर स्थित उनके पैतृक स्थल जलालपुर में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा.मुशायरों की जान माने जाने वाले जलालपुरी ने 'राहरौ से रहनुमा तक', 'उर्दू शायरी में गीतांजलि' तथा भगवद्गीता के उर्दू संस्करण 'उर्दू शायरी में गीता' पुस्तकें लिखीं जिन्हें बेहद सराहा गया था. उन्होंने 'अकबर द ग्रेट' धारावाहिक के संवाद भी लिखे थे.       बस जैसे ही ध्यान गया जलालपुरी जी के भगवत गीता के उर्दू में अनुवाद पर  ''उर्दू शायरी में गीता ''पुस्तक लिखने की ओर  गया तो मन एकदम चला गया कल के अख़बारों की ए

मुस्लिम महिलाओं को यशोदा बेन मत बनाओ मोदी जी

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तीन तलाक के खिलाफ लोकसभा से बिल पारित किए जाने के ठीक बाद  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  ने हज यात्रा को लेकर मुस्लिम महिलाओं के हक में आवाज उठाई है। पुरुष अभिभावक के बिना महिलाओं के हज यात्रा पर रोक को भेदभाव और अन्याय बताते हुए पीएम ने कहा कि उनकी सरकार ने इसे खत्म कर दिया है। पीएम ने साल के अंतिम 'मन की बात' में कहा कि  मुस्लिम महिलाएं  अब पुरुषों के बिना भी हज यात्रा पर जा सकती हैं।      मुस्लिम महिलाओँ को लेकर प्रधानमंत्री मोदी जी कुछ ज्यादा ही सक्रिय हैं और पहले तीन तलाक के मुद्दे पर वे मुस्लिम  महिलाओँ का साथ देते नज़र आये और अब वे महिलाओँ के अभिभावक के साथ के बिना हज पर जाने को लेकर उन्हें ललचाते नज़र आ रहे हैं लेकिन ये सब करते हुए वे मुस्लिम महिलाओँ के लिए कुरान में दिए गए निर्देशों की तरफ तनिक भी ध्यान नहीं दे रहे हैं जबकि स्वयं मुस्लिम महिलाओँ के अनुसार ''चलना तो हमें पाक कुरान के हुकुम के अनुसार ही है '' और कुरान में महिलाओँ के लिए कहा गया है - सर्वप्रथम - फुक़हा इस बात पर सहमत हैं कि पत्नी के लिए - बिना किसी ज़रूरत या धार्मिक कर्तव्य के - अपने पति की